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Champawat News: कैमरे में कैद हो रहे पक्षी और ग्रह-उपग्रह

Tue, 16 May 2023 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Tue, 16 May 2023 11:09 PM IST
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Birds and planets-satellites being captured on camera
लोहाघाट (चंपावत)। पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटक स्थल एबट माउंट में एस्ट्रोवीक शुरू हो गया है। कार्यक्रम तीन दिन तक चलेगा। इसमें देश के विभिन्न स्थानों से आए नामी फोटोग्राफर पक्षियों, ग्रह-उपग्रहों के चित्रों को अपने कैमरों में कैद करेंगे।
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मंगलवार सुबह बर्ड फोटोग्राफी सत्र से कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पहले दिन फोटोग्राफरों ने एबट माउंट क्षेत्र के भ्रमण के साथ ही बर्ड वाचिंग भी की। मार्गदर्शक फोटोग्राफर सलिल डोभाल ने कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में बताया। पद्मश्री मशहूर फोटोग्राफर अनूप शाह और थ्रीश कपूर ने बर्ड फोटोग्राफी की बुनियादी बातों की जानकारी दी।
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गुरुग्राम से आए टेलीस्कोप के तकनीशियन शिशु कुमार, देवानंद कुमार और अजय तलवार की ओर से टेलीस्कोप के माध्यम से एस्ट्रो ऑब्जर्वेशन करवाया गया। एस्ट्रो फोटोग्राफी के टिप्स भी दिए गए। दिन में टेलीस्कोप से सूर्य को देखने के लिए यहां आए पर्यटकों में उत्साह दिखा। एस्ट्रोवीक कार्यक्रम में डॉ. अजय तलवार, प्रदीप पांडेय आदि मौजूद हैं।
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इनसेट

सूर्यास्त से पहले का समय पक्षी फोटोग्राफी के लिए आदर्श

पक्षी फोटोग्राफर मोहम्मद आसिफ ने कहा कि बर्ड फोटोग्राफी के लिए सबसे अच्छा समय आमतौर पर सुबह या दोपहर का होता है। पक्षी इस समय सबसे अधिक सक्रिय होते हैं क्योंकि इस समय वे भोजन की तलाश करते हैं। कई पक्षी प्रजाति इस दौरान गायन और प्रेमालाप में संलग्न रहते हैं। सूर्यास्त से पहले का समय सुनहरे घंटे के रूप में माना जाता है। यह समय पक्षी फोटोग्राफी के लिए आदर्श समय है।
प्रचार-प्रसार के अभाव में उत्तराखंड के हिमालय को नहीं जानते पर्यटक:साह
लोहाघाट (चंपावत)। पद्मश्री फोटोग्राफर अनूप साह ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं लेकिन व्यापक प्रचार-प्रसार न मिलने से पर्यटक स्थल और यहां की खूबसूरत वादियां पर्यटकों की आंखों से ओझल हैं। पर्यटक उत्तराखंड के हिमालय के बजाय नेपाल के हिमालय को ही जानते हैं। बड़ी संख्या में उसे देखने के लिए वहां पहुंचते हैं।


उन्होंने उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों, यहां की झीलों, नदियों, पहाड़ों, दुर्लभ पशु पक्षियों के बेहतरीन चित्रों को वृहद स्तर पर प्रचारित प्रसारित करने पर जोर दिया। साह ने बताया कि भारत में करीब 1300 प्रजातियों के पक्षी हैं जिसमें से अकेले उत्तराखंड में 800 प्रजातियां हैं। इनका प्रचार-प्रचार न होने से पर्यटकों की नजर नहीं पड़ती है। आज नदियों में ब्लीचिंग पाउडर, करंट, ब्लास्टिंग से दुर्लभ प्रजाति की महाशीर मछली का अस्तित्व विलुप्त होने की कगार में है। उन्होंने एबटमाउंट में हेली सेवा शुरू करने पर भी जोर दिया।




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