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निश्चेतक के बगैर बेहोश कर दिया, महिला की मौत
Updated Sun, 03 Jun 2018 11:09 PM IST
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चंपावत।
जिला मुख्यालय में निजी अस्पताल की लापरवाही से पाटी ब्लॉक की एक महिला की जान चली गई। महिला पति के साथ मामूली बीमारी का इलाज कराने अस्पताल पहुंची थी। यहां उसे बिना निश्चेतक के बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया गया। जब काफी देर तक उसे होश नहीं आया तो अस्पताल प्रशासन ने पल्ला झाड़कर महिला को हायर सेंटर रेफर कर दिया। रेफर करने के पांच घंटे बाद खटीमा के एक निजी अस्पताल में महिला की मौत हो गई। घटना 28 मई की है।
पाटी में मनरेगा योजना के ब्लॉक समन्वयक सुनील कुमार गुप्ता (मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला निवासी) 28 मई को पत्नी शिवानी (31) को बच्चेदानी में परेशानी होने पर चंपावत के एक निजी अस्पताल में लाए। सुनील कुमार गुप्ता के मित्र एवं चंपावत विकासखंड में कार्यरत रमेश पाटनी ने बताया कि अस्पताल कर्मचारियों ने शिवानी को एक घंटे में डिस्चार्ज करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवानी को बिना निश्चेतक के बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया गया। इंजेक्शन लगाने के तीन घंटे बाद भी जब शिवानी को होश नहीं आया तो अस्पताल कर्मियों और डॉक्टरों के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने महिला को रेफर कर दिया। साथ में अस्पताल से खटीमा तक एंबुलेंस और अपना स्टाफ भेजा, लेकिन खटीमा में निजी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी शिवानी को होश नहीं आया और उसी रात उसकी मौत हो गई। पीड़ित पक्ष की तरफ से मामले में कोई शिकायत भी नहीं की गई।
निजी अस्पतालों में नहीं हैं निश्चेतक
चंपावत के जिस प्राइवेट अस्पताल में शिवानी को भर्ती कराया गया था वहां निश्चेतक है ही नहीं। कभी-कभार बाहर से निश्चेतक बुलवाकर बेहोशी का इंजेक्शन दिया जाता है। जबकि, ज्यादातर मौकों पर अस्पताल के ही डॉक्टर बेहोशी का इंजेक्शन दे देते हैं। मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में कुछ समय पूर्व शिकायत मिलने पर एसडीएम सीमा विश्वकर्मा ने छापा भी मारा था। तब भी निश्चेतक के बगैर मरीज को ऑपरेशन थिएटर पर लिटाने का मामला सामने आया था।
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वापस आने के बाद कार्रवाई पर विचार
पत्नी की अचानक मौत से पति सुनील कुमार गुप्ता बदहवास हैं। पत्नी के शव को लेकर वह प्रतापगढ़ चले गए। परिजनों का कहना है कि सुनील के चंपावत लौटने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
कोट
सामान्य रूप से एनेस्थिसिया देने के लिए निश्चेतक या विशेष रूप से प्रशिक्षित चिकित्सक का होना जरूरी है। चंपावत जिले में एकमात्र टनकपुर के संयुक्त अस्पताल में निश्चेतक है, जबकि किसी भी प्राइवेट अस्पताल में निश्चेतक नहीं है। निश्चेतक की मौजूदगी में ही एनेस्थिसिया दिया जाना चाहिए। अगर शिकायत मिली, तो मामले की जांच कराई जाएगी। -डॉ.एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
जिला मुख्यालय में निजी अस्पताल की लापरवाही से पाटी ब्लॉक की एक महिला की जान चली गई। महिला पति के साथ मामूली बीमारी का इलाज कराने अस्पताल पहुंची थी। यहां उसे बिना निश्चेतक के बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया गया। जब काफी देर तक उसे होश नहीं आया तो अस्पताल प्रशासन ने पल्ला झाड़कर महिला को हायर सेंटर रेफर कर दिया। रेफर करने के पांच घंटे बाद खटीमा के एक निजी अस्पताल में महिला की मौत हो गई। घटना 28 मई की है।
पाटी में मनरेगा योजना के ब्लॉक समन्वयक सुनील कुमार गुप्ता (मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला निवासी) 28 मई को पत्नी शिवानी (31) को बच्चेदानी में परेशानी होने पर चंपावत के एक निजी अस्पताल में लाए। सुनील कुमार गुप्ता के मित्र एवं चंपावत विकासखंड में कार्यरत रमेश पाटनी ने बताया कि अस्पताल कर्मचारियों ने शिवानी को एक घंटे में डिस्चार्ज करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवानी को बिना निश्चेतक के बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया गया। इंजेक्शन लगाने के तीन घंटे बाद भी जब शिवानी को होश नहीं आया तो अस्पताल कर्मियों और डॉक्टरों के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने महिला को रेफर कर दिया। साथ में अस्पताल से खटीमा तक एंबुलेंस और अपना स्टाफ भेजा, लेकिन खटीमा में निजी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी शिवानी को होश नहीं आया और उसी रात उसकी मौत हो गई। पीड़ित पक्ष की तरफ से मामले में कोई शिकायत भी नहीं की गई।
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निजी अस्पतालों में नहीं हैं निश्चेतक
चंपावत के जिस प्राइवेट अस्पताल में शिवानी को भर्ती कराया गया था वहां निश्चेतक है ही नहीं। कभी-कभार बाहर से निश्चेतक बुलवाकर बेहोशी का इंजेक्शन दिया जाता है। जबकि, ज्यादातर मौकों पर अस्पताल के ही डॉक्टर बेहोशी का इंजेक्शन दे देते हैं। मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में कुछ समय पूर्व शिकायत मिलने पर एसडीएम सीमा विश्वकर्मा ने छापा भी मारा था। तब भी निश्चेतक के बगैर मरीज को ऑपरेशन थिएटर पर लिटाने का मामला सामने आया था।
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वापस आने के बाद कार्रवाई पर विचार
पत्नी की अचानक मौत से पति सुनील कुमार गुप्ता बदहवास हैं। पत्नी के शव को लेकर वह प्रतापगढ़ चले गए। परिजनों का कहना है कि सुनील के चंपावत लौटने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
कोट
सामान्य रूप से एनेस्थिसिया देने के लिए निश्चेतक या विशेष रूप से प्रशिक्षित चिकित्सक का होना जरूरी है। चंपावत जिले में एकमात्र टनकपुर के संयुक्त अस्पताल में निश्चेतक है, जबकि किसी भी प्राइवेट अस्पताल में निश्चेतक नहीं है। निश्चेतक की मौजूदगी में ही एनेस्थिसिया दिया जाना चाहिए। अगर शिकायत मिली, तो मामले की जांच कराई जाएगी। -डॉ.एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।