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आईटीआई में ताले लटकने के बाद स्टाफ शिफ्ट करने से भड़के ग्रामीण
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बाराकोट आईटीआई बंद होने की भनक लगने पर नारेबाजी करते क्षेत्रीय लोग।
- फोटो : LOHAGHAT
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बाराकोट आईटीआई को सितंबर से बंद कर दिया गया था। अब यहां का स्टाफ और फर्नीचर अन्यत्र शिफ्ट करने की भनक लगने पर इलाके के नागरिक और युवा भड़क गए। लोगों ने नारेबाजी कर आईटीआई को अन्यत्र शिफ्ट करने का विरोध किया। जल्द आईटीआई का संचालन शुरू नहीं किए जाने पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
शुक्रवार को बाराकोट में ज्येष्ठ उप प्रमुख नंदाबल्लभ बगौली के नेतृत्व में युवाओं ने आईटीआई शिफ्ट करने के विरोध में नारेबाजी की। स्टेट काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) से मान्यता प्राप्त श्रेणी का आईटीआई बाराकोट में 2012 में संचालित हुआ। लोगों का कहना था कि विद्युतकार व कोपा व्यवसाय ट्रेडों में युवाओं को प्रवेश दिया गया।
कई युवाओं को रोजगार भी मिला लेकिन अब सितंबर से नए प्रवेश न कर इसे बंद कर दिया है और अन्यत्र शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। कहा कि आइटीआई बंद कर युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी हाल में खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। वहां सुनील, सूरज, अशोक जोशी, योगी, नारायण दत्त, मदन सिंह, प्रकाश सिंह बिष्ट, राम सिंह, दिवान, रजत, योगेश वर्मा आदि थे।
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आईटीआई को संचालित करने का नोटिफिकेश नहीं है। अगर इस तरह का आदेश मिलेगा तो बंद आईटीआई को फिर से संचालित कर दिया जाएगा। तब तक इसे बंद कर दिया गया है। यहां के अनुदेशक और अन्य स्टाफ को दूसरे आईटीआई में समायोजन किया जा रहा है।
आरएस मर्तोलिया, निदेशक, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, टनकपुर
बाराकोट सहित पांच आईटीआई पर लटकी है तलवार
चंपावत। उत्तराखंड बनने के बाद नए संचालित पांच आईटीआई बंद हैं। अब इनके भविष्य को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बाराकोट, दिगालीचौड़, मंच, भिंगराड़ा और बनबसा आईटीआई एससीवीटी से मान्यता प्राप्त हैं। दो माह से पांचों आईटीआई में ताले लटके हैं। वर्तमान शिक्षण सत्र से इन आईटीआई में प्रवेश नहीं करने के आदेश जारी होने से सभी केंद्र अब बंद हो गए हैं।
केंद्रों के अनुदेशकों और स्टाफ को दूसरी जगह समायोजित किया जा रहा है। आईटीआई बंद होने से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को ज्यादा समस्या होगी। वहीं नेशनल काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से मान्यता प्राप्त चंपावत जिले के तीन पुराने आईटीआई टनकपुर, चंपावत और खेतीखान पहले की तरह ही संचालित हैं।
आईटीआई बंद करने से विकास एवं रोजगार होगा समाप्त: माहरा
लोहाघाट (चंपावत)। पूर्व काबीना मंत्री महेंद्र सिंह माहरा ने राज्य सरकार की ओर से आईटीआई बंद किए जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आईटीआई बंद करने विकास और रोजगार समाप्त होगा। उनका कहना है कि जिले के दूरदराज क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार एवं क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से दिगालीचौड़, बाराकोट, भिंगराड़ा, मंच, तामली आदि स्थानों में आईटीआई खोले गए थे जिनमें भवन निर्माण के बाद यहां और व्यवहारिक ट्रैडों को खोलने का प्रस्ताव दिया गया था।
