फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Chaitola fair started

ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ शुरू हुआ चैतोला मेला

Sun, 14 Apr 2019 10:25 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट (चंपावत)। Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Sun, 14 Apr 2019 10:25 PM IST
विज्ञापन
Chaitola fair started
गुमदेश के लोगों का आस्था का प्रमुख केंद्र प्रसिद्घ चौखाम बाबा मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र का प्रसिद्ध तीन दिवसीय चैतोला मेला ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच शुरू हो गया  है।  

विज्ञापन


रविवार को चमदेवल के चौखाम बाबा मंदिर में मेला समिति के अध्यक्ष और पुरोहित पंडित शंकर दत्त पांडेय के पौरोहित्य में चमू देवता के धामी जगत सिंह ने मेले का विधिवत शुभारंभ किया। विशिष्ट अतिथि लाटा देवता के धामी जोगा सिंह, रुद्र देवता के धामी लक्ष्मण सिंह, भराड़ा के धामी तारा सिंह ने क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सोमवार को मेले का मुख्य आकर्षण मड़ गांव से निकलने वाली चमू देवता की शोभायात्रा होगी। 

मेले के पहले दिन चमू देवता की खाली जमान (डोले) को चमू देवता के मंदिर से मड़ गांव ले जाया गया। दोपहर बाद मड़, शिलिंग-जिंडी, चौपता, बसकुनी, न्योलटुकरा, जाख और सिरकोट से जत्थों के आने का क्रम शुरू हुआ। 15 अप्रैल को मेले का मुख्य आकर्षण चमू देवता की निकलने वाली डोला रथयात्रा होगी। इस दौरान मड़ गांव से डोले में चमूदेवता के डांगर अवतरित होकर श्रद्धालुओं के साथ चौखाम बाबा मंदिर आएंगे।
विज्ञापन


16 अप्रैल को व्यापारिक मेला होगा। मेले में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस, फायर बिग्रेड और प्रशासन मुस्तैद है। मेले को  लेकर क्षेत्रीय लोगों में खासा उत्साह बना हुआ है। हरीश कलौनी के संचालन में हुए कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के सचिव विनोद सिंह धौनी, खीम राज धौनी, युुगल किशोर, विकास सिंह, मनमोहन सिंह, प्रेम सिंह धौनी, गुमान सिंह धौनी, गंभीर सिंह, महा सिंह, कुंवर सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


चमू देव ने किया था अत्याचारी दैत्य का वध 
लोहाघाट (चंपावत)। नेपाल सीमा से लगे गुमदेश का चैतोला मेला इतिहास और आस्था का संगम है। 
मान्यता है कि उत्तराखंड प्रवास के दौरान पांडवों ने पंचेश्वर की त्रिवेणी में स्नान कर शिव मंदिर बनाने की इच्छा जताई मगर पांडवों ने चारों दिशाओं में कई बाण छोड़े पर कोई बाण नहीं रुका। तब कुंती ने आंचल में एक बाण रोक दिया और इस स्थान का नाम रुकमीचौड़ (चमदेवल) रख शिव शक्ति की स्थापना की। कत्यूर राजा के बाद शिव के अनन्य भक्त चमू ने राज किया। चमू सात भाई थे।

पंडित शंकरदत्त पांडेय बताते हैं कि आज भी चमदेवल, निडिल, पंचेश्वर, नेपाल के धामकुड़ी, संतोला में चमू देव के मंदिर में स्थापित हैं। इन्हीं चमू देव के समय महाबली दैत्य बकासुर का आतंक था जिसने रुकमीचौड़ पहुंच कहर ढाया। दैत्य के आतंक से रोजाना एक नर बलि होने लगी। इकलौते पौत्र की बारी आने पर कोकिला नामक वृद्धा ने चमू देव के सामने नत मस्तक होकर पौत्र की रक्षा की विनती की।

वृद्धा की पुकार पर चमू देव ने केदार के बलशाली पुत्रों लाटा, भराड़ा, रुद्र की मदद से दैत्य का वध कर दिया। इससे चमू के पराक्रम और न्याय की ख्याति चारों तरफ फैल गई । उन्हें  लोग चौखाम कहने लगे। तबसे चैत्रीय नवरात्र में यहां मेला लगता है। 

चमू देव को चढ़ता है पापड़ के प्रसाद का चढ़ावा 
लोहाघाट(चंपावत)। रामनवमी से शुरू होने वाले मेले को लेकर लोगों में गजब का उत्साह रहता है। यहां के सात गांवों में धौनी परिवारों की ओर से चावल का विशेष किस्म का पापड़ प्रसाद के रूप में चमू देवता को चढ़ाया जाता है। सीलिंग, चौपता, नेवल टुकरा, बसकुनी, सिरकोट, जाख-जिंडी गांवों में रहने वाले धौनी परिवारों की ओर से चमू देवता को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद की सामग्री प्रथम नवरात्र से एकत्र की जाती है। छठे, सातवें व आठवें नवरात्र के दौरान पड़ने वाले किसी शुभ दिन को शुद्धता के साथ पापड़ बनाए जाते हैं।

गोविंद धौनी, लक्ष्मण धामी, गुमान सिंह प्रथोली बताते हैं कि चमू देवता को पापड़ का प्रसाद चढ़ाने के बाद ही त्योहार में बने व्यंजन किसी को दिए जाते हैं। मेले के दौरान यहां कोई भी होटल नहीं खुलता है। लोग मेले में आने वाले परिचित-अपरिचित लोगों को अपने घरों में बुलाकर भोजन कराते हैं। यहां के बाहर रहने वाले लोग चैतोला मेले का बेसब्री से इंतजार करते हैं। देश के बाहर नौकरी-पेशा करने वालों के अलावा भारत के विभिन्न स्थानों में सेवारत प्रवासी यहां जरूर पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि मेले के दौरान चौखाम बाबा का आशीर्वाद लेकर वह वर्षभर सुकून से अपना काम कर पाते हैं। 


तय रहता है जत्थों और डोलों का परिक्रमा समय 
लोहाघाट। रामनवमी के अगले दिन मुख्य मेले को होने वाली मंदिर की परिक्रमा करने वाले जत्थों, डोलों के प्रवेश, परिक्रमा और विसर्जन का समय निर्धारित रहता है। सात अलग-अलग स्थानों से आने वाले जत्थों के लिए मंदिर की परिक्रमा और प्रवेश के लिए 20-20 मिनट का समय तय है। पहला जत्था 2.40 बजे से प्रवेश करेगा, जबकि सातवां जत्था 5.41 बजे मंदिर में आएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed