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...तो बड़े चेहरों को बेनकाब होने से रोकने को बदले जांच अधिकारी!
Updated Mon, 19 Nov 2018 11:06 PM IST
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चंपावत। वन विभाग ने अवैध लीसे की बरामदगी के मामले में तीन माह बाद अब जांच अधिकारी बदल दिया है। अब लोहाघाट के रेंजर को यह जांच सौंपी गई है। वन विभाग का कहना है कि पहले जांच अधिकारी काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी पर दो रेंज का चार्ज है और इस वजह से उन पर काम का दबाव अधिक है।
पुलिस और वन विभाग की टीम ने आठ अगस्त को चंपावत और अल्मोड़ा जिले की सीमा पर वालिक गांव के पास से दो पिकअप जीप से 240 टिन अवैध लीसा आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ बालम सिंह डोल शहरफाटक (अल्मोड़ा) और उमेश चंद्र मल्ली दीनी, पहाड़पानी (नैनीताल) से बरामद किया था। बाद में प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट ने काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी को जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच अभी पूरी होती, इससे पूर्व ही जांच अधिकारी को बदल दिया गया। काली कुमाऊं के रेंजर के स्थान पर 30 अक्तूबर को यह जांच लोहाघाट के रेंजर दीप जोशी को स्थानांतरित कर दी गई।
सूत्र बताते हैं कि पहले जांच अधिकारी की पड़ताल से अवैध लीसा प्रकरण में लिप्त कई बड़ों चेहरों के बेनकाब होने की आहट थी। सूत्र बताते हैं कि जब्त दोनों जीपों को रिलीज करवाने से लेकर मामले को रफा दफा करवाने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
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लीसा के अवैध टिनों के मामलों में किसी को बचाने का सवाल ही नहीं उठता। जांच पूरी तरह निष्पक्षता से कराई जा रही है। पहले जांच कर रहे अधिकारी को बदलने की वजह उनके पास ज्यादा काम का होना है। काली कुमाऊं के रेंजर के पास फिलहाल चंपावत रेंज का भी अतिरिक्त चार्ज है। नए जांच अधिकारी से निष्पक्षता के साथ जल्द जांच पूरी करने को कहा गया है।
- केएस बिष्ट, प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।
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पुलिस और वन विभाग की टीम ने आठ अगस्त को चंपावत और अल्मोड़ा जिले की सीमा पर वालिक गांव के पास से दो पिकअप जीप से 240 टिन अवैध लीसा आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ बालम सिंह डोल शहरफाटक (अल्मोड़ा) और उमेश चंद्र मल्ली दीनी, पहाड़पानी (नैनीताल) से बरामद किया था। बाद में प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट ने काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी को जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच अभी पूरी होती, इससे पूर्व ही जांच अधिकारी को बदल दिया गया। काली कुमाऊं के रेंजर के स्थान पर 30 अक्तूबर को यह जांच लोहाघाट के रेंजर दीप जोशी को स्थानांतरित कर दी गई।
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सूत्र बताते हैं कि पहले जांच अधिकारी की पड़ताल से अवैध लीसा प्रकरण में लिप्त कई बड़ों चेहरों के बेनकाब होने की आहट थी। सूत्र बताते हैं कि जब्त दोनों जीपों को रिलीज करवाने से लेकर मामले को रफा दफा करवाने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
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लीसा के अवैध टिनों के मामलों में किसी को बचाने का सवाल ही नहीं उठता। जांच पूरी तरह निष्पक्षता से कराई जा रही है। पहले जांच कर रहे अधिकारी को बदलने की वजह उनके पास ज्यादा काम का होना है। काली कुमाऊं के रेंजर के पास फिलहाल चंपावत रेंज का भी अतिरिक्त चार्ज है। नए जांच अधिकारी से निष्पक्षता के साथ जल्द जांच पूरी करने को कहा गया है।
- केएस बिष्ट, प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।