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Champawat News: वार और प्रहार से रोमांचक हुई बगवाल

Thu, 31 Aug 2023 10:36 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Thu, 31 Aug 2023 10:36 PM IST
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Bagwal got excited by attack and attack
देवीधुरा/पाटी (चंपावत)। देवीधुरा के खोलीखांड दुबाचौड़ा मैदान में आषाढ़ी कौतिकी (रक्षाबंधन) के दिन बृहस्पतिवार को फल-फूलों से बगवाल खेली गई। मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी सहित कई हस्तियों ने बगवाल देखी। 50 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी में चारों खाम और सात थोक के योद्धाओं ने सात मिनट तक रोमांचित करने वाली बगवाल खेली। बगवाल मुख्य रूप से नाशपाति, सेब और अन्य फल फूलों से हुई लेकिन अंतिम क्षणों में कुछ जोशीले योद्धाओं ने पत्थरों की भी बारिश की। दोपहर 2:14 बजे शंख ध्वनि के साथ बगवाल का शुभारंभ हुआ जो 2:21 बजे तक चली। इस बार बगवाल 2022 की अपेक्षा दो मिनट कम हुई। बगवाल के दौरान लगातार दूसरे साल बारिश नहीं हुई। हैरतंगेज नजारा पेश करने वाली बगवाल में 141 बगवाली वीर और नौ दर्शक चोटिल हुए।
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मैदान में प्रवेश करने से पूर्व चारों खामों और सात थोक (गहड़वाल, चम्याल, लमगड़िया, वालिग, गोरना, कटना और फुलाराकोट) के योद्धाओं ने मां वज्र बाराही का जयकारा किया। सफेद साफा पहने वालिग खाम के बगवाली वीरों ने मुखिया बद्री सिंह बिष्ट के नेतृत्व में रणक्षेत्र में दस्तक दी। गुलाबी साफा धारण कर गंगा सिंह चम्याल के नेतृत्व में चम्याल खाम, त्रिलोक सिंह बिष्ट के नेतृत्व में केसरिया साफा पहन गहड़वाल खाम और वीरेंद्र सिंह लमगडिय़ा के नेतृत्व में पीला साफा पहन लमगड़िया खाम के योद्धाओं ने प्रवेश किया।
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मां के जयकारे के साथ चारों खाम के योद्धा व्रज बाराही के मंदिर की परिक्रमा करने के बाद अपने-अपने मोर्चे पर डट गए। संकेत मिलते ही वालिग और लमगड़िया खाम ने फल-फूल बरसाकर बगवाल का शुभारंभ किया। दूसरी तरफ से चम्याल और गहड़वाल खाम मोर्चा ले रहा था। सात मिनट तक नाशपाती, संतरे, सेब और फूलों से बगवाल हुई लेकिन आखिरी मिनट में फल खत्म होने पर पत्थर भी बरसे।
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मंदिर के पुजारी महादेव ने दोपहर 2:21 बजे चंवर झुलाकर बगवाल समाप्त होने का संकेत दिया। बगवाल पर विराम लगने के बाद चारों खामों के योद्धाओं ने गले मिल कुशलक्षेम पूछी। सकुशल वापसी के लिए सभी वीरों ने देवी मां के सम्मुख शीश नवाया। घायलों का वहां लगे दो स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टर की टीम ने इलाज किया।
बगवाल में 700 से अधिक योद्धाओं ने हिस्सा लिया। बगवाल देखने के लिए मैदान ही नहीं दर्शक दीर्घा और आसपास के मकानों की छतें भी खचाखच भरी थीं। बगवाल शुरू होने से पूर्व पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और डॉ. भुवन चंद्र जोशी ने मां बाराही देवी की पूजा-अर्चना की।
प्रमुख बगवाली वीर
