{"_id":"5defce6b8ebc3e87b402dd51","slug":"civic-aminities-champawat-news-hld3650332131","type":"story","status":"publish","title_hn":"नसबंदी के बाद रीठा साहिब में महिलाओं को बैड तक नसीब नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नसबंदी के बाद रीठा साहिब में महिलाओं को बैड तक नसीब नहीं
विज्ञापन
नसबंदी के बाद रीठा साहिब अस्पताल परिसर में जमीन पर आराम करतीं महिलाएं।
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आबादी को काबू करने के लिए महिलाओं को नसबंदी के लिए प्रेरित किया जाता है लेकिन नसबंदी कराने आईं महिलाओं के लिए लधिया घाटी के सबसे बड़े रीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जरूरी सुविधाओं का अकाल है। यहां 30 महिलाओं की नसबंदी हुई लेकिन नसबंदी के बाद उन्हें एक अदद बेड तक नसीब नहीं हो सका। बेड के बजाय महिलाओं को फर्श पर दरी पर लिटाया गया।
मंगलवार को अस्पताल में आयोजित नसबंदी शिविर में सर्जन डा. प्रभा जोशी व डा. वीके जोशी ने 30 महिलाओं की नसबंदी की। फार्मेसिस्ट जगदीप राणा, गंगोत्री धामी, सुमित्रा रानी आदि ने सहयोग किया। नसबंदी ऑपरेशन तो हुए लेकिन नसबंदी कराने वाली महिलाओं को इसके बाद आराम करने के लिए न बेड मिला और न ही बिस्तर।
पूर्व प्रधान भुवन राम, पान सिंह, बलवंत सिंह, कुंदन सिंह, मेाहन सिंह, खीम नाथ आदि ने कहा कि ऑपरेशन के लिए लधौली, गुरौली, साल, टांण, परेवा आदि जगहों से आईं महिलाओं को अस्पताल परिसर में फर्श पर दरी के सहारे आराम कराया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नसबंदी के लिए महिलाओं को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहन स्वरूप कई कदम उठाए जाते हैं। उन्हें प्रोत्साहन के रूप में 1400 रुपये दिए जाते हैं। रीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र चार ही बेड मंजूर हैं लेकिन अस्पताल में महज दो बेड हैं। एक बेड डिलीवरी कक्ष में तो दूसरा इंजेक्शन वार्ड में है।
विज्ञापन
नसबंदी शिविर में महिलाओं को सभी अनुमन्य सुविधाएं मुहैय्या कराई जाती हैं। रीठा साहिब शिविर में नसबंदी के बाद महिलाओं को बाहर फर्श पर लिटाने की जानकारी नहीं है। कई बार ठंड से बचने के लिए धूप की वजह से महिलाएं ऐसा करती है। डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ।
विज्ञापन
मंगलवार को अस्पताल में आयोजित नसबंदी शिविर में सर्जन डा. प्रभा जोशी व डा. वीके जोशी ने 30 महिलाओं की नसबंदी की। फार्मेसिस्ट जगदीप राणा, गंगोत्री धामी, सुमित्रा रानी आदि ने सहयोग किया। नसबंदी ऑपरेशन तो हुए लेकिन नसबंदी कराने वाली महिलाओं को इसके बाद आराम करने के लिए न बेड मिला और न ही बिस्तर।
विज्ञापन
पूर्व प्रधान भुवन राम, पान सिंह, बलवंत सिंह, कुंदन सिंह, मेाहन सिंह, खीम नाथ आदि ने कहा कि ऑपरेशन के लिए लधौली, गुरौली, साल, टांण, परेवा आदि जगहों से आईं महिलाओं को अस्पताल परिसर में फर्श पर दरी के सहारे आराम कराया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नसबंदी के लिए महिलाओं को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहन स्वरूप कई कदम उठाए जाते हैं। उन्हें प्रोत्साहन के रूप में 1400 रुपये दिए जाते हैं। रीठा साहिब के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र चार ही बेड मंजूर हैं लेकिन अस्पताल में महज दो बेड हैं। एक बेड डिलीवरी कक्ष में तो दूसरा इंजेक्शन वार्ड में है।
विज्ञापन
नसबंदी शिविर में महिलाओं को सभी अनुमन्य सुविधाएं मुहैय्या कराई जाती हैं। रीठा साहिब शिविर में नसबंदी के बाद महिलाओं को बाहर फर्श पर लिटाने की जानकारी नहीं है। कई बार ठंड से बचने के लिए धूप की वजह से महिलाएं ऐसा करती है। डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ।