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खाने पीने की समस्या से ज्यादा जान की सलामती की चिंता

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 11:47 PM IST
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Concerns about the safety of life more than the problem of eating and drinking
यूक्रेन में युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ रेलवे पुल। फोटो सौजन्य : दिव्यांशु - फोटो : TANAKPUR
बनबसा (विनोद काला)। ‘यूक्रेन में जिस तरह के हालात हैं उसमें खाने-पीने की समस्या से ज्यादा जान सलामती की चिंता थी। मैं और मेरे 25 साथी किसी तरह तमाम मुसीबतों को पार कर रोमानिया पहुंचे, जहां अफ्रीकी देशों के कुछ युवाओं ने मेरी महिला साथियों के साथ अभद्रता की और विरोध करने पर मारपीट में उतारू हो गए। हालांकि अब हम रोमानिया पहुंच कर किसी जंग जीतने जैसा एहसास है।’ यह कहना है यूक्रेन में एमबीबीएस की शिक्षा ले रही बनबसा की सोनाली का।
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फोन पर हुई बातचीत में सोनाली ने बताया कि रोमानिया तक पहुंचने में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वह और उनके साथी किसी भी तरह सकुशल अपने देश पहुंचना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने हर परेशानी का सामना किया और खुद के खर्चे पर रोमानिया तक पहुंचे। रोमानिया की सरकार और वहां के लोगों ने उनका बेहद ध्यान रखा है। नागरिकों ने उनके लिए खाने-पीने और रहने के साथ ही बात करने के लिए सिम भी उपलब्ध कराई है।
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सोनाली ने बताया कि बृहस्पतिवार तक उनकी वतन वापसी की उम्मीद है। उनके पास तीन मार्च तक का ही वीजा है। रोमानिया सरकार और भारतीय दूतावास की ओर से उन्हें जल्द ही उनकी भारत वापसी होने की जानकारी दी गई है। सोनाली के रोमानिया पहुंचने के बाद से उनके पिता किशोरी लाल गुप्ता ने भी राहत की सांस ली है।
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सायरन बजते ही बंकरों में भागना पड़ा: दिव्यांशु
बनबसा (चंपावत)। बनबसा के भजनपुर गांव निवासी दिव्यांशु विश्वकर्मा यूक्रेन के शहर सोमी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। इस समय वह सोमी में ही फंसे हैं। उन्होंने कुछ साथियों के साथ एक फ्लैट लिया है। सायरन बजते ही उन्हें पहले से तैयार बेग लेकर बंकरों में दौड़ लगानी पड़ती है।
दिव्यांशु ने बताया कि कीव उनके शहर सोमी से 288 और खारकीव 180 किमी दूर है लेकिन कई बार गोलियों की आवाज डरा देती है। शहर में भी कई बार स्ट्रीट फाइट होने लगती है। ऐसे में उन्हें बेसमेंट में जाने के लिए विवश होना पड़ता है। खाने-पीने की दिक्कतें हैं। कुछ सामान स्टॉक किया है। बताया कि चावल, मैगी के सहारे दिन गुजार रहे हैं। तेल नहीं मिलने से टैक्सी और बसें नहीं चल रही हैं। ट्रेन के रूट भी ध्वस्त हो गए हैं। उनके शहर से रोमानिया, पोलैंड आदि के बार्डर 1200 से 1300 किमी. दूर है।
दिव्यांशु का कहना है कि रूस की सीमा से उन्हें स्वदेश भेजा जा सकता है। इसके लिए सरकार को रूस से वार्ता करनी होगी। बात करने पर भारतीय एंबेसी ने हाथ खड़े कर दिए हैं। एंबेसी ने उनसे स्थिति ठीक होने तक वहीं रहने के लिए कहा है। दिव्यांशु के पिता संजीव कुमार ने बताया कि वह अपने बेटे के लिए परेशान हैं। बताया कि मुख्यमंत्री आवास से उन्हें दूरभाष पर उनके बेटे की वापसी को प्रयास किए जाने संबंध में सूचना दी गई है। संवाद
लोहाघाट के तीन छात्र स्वदेश पहुंचे
लोहाघाट (चंपावत)। रोमानिया में फंसे लोहाघाट क्षेत्र की दो छात्राएं और एक छात्र सकुशल भारत पहुंच गए हैं। मूलरूप से बाराकोट झिरकुनी निवासी आदित्य शर्मा मंगलवार रात दिल्ली पहुंचे। आदित्य दिल्ली एयरपोर्ट से अपने ताऊ शेखरानंद जोशी और ताई मीना जोशी के घर पहुंचे। छात्रा ओसीन अधिकारी और स्नेहा पांडेय भी बुधवार को दिल्ली पहुंच गई हैं। ओसीन की माता कुसुम अधिकारी और स्नेहा की मां चंद्रा पांडेय बेटियों को लेने एयरपोर्ट पहुंची थीं। स्नेहा ने बताया कि करीब आठ किमी पैदल चलने के बाद वह और ओसनी रोमानिया की सीमा तक पहुंचीं। बॉर्डर पार करने के लिए उन्हें धक्कामुक्की का भी सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ समय के लिए ओसीन का पासपोर्ट आदि प्रपत्र भी गुम हो गए, जो बाद में मिल गए। स्नेहा बताती हैं कि रोमानिया पहुंचने पर वहां की सरकार और एनजीओ ने उन्हें भरपूर सहयोग दिया। तहसीलदार विजय गोस्वामी, पटवारी सुनील माहरा, राकेश पंगरिया ने छात्रों के घरों में जाकर सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

अपर मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की वार्ता
चंपावत। उत्तराखंड के छात्रों को सकुशल निकलने के लिए अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों से वार्ता की। अपर मुख्य सचिव ने सभी डीएम को निर्देश दिए कि कौन सा छात्र किस स्थान पर फंसा हैं और किस स्थिति में है, यह जानकारी लगातार कॉल या मेसेज के माध्यम से लेते रहें। साथ ही उनके परिजनों से संपर्क बनाए रखें और शासन को भी इसकी सूचना उपलब्ध कराएं। डीएम विनीत तोमर ने बताया कि चंपावत के कुल छह छात्रों में से तीन सकुशल पहुंच चुके हैं और तीन छात्रों से प्रशासन लगातार संपर्क बनाए हुए है। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत भी मौजूद रहे।
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