लमगड़िया खाम के साथ मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, खीम सिंह लमगड़िया, आन सिंह लमगड़िया, तारा सिंह, उमेद सिंह, किशन सिंह, लाल सिंह, दीवान सिंह, वालिग खाम की ओर से मदन सिंह, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राजू बिष्ट, चेतन भैय्या, चम्याल खाम में लाल सिंह चम्याल, बिशन सिंह, विनोद चम्याल, जगदीश सिंग्वाल, गौरव सिंग्वाल और गहड़वाल खाम की ओर से जोध सिंह बिष्ट, डुंगर सिंह बिष्ट, मोहन बिष्ट, दिनेश चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, खुशाल सिंह, माधो सिंह, गोपाल बिष्ट, लाल सिंह, पान सिंह आदि प्रमुख योद्धा थे।
ये महत्वपूर्ण लोग रहे मौजूद
भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा, पूर्व विधायक पूरन सिंह फत्र्याल, जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय, ब्लॉक प्रमुख सुमनलता, विनीता फर्त्याल, रेखा देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष निर्मल माहरा, नैनीताल जिलाध्यक्ष हरीश सिंह बिष्ट, मंदिर समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व प्रमुख लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, पुष्पा लमगड़िया, भगीरथ भट्ट, हयात सिंह माहरा, गोविंद सामंत, एडवोकेट रमेश कापड़ी, चेतन भैया, मोहन सिंघवाल, रोशन लमगड़िया, राजेंद्र बिष्ट, गिरीश सिंघवाल, ईश्वर सिंह बिष्ट, प्रकाश महरा, गौरव सिंघवाल, अमित लगमड़िया, गोकुल कोहली, नवीन मेलकानी, डीएम नवनीत पांडे और एसपी देवेंद्र पींचा।
बगवाल मेला समय दर समय
5:00 बजे : पूजा-अर्चना शुरू हुई जो 9:15 बजे तक चली।
11.47 बजे : खामों की फर्रों के साथ परिक्रमा शुरू हुई।
12:41 बजे : सफेद साफा पहनकर वालिग खाम के वीरों ने माता के जयकारों के साथ प्रवेश किया।
1:08 बजे : गुलाबी साफा पहने चम्याल खाम के रणबांकुरों ने मैदान में प्रवेश कर मंदिर की परिक्रमा की।
1:36 बजे : केसरिया साफा पहने गहरवाल खाम खोलीखांण दुबचौड़ा मैदान में पहुंचा।
1:59 बजे : पीले साफे के साथ लमगड़िया खाम ने मां बाराही का जयकारा लगाते हुए मैदान में प्रवेश किया।
2:14 बजे : शंखनाद के साथ खोलीखांड दुबचौड़ा मैदान में बगवाल शुरू हुई।
2:21 बजे : मुख्य पुजारी महादेव ने चंवर झुलाकर बगवाल समाप्त करने का संकेत दिया।
वर्ष बगवाल का समय चोटिल
2014: 14 मिनट 150 योद्धा और 30 दर्शक
2015: 10 मिनट 124 योद्धा और 25 दर्शक
2016: 7 मिनट 59 योद्धा और 11 दर्शक
2017: 8 मिनट 11 योद्धा और 323 दर्शक
2018: 8 मिनट 112 योद्धा और 129 दर्शक
2019: 9 मिनट 98 योद्धा और 24 दर्शक
2020: 5 मिनट 3 योद्धा
2021: 8 मिनट 75 योद्धा और 02 दर्शक
2022: 9 मिनट 201 योद्धा और 29 दर्शक
2023: 7 मिनट 141 योद्धा और 09 दर्शक
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एक क्विंटल की शिला के साथ लगाए सात चक्कर
भारी भरकम पत्थर उठाने के लिए मची होड़
संवाद न्यूज एजेंसी