दिगालीचौड़ आईटीआई के लिए 4.88 करोड़ का आगणन स्वीकृत कर 1.93 करोड़ रुपया अवमुक्त भी कर दिया गया था। भिंगराड़ा एवं बाराकोट में भी भवनों का निर्माण किया जाना था लेकिन राज्य सरकार इन संस्थानों को विकसित करने के बजाय उन्हें बंद करने का प्रयास कर रही है। ब्यूरो
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शुक्रवार को बाराकोट में ज्येष्ठ उप प्रमुख नंदाबल्लभ बगौली के नेतृत्व में युवाओं ने आईटीआई शिफ्ट करने के विरोध में नारेबाजी की। स्टेट काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) से मान्यता प्राप्त श्रेणी का आईटीआई बाराकोट में 2012 में संचालित हुआ। लोगों का कहना था कि विद्युतकार व कोपा व्यवसाय ट्रेडों में युवाओं को प्रवेश दिया गया।
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कई युवाओं को रोजगार भी मिला लेकिन अब सितंबर से नए प्रवेश न कर इसे बंद कर दिया है और अन्यत्र शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। कहा कि आइटीआई बंद कर युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी हाल में खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। वहां सुनील, सूरज, अशोक जोशी, योगी, नारायण दत्त, मदन सिंह, प्रकाश सिंह बिष्ट, राम सिंह, दिवान, रजत, योगेश वर्मा आदि थे।
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आईटीआई को संचालित करने का नोटिफिकेश नहीं है। अगर इस तरह का आदेश मिलेगा तो बंद आईटीआई को फिर से संचालित कर दिया जाएगा। तब तक इसे बंद कर दिया गया है। यहां के अनुदेशक और अन्य स्टाफ को दूसरे आईटीआई में समायोजन किया जा रहा है।
आरएस मर्तोलिया, निदेशक, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, टनकपुर
बाराकोट सहित पांच आईटीआई पर लटकी है तलवार
चंपावत। उत्तराखंड बनने के बाद नए संचालित पांच आईटीआई बंद हैं। अब इनके भविष्य को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बाराकोट, दिगालीचौड़, मंच, भिंगराड़ा और बनबसा आईटीआई एससीवीटी से मान्यता प्राप्त हैं। दो माह से पांचों आईटीआई में ताले लटके हैं। वर्तमान शिक्षण सत्र से इन आईटीआई में प्रवेश नहीं करने के आदेश जारी होने से सभी केंद्र अब बंद हो गए हैं।
केंद्रों के अनुदेशकों और स्टाफ को दूसरी जगह समायोजित किया जा रहा है। आईटीआई बंद होने से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को ज्यादा समस्या होगी। वहीं नेशनल काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से मान्यता प्राप्त चंपावत जिले के तीन पुराने आईटीआई टनकपुर, चंपावत और खेतीखान पहले की तरह ही संचालित हैं।
आईटीआई बंद करने से विकास एवं रोजगार होगा समाप्त: माहरा
लोहाघाट (चंपावत)। पूर्व काबीना मंत्री महेंद्र सिंह माहरा ने राज्य सरकार की ओर से आईटीआई बंद किए जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आईटीआई बंद करने विकास और रोजगार समाप्त होगा। उनका कहना है कि जिले के दूरदराज क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार एवं क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से दिगालीचौड़, बाराकोट, भिंगराड़ा, मंच, तामली आदि स्थानों में आईटीआई खोले गए थे जिनमें भवन निर्माण के बाद यहां और व्यवहारिक ट्रैडों को खोलने का प्रस्ताव दिया गया था।
दिगालीचौड़ आईटीआई के लिए 4.88 करोड़ का आगणन स्वीकृत कर 1.93 करोड़ रुपया अवमुक्त भी कर दिया गया था। भिंगराड़ा एवं बाराकोट में भी भवनों का निर्माण किया जाना था लेकिन राज्य सरकार इन संस्थानों को विकसित करने के बजाय उन्हें बंद करने का प्रयास कर रही है। ब्यूरो