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चंपावत में जल्द बनेगा हेलीपेड
ब्यूरो /अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 22 May 2015 11:19 PM IST
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सितंबर 1997 में बने चंपावत जिले में हेलीपेड का सपना अगले कुछ वर्षों में हकीकत में बदल जाएगा। चंपावत हेलीपेड के प्रस्ताव को अंतिम रूप से मंजूरी मिलने के बाद टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जल्द ही सर्किट हाउस के नजदीक सेलाखोला गांव में हेलीपेड का निर्माण शुरू हो जाएगा। हेलीपेड में दो चौपड़ और 1 एम-17 जहाज तीनों एक साथ उतर सकेंगे। इस हेलीपेड का उपयोग आपदा से लेकर वीआईपी मूवमेंट और अन्य गतिविधियों तक में होगा।
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सर्किट हाउस से करीब 400 मीटर दूर वाली 0.20 हेक्टेयर जमीन को भूगर्भीय परीक्षण के बाद हेलीपेड के लिए नागरिक उड्डयन निदेशालय ने उपयुक्त मानते हुए 2011 में हरी झंडी दी थी। जिलाधिकारी दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि उत्तराखंड इमरजेंसी एसिस्टेंस प्रोजेक्ट (यूईएपी) के तहत इस परियोजना को अंतिम रूप से स्वीकृति मिल चुकी है। टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब एक माह के भीतर काम शुरू हो जाएगा।
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प्रस्तावित हैं तीन अन्य हेलीपेड
चंपावत। जिले में तीन अन्य हेलीपेड प्रस्तावित किए गए हैं। जिलाधिकारी दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि लोहाघाट तहसील में डैसली, पाटी तहसील में देवीधुरा और श्रीपूर्णागिरि (टनकपुर) तहसील में बनबसा में हेलीपेड प्रस्तावित किए गए हैं। आपदा के अलावा ह्यूमन ट्रैफ्किंग, तस्करी, माओवाद के खतरों के मद्देनजर इन हेलीपेडों को प्रस्तावित किया गया है।
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फिलहाल गोरलचौड़ मैदान बनता है अस्थाई हेलीपेड
चंपावत। हेलीपेड नहीं होने से जिले में कई तरह की दिक्कतें हो रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने और आपदा के वक्त ये हेलीपेड मददगार होगा। साथ ही वीआईपी (विशिष्ट मेहमानों) के आने पर भी दुश्वारी होती है। जिले में किसी महत्वपूर्ण अतिथि के आने पर हेलीपेड को कामचलाऊ तौर पर खेल मैदान में बनाना पड़ता है। बीते पांच वर्षों में जिले में आए 17 वीआईपी के लिए गोरलचौड़ सहित अन्य खेल मैदानों को अस्थाई हेलीपेड का रूप देना पड़ा है। इससे न केवल खेल गतिविधियों पर ब्रेक लग रहा है बल्कि मैदान भी बिगड़ता है।