देवीधुरा/पाटी (चंपावत)। देवीधुरा के खोलीखांड दुबाचौड़ मैदान में एक क्विंटल से अधिक वजन के गोल पत्थर को उठाने की होड़ रही। सुबह से इस गोल शिला को उठाने का सिलसिला बगवाल शुरू होने से कुछ देर पहले ही रुका। शिला को उठाने की परंपरा लोगों की आस्था से जुड़ी है। इस बार 103 लोगों ने आस्था के इस भारी भरकम पत्थर को उठाया। कुछ नौजवानों ने इस शिला को छाती तक उठाया तो इक्का-दुक्का ऐसे भी थे जिन्होंने इसे कंधे पर भी उठा लिया। इन सबके बीच रैगांव के गोपाल सिंह ऐसे रहे जिन्होंने पत्थर को लेकर मैदान के एक हिस्से की सात बार परिक्रमा भी की। गोपाल बताते है कि वे नौ साल से शिला उठाते रहे हैं लेकिन ये पहला मौका है जब उन्होंने सात चक्कर लगाए। मान्यता है कि इस विशालकाय शिला को उठाना शारीरिक सामर्थ्य ही नहीं दिखाता बल्कि मनोकामना को भी पूरा करता है।
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आंखों पर पट्टी बांध आज होगा देवी मां की मूर्ति का स्नान
मुचकुंद ऋषि के आश्रम जाकर बाराही मां आज देंगी आशीर्वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
देवीधुरा/पाटी (चंपावत)। मंदिर के गर्भगृह में एक ताम्र पेटिका में रखी मां बाराही की मूर्ति को खुली आंखों से देखने की परंपरा नहीं है। कहा जाता है कि आज तक मां वज्र बाराही की मूर्ति को किसी भी श्रद्धालु ने नहीं देखा है। इससे मूर्ति किस धातु की है इसे भी कोई नहीं जानता। आंखों पर पट्टी बांधकर मूर्ति को स्नान कराने की परिपाटी सदियों से चल रही है।
पीठाचार्य पंडित कीर्ति बल्लभ जोशी बताते हैं कि बगवाल के एक दिन बाद शुक्रवार को ताम्र पेटिका में रखी मूर्ति को पुजारी नेत्रों को ढंककर नंद गृह में स्नान कराएंगे। बंद नेत्रों से स्नान करने के संबंध में दो कथाएं प्रचलित हैं। बताते हैं कि मां दिगंबरा शक्ति यानी निवस्त्र हैं। ऐसे में किसी भी श्रद्धालु को मां को वस्त्रहीन रूप में देखना धार्मिक मर्यादा और नीति के खिलाफ है। वहीं एक अन्य किवदंती के अनुसार कभी यह मूर्ति चोरी हो गई थी। मूर्ति चोरी कर ले जाने वाले व्यक्ति की नेत्र ज्योति चली गई थी। तब उस व्यक्ति ने देवी मूर्ति को वापस मंदिर में रख दिया था।
शुक्रवार को मां वज्र बाराही की शोभा यात्रा निकाली जाएगी। 600 मीटर दूरी पर स्थित मुचकुंद ऋषि के आश्रम तक निकलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालुओं को मां आशीर्वाद देंगी। मान्यता है कि देवासुर संग्राम में काल यवन राक्षस के साथ हुए युद्ध में मुचकुंद ऋषि ने देवताओं का साथ दिया था। इससे प्रसन्न होकर मां बाराही ने स्वयं मुचकुंद ऋषि को दर्शन देने का वचन दिया था। बगवाल के अगले दिन शुक्रवार को होने वाली यह शोभायात्रा इसी वचन को निभाने की परंपरा के रूप में की जाएगी।

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बगवाल में दो बार आने वाले पहले सीएम हैं धामी
देवीधुरा/पाटी (चंपावत)। आम दर्शकों की तरह ही बगवाल देखने में बड़ी हस्तियां भी पीछे नहीं हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2015 में हरीश रावत, केंद्रीय राज्य मंत्री रहते अजय टम्टा, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, पूर्व मंत्री अरविंद पांडेय, पूर्व स्पीकर गोविंद कुंजवाल सहित कई दिग्गज नेता बगवाल में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रह चुके हैं। वहीं बगवाल में लगातार दूसरी बार मुख्य अतिथि के रूप में आने वाले पुष्कर सिंह धामी पहले सीएम हैं। संवाद
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