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माइक्रो प्लान तैयार कर बेरोजगारी दूर करने के होंगे प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Fri, 27 Oct 2017 10:29 PM IST
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चंपावत जिला कार्यालय सभागार में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते डीएम डा.अहमद इकबाल।
- फोटो : अमर उजाला
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इंस्टीट्यूट फार ह्यूमैन रिसोर्स डेवलपमेंट नई दिल्ली और नियोजन विभाग के सहयोग से जिला कार्यालय सभागार में एक दिनी कार्यशाला आयोजित की गई। राज्य में प्रथम मानव विकास रिपोर्ट तैयार करने को लेकर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने कहा कि जिले में चाय, दुग्ध उत्पादन तथा माध्यमिक शिक्षा का क्षेत्र काफी विकसित है, लेकिन चिकित्सा, उच्च शिक्षा, बेरोजगारी और लिंगानुपात के मामले में काफी पीछे है।
उन्होंने कहा कि दुग्ध, चाय के साथ दुग्ध पदार्थों, पर्यटन के क्षेत्र में भी जिले में अपार संभावनाएं हैं। जिसके लिए माइक्रो प्लान तैयार कर विकास के साथ बेरोजगारी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी एसएस बिष्ट ने कहा कि जिले में हल्दी, अदरक, आलू जैसी नकदी फसलों के साथ तेजपात पर और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। मानव संसाधन विकास संस्थान नई दिल्ली से आये विशेषज्ञ प्रोफेसर आईसी अवस्थी एवं डॉ. बलवंत मेहता ने कहा कि राज्य की प्रथम मानव विकास रिपोर्ट तैयार करने में यहां की विशेषताओं, भावी अवसरों की स्थिति, संभावनाएं, चुनौतियों एवं सुझाव लेने के साथ आजीविका संसाधन, रोजगार की स्थिति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य का स्तर, महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार, पर्यटन, उद्योग एवं पशुपालन में रोजगार की स्थिति के साथ विभिन्न कार्यों के संपादन में आ रही कठिनाईयों को भी रिपोर्ट में शामिल करेंगे।
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कार्यशाला में अधिकारियों ने सुझाव भी बताए और कहा कि पहाड़ में चकबंदी, परिवहन, बाजार की अनुपलब्धता, जंगली जानवरों का आतंक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में चकबंदी होने से काफी हद तक पलायन से निजात पाई जा सकती है। कार्यशाला में परियोजना निदेशक हरगोविंद भट्ट, जिला विकास अधिकारी आरसी तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एमएस बोरा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.बीएस जंगपांगी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक सत्यनारायण, जिला क्रीड़ा अधिकारी आरएस धामी, जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्या, जीबी जोशी, एनसी कोठारी, संख्याधिकारी एनबी बचखेती, डीपीआरओ सुरेश बेनी सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
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उन्होंने कहा कि दुग्ध, चाय के साथ दुग्ध पदार्थों, पर्यटन के क्षेत्र में भी जिले में अपार संभावनाएं हैं। जिसके लिए माइक्रो प्लान तैयार कर विकास के साथ बेरोजगारी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी एसएस बिष्ट ने कहा कि जिले में हल्दी, अदरक, आलू जैसी नकदी फसलों के साथ तेजपात पर और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। मानव संसाधन विकास संस्थान नई दिल्ली से आये विशेषज्ञ प्रोफेसर आईसी अवस्थी एवं डॉ. बलवंत मेहता ने कहा कि राज्य की प्रथम मानव विकास रिपोर्ट तैयार करने में यहां की विशेषताओं, भावी अवसरों की स्थिति, संभावनाएं, चुनौतियों एवं सुझाव लेने के साथ आजीविका संसाधन, रोजगार की स्थिति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य का स्तर, महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार, पर्यटन, उद्योग एवं पशुपालन में रोजगार की स्थिति के साथ विभिन्न कार्यों के संपादन में आ रही कठिनाईयों को भी रिपोर्ट में शामिल करेंगे।
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कार्यशाला में अधिकारियों ने सुझाव भी बताए और कहा कि पहाड़ में चकबंदी, परिवहन, बाजार की अनुपलब्धता, जंगली जानवरों का आतंक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में चकबंदी होने से काफी हद तक पलायन से निजात पाई जा सकती है। कार्यशाला में परियोजना निदेशक हरगोविंद भट्ट, जिला विकास अधिकारी आरसी तिवारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एमएस बोरा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.बीएस जंगपांगी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक सत्यनारायण, जिला क्रीड़ा अधिकारी आरएस धामी, जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्या, जीबी जोशी, एनसी कोठारी, संख्याधिकारी एनबी बचखेती, डीपीआरओ सुरेश बेनी सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।