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गांव के स्कूल में पढ़ाई की लेकिन शहर में दे रहे इम्तिहान
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टनकपुर में बोर्ड परीक्षा देकर लौटतीं छात्राएं। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : TANAKPUR
टनकपुर (चंपावत)। दूरस्थ ग्राम पंचायत डांडा, ककनई और बुड़म क्षेत्र के छात्र-छात्राओं ने सालभर अपने गांव के स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन जब इम्तिहान देने का नंबर आया तो उन्हें गांव छोड़कर नगर में आना पड़ा। दूर और नई जगह परीक्षा देने के लिए आने का असर उनके प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है। अपने भविष्य की खातिर ये छात्र-छात्राएं इन दिनों 51 किमी दूर टनकपुर में रहकर उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाएं दे रहे हैं। अधिकतर परीक्षार्थी किराया चुकाने में मोटी रकम खर्च कर इम्तिहान दे रहे हैं जबकि कुछ परीक्षार्थी रिश्तेदारों के घर रह रहे हैं।
तल्लापाल क्षेत्र के इन गांवों के छात्र-छात्राओं को परीक्षा केंद्र दूर होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हाईस्कूल के 26 और इंटर के 19 छात्र-छात्राएं 51 किमी दूर टनकपुर में ठाकुर श्याम सिंह जगत सिंह आरएच जीआईसी में परीक्षा दे रहे हैं। अभिभावकों के साथ आकर परीक्षा देने के लिए मजबूर ये परीक्षार्थी आमबाग, विष्णुपुरी कॉलोनी में दो हजार रुपये में कमरे के किराये समेत करीब डेढ़ से दो हजार रुपये खाने में खर्च कर रहे हैं। गांव के लोग पिछले छह साल से बोर्ड परीक्षा का केंद्र डांडा में बनाने की मांग करते रहे, लेकिन सुरक्षा आदि मानकों के अभाव में मांग पूरी नहीं हो सकी।
बोर्ड परीक्षा के लिए गांव से दूर आना असहज लगता है। घर से बाहर पढ़ना और अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना आसान नहीं है। - मनीषा बिष्ट, छात्रा।
प्रश्न आसान आए लेकिन दूसरी जगह आकर परीक्षा देने में परेशानी हो रही है। इसका असर परीक्षा परिणाम पर भी पड़ सकता है। - आरती बिनवाल, छात्रा।
अगर हमारे गांव के इंटर कॉलेज में परीक्षा केंद्र बनाने की मांग मान ली गई होती, तो इतनी दूर आकर इम्तिहान देने की नौबत नहीं आती। - मोहनी मेहरा, छात्रा।
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तल्लापाल क्षेत्र के इन गांवों के छात्र-छात्राओं को परीक्षा केंद्र दूर होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हाईस्कूल के 26 और इंटर के 19 छात्र-छात्राएं 51 किमी दूर टनकपुर में ठाकुर श्याम सिंह जगत सिंह आरएच जीआईसी में परीक्षा दे रहे हैं। अभिभावकों के साथ आकर परीक्षा देने के लिए मजबूर ये परीक्षार्थी आमबाग, विष्णुपुरी कॉलोनी में दो हजार रुपये में कमरे के किराये समेत करीब डेढ़ से दो हजार रुपये खाने में खर्च कर रहे हैं। गांव के लोग पिछले छह साल से बोर्ड परीक्षा का केंद्र डांडा में बनाने की मांग करते रहे, लेकिन सुरक्षा आदि मानकों के अभाव में मांग पूरी नहीं हो सकी।
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बोर्ड परीक्षा के लिए गांव से दूर आना असहज लगता है। घर से बाहर पढ़ना और अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना आसान नहीं है। - मनीषा बिष्ट, छात्रा।
प्रश्न आसान आए लेकिन दूसरी जगह आकर परीक्षा देने में परेशानी हो रही है। इसका असर परीक्षा परिणाम पर भी पड़ सकता है। - आरती बिनवाल, छात्रा।
अगर हमारे गांव के इंटर कॉलेज में परीक्षा केंद्र बनाने की मांग मान ली गई होती, तो इतनी दूर आकर इम्तिहान देने की नौबत नहीं आती। - मोहनी मेहरा, छात्रा।