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खनन में माफियाओं का बड़ा खेल
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टनकपुर (चंपावत)। खनन की आड़ में अवैध खनन नई बात नहीं है, लेकिन कहीं की रॉयल्टी पर कहीं और का अवैध खनिज खपाने वाले माफिया के नए खेल के खुलासे से खनन कारोबारियों में हड़कंप मचा है। रॉयल्टी के अवैध उपयोग से चोरी का खनिज खपा कर माफिया करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहे हैं।
अब मामला उजागर हुआ तो सरकार और सरकारी तंत्र में भी खलबली मची है। माफिया का यह खेल पूरे राज्य में यह धंधा फैला है। ऊधमसिंह नगर जिले के बाद अब टनकपुर के चर्चित उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर की रॉयल्टी में भी इस खेल का भंडाफोड़ हुआ है। जहां ठेकेदार ने खनन किए बगैर ही लाखों रुपये की रॉयल्टी बेचकर ठिकाने लगा दी है।
रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत प्रशासन ने गत फरवरी में उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर राजस्व क्षेत्र में खनन का ठेका तरुण पंत के नाम आवंटित किया था, लेकिन ग्रामीणों के कड़े विरोध से प्रशासन की कोशिश के बावजूद वहां खनन नहीं हो पाया। धरातल पर खनन हुआ ही नहीं और ठेकेदार ने रॉयल्टी पोर्टल पर खनिज निकासी दर्शाकर करीब 27.37 लाख रुपये की रॉयल्टी बेचकर ठिकाने लगा दी है।
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सूत्रों की मानें तो खनन बगैर रॉयल्टी ऐसे माफिया को बेची गई है, जिनके पास चोरी के अवैध खनिज का भंडार तो था लेकिन रॉयल्टी नहीं थी। माफिया ने 28 हेक्टेयर की रॉयल्टी खरीदकर अवैध खनिज को वैध बनाया है।
खनन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि खनन किए बगैर रॉयल्टी बेचने का धंधा नया नहीं है। माफिया पिछले कुछ सालों से राज्य में कहीं की रॉयल्टी पर कहीं और का अवैध खनिज खपाकर वारे-न्यारे कर रहे हैं। दो साल पूर्व भी देहरादून और ऊधम सिंह नगर में हरियाणा तक की रॉयल्टी पर चोरी के अवैध खनिज को ठिकाने लगाया गया था।
चल्थी, चूका के कई खनन पट्टों में भी चल रहा यही खेल
खनन बगैर रॉयल्टी बेचने का मामला उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर में भले ही उजागर हुआ हो, लेकिन खनन में यह खेल चल्थी और चूका क्षेत्र में भी चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक चल्थी, चूका में भी रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत आवंटित कई ऐसे पट्टे हैं, जहां धरातल पर खनन नहीं हुआ, लेकिन बगैर खनन किए ही लाखों की रॉयल्टी बेच दी गई है।
उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर में बिना खनन रॉयल्टी बेचने का मामला संज्ञान में आया है। इसके लिए जिला खान अधिकारी को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उचौलीगोठ की रॉयल्टी पर चल्थी और चूका से खनिज निकाला गया है या नहीं यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा। जांच में दोषी पाए जाने पर ठेकेदार पर जुर्माना लगाने या फिर खनन पट्टा निरस्त करने की जो भी कार्रवाई होगी वह खनन विभाग करेगा।
-हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम, टनकपुर।
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अब मामला उजागर हुआ तो सरकार और सरकारी तंत्र में भी खलबली मची है। माफिया का यह खेल पूरे राज्य में यह धंधा फैला है। ऊधमसिंह नगर जिले के बाद अब टनकपुर के चर्चित उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर की रॉयल्टी में भी इस खेल का भंडाफोड़ हुआ है। जहां ठेकेदार ने खनन किए बगैर ही लाखों रुपये की रॉयल्टी बेचकर ठिकाने लगा दी है।
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रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत प्रशासन ने गत फरवरी में उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर राजस्व क्षेत्र में खनन का ठेका तरुण पंत के नाम आवंटित किया था, लेकिन ग्रामीणों के कड़े विरोध से प्रशासन की कोशिश के बावजूद वहां खनन नहीं हो पाया। धरातल पर खनन हुआ ही नहीं और ठेकेदार ने रॉयल्टी पोर्टल पर खनिज निकासी दर्शाकर करीब 27.37 लाख रुपये की रॉयल्टी बेचकर ठिकाने लगा दी है।
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सूत्रों की मानें तो खनन बगैर रॉयल्टी ऐसे माफिया को बेची गई है, जिनके पास चोरी के अवैध खनिज का भंडार तो था लेकिन रॉयल्टी नहीं थी। माफिया ने 28 हेक्टेयर की रॉयल्टी खरीदकर अवैध खनिज को वैध बनाया है।
खनन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि खनन किए बगैर रॉयल्टी बेचने का धंधा नया नहीं है। माफिया पिछले कुछ सालों से राज्य में कहीं की रॉयल्टी पर कहीं और का अवैध खनिज खपाकर वारे-न्यारे कर रहे हैं। दो साल पूर्व भी देहरादून और ऊधम सिंह नगर में हरियाणा तक की रॉयल्टी पर चोरी के अवैध खनिज को ठिकाने लगाया गया था।
चल्थी, चूका के कई खनन पट्टों में भी चल रहा यही खेल
खनन बगैर रॉयल्टी बेचने का मामला उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर में भले ही उजागर हुआ हो, लेकिन खनन में यह खेल चल्थी और चूका क्षेत्र में भी चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक चल्थी, चूका में भी रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत आवंटित कई ऐसे पट्टे हैं, जहां धरातल पर खनन नहीं हुआ, लेकिन बगैर खनन किए ही लाखों की रॉयल्टी बेच दी गई है।
उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर में बिना खनन रॉयल्टी बेचने का मामला संज्ञान में आया है। इसके लिए जिला खान अधिकारी को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उचौलीगोठ की रॉयल्टी पर चल्थी और चूका से खनिज निकाला गया है या नहीं यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा। जांच में दोषी पाए जाने पर ठेकेदार पर जुर्माना लगाने या फिर खनन पट्टा निरस्त करने की जो भी कार्रवाई होगी वह खनन विभाग करेगा।
-हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम, टनकपुर।