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‘आमा बूबू बैठी रया, हम निसी जानूं...’
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Thu, 10 Sep 2015 10:20 PM IST
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गुमदेश के जिंडी, सुनकुरी, मजपीपल आदि गांवों में गौरा महोत्सव की धूम मची है। महिला-पुरुष गौरा-महेश की स्तुति करते हुए जीवन की निराशा को भूले हुए हैं। सुंई गांव में गौरा देवी को अश्रुपूरित नेत्रों से विदा किया गया। सुनकुरी में महाभारतकाल के गीतों का गायन करते हुए पांडवों द्वारा कौरवों को महासंग्राम में मात देने का वृतांत सुनाया। मुख्य अतिथि केएमवीएन के निदेशक मुन्ना ढेक ने मंदिर के विकास के लिए 1.5 लाख रुपये दिलाने का आश्वासन दिया। माधवानंद कलौनी, कल्याण चंद, हयात सिंह आदि ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
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महिलाओं ने पांडु द्वारा हैग्यो राज, पापी कौरवों की ली गौ राज आदि गीतों का गायन किया। सुंई गांव में अश्रुपूरित नेत्रों से गौरा देवी को ससुराल के लिए विदा किया गया। जाते वक्त गौरा देवी द्वारा ‘आमा बूबू बैठी रया, हम निसी जानूं...’ आदि गीतों का गायन किया गया। रेखा पुजारी, सुशीला चौबे, नर्मदा देवी, रेवती देवी, सावित्री पुजारी, हेमा जोशी, चंचला तिवारी आदि की आंखें छलछला आईं। इस अवसर पर श्याम चौबे, सचिन जोशी, मदन पुजारी, भुवन चौबे, राजेश चौबे आदि मौजूद थे। कोलीढेक के जोशी कलोनी में गौरा बैनी तू जाली सौरासा, ऐड़ी दुदधारा गौरा तेरो घुंघरू बाजला आदि गीतों के साथ गौरा देवी को विदाई दी गई। यहां राधिका, गोविंदी, अल्का ढेक, जानकी जोशी, रमा जोशी, मंजू, गीता आदि शामिल थीं।
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