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बिना सदस्य का किशोर न्याय बोर्ड
Updated Mon, 08 Jan 2018 11:39 PM IST
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किशोर न्याय (बालकों की देखरेख व संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत चंपावत जिले में किशोर न्याय बोर्ड गठन किया गया है लेकिन इसका का संचालन बिना सदस्यों के चल रहा है। शासन स्तर पर आवेदन आमंत्रित करने के बावजूद किशोर न्याय बोर्ड में सदस्य नामित नहीं हो सके हैं। हालांकि जिले में किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट अखिलेश कुमार पांडेय द्वारा कार्यभार ग्रहण कर लिया गया है, लेकिन किशोर न्याय बोर्ड में एक भी सदस्य नामित न होने के कारण वह किशोर अपराधों से संबंधित मामलों में अपना निर्णय देने में असमर्थ हैं, क्योंकि किशोर न्याय अधिनियम की धारा सात के अनुसार किशोर अपराध के मामले के अंतिम निपटारे के समय कोई भी आदेश कम से कम दो सदस्य, जिसके तहत प्रधान मजिस्ट्रेट भी हैं का उपस्थित रहना जरूरी है। जिले में किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष वर्तमान में कुल 18 मामले हैं, जिनमें से 10 मामले छोटे अपराधों से संबंधित हैं, जिनका त्वरित निस्तारण किया जाना आवश्यक है।
शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी के अनुसार किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत बोर्ड के समक्ष बालक को पहली बार पेश करने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर सुनवाई पूरा किया जाना जरूरी है। यदि बोर्ड द्वारा छोटे अपराधों के मामले चार माह तक भी अनिर्णय की स्थिति रहती है तो कार्रवाई समाप्त समझी जाएगी। डीएम डॉ. अहमद इकबाल का कहना है कि किसी भी मामले में प्रधान मजिस्ट्रेट के द्वारा बिना सदस्य के कोई भी किसी भी प्रकार का अंतिम आदेश नहीं सुनाया जा सकता है। धारा 14 के अनुसार विधि विरुद्ध छोटे अपराध में विचाराधीन मामलों को अधिकतम छह माह की अवधि तक ही बोर्ड के समक्ष रखा जा सकता है। उनका कहना है कि कुल मामलों में से 10 मामले छोटे अपराधों से संबंधित हैं, जिनका निस्तारण करना जरूरी है।
शासन स्तर पर किशोर न्याय बोर्ड में नामित नहीं हो सके सदस्य
बोर्ड में प्रधान मजिस्ट्रेट सहित एक सदस्य होना जरूरी
लंबित 18 मामलों में से 10 मामलों में बोर्ड को सुनवाई करनी है
सदस्य नहीं होने के चलते प्रधान मजिस्ट्रेट नहीं दे सकते कोई निर्णय
शासन को तीन बार भेजा जा चुका है अनुस्मारक पत्र
चंपावत। डीएम डॉ. अहमद इकबाल का कहना है कि किशोर न्याय बोर्ड के लिए सदस्यों को नामित करने के संबंध में शासन को तीन बार स्मारक पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर, आठ दिसंबर 2017, इस माह छह जनवरी को महिला कल्याण की मुख्य परिवीक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर किशोर न्याय बोर्ड के लिए चंपावत जिले से प्राप्त आवेदन पत्रों में से सदस्य नामित करने का अनुरोध किया गया है।
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शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी के अनुसार किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत बोर्ड के समक्ष बालक को पहली बार पेश करने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर सुनवाई पूरा किया जाना जरूरी है। यदि बोर्ड द्वारा छोटे अपराधों के मामले चार माह तक भी अनिर्णय की स्थिति रहती है तो कार्रवाई समाप्त समझी जाएगी। डीएम डॉ. अहमद इकबाल का कहना है कि किसी भी मामले में प्रधान मजिस्ट्रेट के द्वारा बिना सदस्य के कोई भी किसी भी प्रकार का अंतिम आदेश नहीं सुनाया जा सकता है। धारा 14 के अनुसार विधि विरुद्ध छोटे अपराध में विचाराधीन मामलों को अधिकतम छह माह की अवधि तक ही बोर्ड के समक्ष रखा जा सकता है। उनका कहना है कि कुल मामलों में से 10 मामले छोटे अपराधों से संबंधित हैं, जिनका निस्तारण करना जरूरी है।
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शासन स्तर पर किशोर न्याय बोर्ड में नामित नहीं हो सके सदस्य
बोर्ड में प्रधान मजिस्ट्रेट सहित एक सदस्य होना जरूरी
लंबित 18 मामलों में से 10 मामलों में बोर्ड को सुनवाई करनी है
सदस्य नहीं होने के चलते प्रधान मजिस्ट्रेट नहीं दे सकते कोई निर्णय
शासन को तीन बार भेजा जा चुका है अनुस्मारक पत्र
चंपावत। डीएम डॉ. अहमद इकबाल का कहना है कि किशोर न्याय बोर्ड के लिए सदस्यों को नामित करने के संबंध में शासन को तीन बार स्मारक पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर, आठ दिसंबर 2017, इस माह छह जनवरी को महिला कल्याण की मुख्य परिवीक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर किशोर न्याय बोर्ड के लिए चंपावत जिले से प्राप्त आवेदन पत्रों में से सदस्य नामित करने का अनुरोध किया गया है।
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