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Champawat News: मकानों की दरारों ने चमनपुर के 50 परिवारों को घर छोड़ने पर कर किया मजबूर

Tue, 23 Jul 2024 12:09 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Tue, 23 Jul 2024 12:09 AM IST
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Cracks in houses forced 50 families of Chamanpur to leave their homes.
चंपावत जिले के चमनपुर गांव । संवाद
चंपावत। बाराकोट ब्लॉक के बैंडा बैडवाल ग्राम सभा के चमनपुर तोक से 50 परिवार पलायन कर चुके हैं। वर्ष 2007 और 2013 में आई आपदा में गांव के मकानों में दरारें पड़नी शुरू हो गई थीं। समाधान नहीं होने पर परिवार एक-एक कर गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो गए। डर के साये में उनके लिए जीना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने घर छोड़ना ठीक समझा।
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एक दशक पूर्व में चमनपुर में 65 परिवार परिवार निवास करते थे लेकिन आज मात्र 15 परिवार ही मजबूरी में जीवन जी रहे हैं। वर्ष 2013 में क्षेत्र में आपदा आई। आपदा के बाद प्रशासन ने क्षेत्र के लोगों को विस्थापित करने के आदेश जारी किए थे। 2019-20 में फिर से आपदा के कारण काफी नुकसान हो गया। मकानों में दरारें पड़ना शुरू हो गईं। विस्थापन की कार्यवाही तो नहीं हुई लेकिन मकानों की दरारें बढ़ती गईं। गांव के सभी खतरे वाले भवनों को चिह्रित किया गया। दो बार भू-वैज्ञानिकों की टीम ने क्षेत्र का भ्रमण भी किया। दरारों वाले मकानों में डर के जीने से बेहतर 50 परिवारों ने गांव छोड़ दिया। अब गांव में मात्र 15 परिवार निवास करते हैं लेकिन वे भी डर में जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। गांव तक करीब डेढ़ किमी सड़क भी खराब है। लोगों के लिए गांव से सड़क तक आना आसान नहीं होता है।
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ज्यादा बारिश होने पर जानमाल का खतरा है। सड़क खराब होने से मरीजों और गर्भवतियों को पीठ पर लादकर सड़क तक पहुंचाना लोगों की मजबूरी है। वर्ष 2022 में जिला पंचायत की ओर से 1.40 किमी सड़क बनाई गई थी।
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मीनाक्षी जोशी, प्रधान, बैंडा बडवाल।
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चमनपुर तोक पर दो बार आपदा की मार पड़ चुकी है। दो बार भू वैज्ञानिक सर्वे भी कर गए लेकिन आगे कोई कार्यवाही नहीं हुई। बचे परिवार किसी तरह दरारों वाले मकान में जीवन जी रहे हैं।
नवीन जोशी, स्थानीय।
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ग्रामीणों ने की थी झिरकुनी में बसाने की मांग
चंपावत। भू-वैज्ञानिकों ने क्षेत्र के भ्रमण के समय लोगों ने उन्हें झिरकुनी में विस्थापित करने की मांग की थी लेकिन अभी तक हालात जस के तस हैं। गांव में पानी की पेयजल लाइनें भी क्षतिग्रस्त हैं। ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को जुगाड़ कर जोड़ दिया। तब उन्हें पानी मिल रहा है। लगातार आपदा के कारण ग्रामीण भी डर में हैं।

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सात ग्रामीण सड़कें अभी भी बंद

चंपावत। जिले में बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश से अभी भी सात ग्रामीण सड़कें बंद चल रही हैं। सड़कें बंद होने से करीब 10 हजार ही आबादी को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के लिए जिला मुख्यालय आना-जाना मुश्किल हो रहा है। बारिश से ललुवापानी-बनलेख-जैगांव-जैतोली, टकनागूठ-डाडा मल्ला, खटोली मल्ली-वैला, बिरगुल-गोली, मंच-कारी, रीठा-अमोड़ी, लडाबोरा-क्वारसिंह मोटर मार्ग बंद हैं। संवाद
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