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हेलमेट पहनना जरूरी है

Wed, 17 Feb 2016 10:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लोहाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला,लोहाघाट Updated Wed, 17 Feb 2016 10:24 PM IST
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हेलमेट पहनने के लिए अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे अभियान का जागरूक लोगों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि अखबार की ओर से चलाई जा रही मुहिम के बाद बगैर हेलमेट पहनने से परिवार के सामने आने वाली भयावह स्थिति का यदि पहले ही आकलन कर लिया जाए तो इससे दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।

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बगैर हेलमेट के क्षेत्र में कई ऐसी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें घायलों के इलाज पर परिवारों ने अपनी जीवन की गाढ़ी कमाई लगा दी थी, बावजूद इसके न तो उनका लाडला बचा और न ही धन बचा पाए। समाज के बुजुर्गों का कहना है कि युवाओं को हेलमेट पहनने के लिए घर से माहौल बनना चाहिए, उसके बाद यदि वह हेलमेट नहीं पहनता है तो उसे टोकना चाहिए।
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आत्मरक्षा के लिए जरूरी है हेलमेट
शिक्षक नरेश राय का कहना है कि हेलमेट पहनने से स्वत: आत्मरक्षा एवं आत्मविश्वास का भाव पैदा होने के साथ ही जीवन की बहुमूल्यता का भी अहसास हो जाता है। मैने कई भीषण दुर्घटनाएं देखी हैं, जिसमें हेलमेट ने बाइक सवारों के लिए कवच का काम किया है।
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बाइक सवार स्वयं सजग बनें
सामाजिक कार्यकर्ता दानू सुतेड़ी का कहना है कि स्वाइन फ्लू, डेंगू जैसी बीमारियों से बचने के हम उपाय करने के साथ ही सचेत रहते हैं। ठीक उसी प्रकार बाइक सवारों को दुर्घटनाओं से सिर को बचाने के लिए हेलमेट का प्रयोग स्वत: करना चाहिए।

बच्चों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करें
जिला पंचायत के पूर्व सदस्य सचिन जोशी का कहना है कि परिवारों और विद्यालयों का यह नैतिक दायित्व होता है कि वे बच्चों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करें। उन्हें यह समझाएं कि इसे पहनना किसी दंड से बचना नहीं, बल्कि बहुत बड़े हादसे से बचना है।

बच्चों को टोकते रहें बुजुर्ग
सामाजिक कार्यकर्ता मोहित पाठक कहना है कि जैसे छोटों को अच्छी-बुरी बातों का बोध कराया जाता है, ठीक उसी प्रकार हेलमेट नहीं पहनने वाले बच्चों को बुजुर्गों को टोकते रहना चाहिए।


नाबालिग बच्चों को न दें बाइक

ग्राम प्रधान सुभाष विश्वकर्मा का कहना है कि मानव जीवन अमूल्य है। अभिभावक नाबालिग बच्चों को बाइक देकर उनका जीवन तबाह न करें। यदि उनका लाड़ला बड़ा है तो उसकी अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने की आदत बनाएं। चोरी होने से पहरा देना में ही समझदारी है।

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