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चंपावत के अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में बताए महिला अधिकार
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चंपावत के मां पूर्णागिरि कॉलेज ऑफ एजुकेशन में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्रा?
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। सामाजिक चिंतक विवेक जोशी ने कहा कि समाज की तरक्की आधी आबादी को अधिकार दिए बगैर संभव नहीं है। उन्हें ये अधिकार महज कानून की किताबों में नहीं, धरातल पर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी, शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में बेटियों के आगे बढ़ने से ही समाज और देश की तरक्की मुमकिन है।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत सोमवार को मां पूर्णागिरि कॉलेज ऑफ एजुकेशन (बीएड कॉलेज) में हुई गोष्ठी में मुख्य वक्ता जोशी ने कहा कि समाज की तरक्की आधी आबादी को अधिकार दिए बगैर संभव नहीं है। उन्हें ये अधिकार महज कानून की किताबों में नहीं, धरातल पर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को बराबरी का दर्जा देने के लिए कानूनी प्रावधान तो बहुत हैं लेकिन इन नियम - कानूनों के क्रियान्वयन का पक्ष सशक्त नहीं है।
सामाजिक चिंतक जोशी ने पढ़ाई के साथ पौधों का संरक्षण कर पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर बीएड के छात्र-छात्राओं को शपथ भी दिलाई गई। अधिकारों के साथ पर्यावरण को बचाने के लिए आगे आने का आह्वान भी किया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के निदेशक डॉ. केएस अधिकारी ने किया। बाद में महिला सम्मान को लेकर शपथ दिलाई गई। गोष्ठी में छात्राओं के अलावा बीएड शिक्षिका कुसुम बेलवाल, सोनी लोहिया, डॉ. गिरीश चंद्र पचौली, मनोज सकलानी, मनोज कार्की ने भी विचार रखे।
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महिलाओं के अधिकारों के लिए कानून बहुत हैं लेकिन मिल नहीं पाते हैं। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद माहौल है। नारी सुरक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
-मंजू बोहरा, बीएड छात्रा।
बालिकाओं की समानता की सिर्फ बातें होती हैं। जरूरत इन बातों को मूर्तरूप देने की है। महिला अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ग को आगे आना होगा।
-सोनी रौतेला पुजारी, बीएड छात्रा।
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत सोमवार को मां पूर्णागिरि कॉलेज ऑफ एजुकेशन (बीएड कॉलेज) में हुई गोष्ठी में मुख्य वक्ता जोशी ने कहा कि समाज की तरक्की आधी आबादी को अधिकार दिए बगैर संभव नहीं है। उन्हें ये अधिकार महज कानून की किताबों में नहीं, धरातल पर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को बराबरी का दर्जा देने के लिए कानूनी प्रावधान तो बहुत हैं लेकिन इन नियम - कानूनों के क्रियान्वयन का पक्ष सशक्त नहीं है।
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सामाजिक चिंतक जोशी ने पढ़ाई के साथ पौधों का संरक्षण कर पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर बीएड के छात्र-छात्राओं को शपथ भी दिलाई गई। अधिकारों के साथ पर्यावरण को बचाने के लिए आगे आने का आह्वान भी किया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के निदेशक डॉ. केएस अधिकारी ने किया। बाद में महिला सम्मान को लेकर शपथ दिलाई गई। गोष्ठी में छात्राओं के अलावा बीएड शिक्षिका कुसुम बेलवाल, सोनी लोहिया, डॉ. गिरीश चंद्र पचौली, मनोज सकलानी, मनोज कार्की ने भी विचार रखे।
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महिलाओं के अधिकारों के लिए कानून बहुत हैं लेकिन मिल नहीं पाते हैं। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद माहौल है। नारी सुरक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
-मंजू बोहरा, बीएड छात्रा।
बालिकाओं की समानता की सिर्फ बातें होती हैं। जरूरत इन बातों को मूर्तरूप देने की है। महिला अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ग को आगे आना होगा।
-सोनी रौतेला पुजारी, बीएड छात्रा।