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भारत नेट योजना से ओएफसी बिछी मगर नहीं मिला नेटवर्क
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चंपावत। भारत नेट योजना से कुमाऊं के तीन पहाड़ी जिलों के चार ब्लॉकों को दो साल पहले ही जोड़ा जा चुका है। पर इसका लाभ इन गांवों को नहीं मिल सका है। नेपाल सीमा से लगे जिले के लोहाघाट ब्लॉक कुछ ग्राम पंचायतें तो जुड़ी हैं, लेकिन योजना से एक भी ग्रामीण ने कनेक्शन नहीं लिया है।
मोदी सरकार ने देश की सभी ग्राम पंचायतों को 2019 तक ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य रखा था, मगर चंपावत जिले में ही ढेरों ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां ब्रॉडबैंड तो दूर सामान्य नेटवर्क भी नहीं है। 2018 मेें भारत नेट योजना से चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक में पायलट प्रोजेक्ट शुरू पूरा हुआ था। इसके तहत ब्लॉक की सभी 67 ग्राम पंचायतों को इंटरनेट, मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ा जाना था। अगर ये योजना जमीन पर कारगर रहती तो पंचेश्वर सहित नेपाल सीमा से लगे दूसरे गांवों को भी लाभ मिलता। लेकिन हाल ये है कि जिले का इकलौता डिजिटल गांव बगौटी को भी इसका फायदा नहीं मिल सका है लेकिन ये लक्ष्य हासिल नहीं हो सका है। ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष भुवन भट्ट का कहना है कि कुछ ही ग्राम पंचायतों को कनेक्शन मिल सका है। मगर गांव के एक भी व्यक्ति ने इस नेटवर्क के जरिये कनेक्शन नहीं लिया है। कमोबेश ऐसे ही हाल अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले के तीन ब्लॉकों के भी है।
भारत नेट से जुड़े चार ब्लॉक :
चंपावत जिला : लोहाघाट ब्लॉक।
बागेश्वर जिला : बागेश्वर ब्लॉक।
अल्मोड़ा जिला : हवालबाग, ताकुला ब्लॉक।
ब्रॉडबैंड से होंगे ढेरों लाभ
डीपीआरओ सुरेश बैनी का कहना है कि पंचायतघरों के ब्रॉडबैंड से जोड़ने से ग्रामीणों को अनेकों लाभ होंगे। निर्माण, आवास योजनाओं के रिकार्ड के बेहतर रखरखाव से लेकर राशनकार्ड, परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र से लेकर विभिन्न कार्य गांव में ही हो जाएंगे। आधार कार्ड, बैंकिंग, तमाम ऑनलाइन काम पंचायतघरों से ही हो जाएंगे।
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अल्मोड़ा के दो और चंपावत, बागेश्वर के एक-एक ब्लॉक में भारत नेट योजना के तहत ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाई गई थी। बाद में इसकी जिम्मेदारी बीबीएनएल (भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड) को दे दी गई थी। वहीं ओएफसी के रखरखाव से लेकर कनेक्शन देने का काम सरकारी एजेंसी सीएससी ई-गवर्नमेंट इंडिया लिमिटेड को दिया गया है।
- एके गुप्ता, महाप्रबंधक, बीएसएनएल, अल्मोड़ा क्षेत्र।
लोहाघाट ब्लॉक को भारत नेट योजना में शामिल किया गया था। सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने के लिए कनेक्शन लेने और आगे की कार्यवाही के लिए डीपीआरओ के स्तर से कहा गया था। ब्रॉडबैंड से ज्यादातर ग्राम पंचायतें क्यों नहीं जुड़ी, इसकी पड़ताल कर जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
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मोदी सरकार ने देश की सभी ग्राम पंचायतों को 2019 तक ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य रखा था, मगर चंपावत जिले में ही ढेरों ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां ब्रॉडबैंड तो दूर सामान्य नेटवर्क भी नहीं है। 2018 मेें भारत नेट योजना से चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक में पायलट प्रोजेक्ट शुरू पूरा हुआ था। इसके तहत ब्लॉक की सभी 67 ग्राम पंचायतों को इंटरनेट, मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ा जाना था। अगर ये योजना जमीन पर कारगर रहती तो पंचेश्वर सहित नेपाल सीमा से लगे दूसरे गांवों को भी लाभ मिलता। लेकिन हाल ये है कि जिले का इकलौता डिजिटल गांव बगौटी को भी इसका फायदा नहीं मिल सका है लेकिन ये लक्ष्य हासिल नहीं हो सका है। ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष भुवन भट्ट का कहना है कि कुछ ही ग्राम पंचायतों को कनेक्शन मिल सका है। मगर गांव के एक भी व्यक्ति ने इस नेटवर्क के जरिये कनेक्शन नहीं लिया है। कमोबेश ऐसे ही हाल अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले के तीन ब्लॉकों के भी है।
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भारत नेट से जुड़े चार ब्लॉक :
चंपावत जिला : लोहाघाट ब्लॉक।
बागेश्वर जिला : बागेश्वर ब्लॉक।
अल्मोड़ा जिला : हवालबाग, ताकुला ब्लॉक।
ब्रॉडबैंड से होंगे ढेरों लाभ
डीपीआरओ सुरेश बैनी का कहना है कि पंचायतघरों के ब्रॉडबैंड से जोड़ने से ग्रामीणों को अनेकों लाभ होंगे। निर्माण, आवास योजनाओं के रिकार्ड के बेहतर रखरखाव से लेकर राशनकार्ड, परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र से लेकर विभिन्न कार्य गांव में ही हो जाएंगे। आधार कार्ड, बैंकिंग, तमाम ऑनलाइन काम पंचायतघरों से ही हो जाएंगे।
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अल्मोड़ा के दो और चंपावत, बागेश्वर के एक-एक ब्लॉक में भारत नेट योजना के तहत ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाई गई थी। बाद में इसकी जिम्मेदारी बीबीएनएल (भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड) को दे दी गई थी। वहीं ओएफसी के रखरखाव से लेकर कनेक्शन देने का काम सरकारी एजेंसी सीएससी ई-गवर्नमेंट इंडिया लिमिटेड को दिया गया है।
- एके गुप्ता, महाप्रबंधक, बीएसएनएल, अल्मोड़ा क्षेत्र।
लोहाघाट ब्लॉक को भारत नेट योजना में शामिल किया गया था। सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने के लिए कनेक्शन लेने और आगे की कार्यवाही के लिए डीपीआरओ के स्तर से कहा गया था। ब्रॉडबैंड से ज्यादातर ग्राम पंचायतें क्यों नहीं जुड़ी, इसकी पड़ताल कर जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।