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नायब तहसीलदारों के हवाले पहाड़ की सभी तहसीलें

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 31 Mar 2021 11:32 PM IST
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All the tehsils of the mountain handed over to the tehsildars
तल्लादेश की बंद उप तहसील। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। चंपावत जिले की सभी चारों पहाड़ी तहसीलों में तहसीलदार की कुर्सियां खाली हैं। एक भी तहसील में तहसीलदार नहीं है। काम चलाने के लिए ये जिम्मेदारी नायब तहसीलदारों को दी गई है। अलबत्ता इससे कामकाज पर असर पड़ रहा है।
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चंपावत जिले के मैदानी क्षेत्र में पूर्णागिरि (टनकपुर) और पहाड़ी क्षेत्रों में चंपावत, लोहाघाट, पाटी और बाराकोट तहसीलें हैं। लेकिन इस वक्त पहाड़ की तहसीलों के हाल खराब हैं। चारों तहसीलों में तहसीलदार नहीं हैं। वहीं 2014 में खुली बाराकोट तहसील में न नायब तहसीलदार है और न ही तहसीलदार। लोगों का कहना है कि अफसरों की कमी से आय, जाति, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, दाखिल खारिज, भूलेख संबंधी काम में देरी हो रही है।
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चार साल से लटके हैं तल्लादेश की उप तहसील में ताले
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए दिसंबर 2016 में खोली गई मंच उप तहसील का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। उप तहसील में न नायब तहसीलदार तैनात है और न ही कोई अन्य कर्मी। जनवरी 2017 से इसमें ताला लटक गया है। उप तहसील खुलने से अब तक एक भी प्रमाण पत्र नहीं बन सका है। इसके चलते 14 ग्राम पंचायतों के आठ हजार से अधिक लोगों को राजस्व से संबंधित कार्यों के लिए 35 किमी दूर चंपावत आने से नहीं मिल पा रही है। एडीएम टीएस मर्तोलिया का कहना है कि क्षेत्र में इंटरनेट नेटवर्क की दिक्कत होने के साथ ही स्टाफ की कमी के चलते उप तहसील का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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गुमदेश उप तहसील में कर्मियों की कमी पड़ रही भारी
चंपावत। नेपाल सीमा से लगी गुमदेश उप तहसील कर्मियों की कमी के चलते आज तक शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते क्षेत्र के लोग तहसील संबंधी काम के लिए लोहाघाट की दौड़ लगाने को मजबूर हैं। नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र की 41 ग्राम पंचायतों के लिए जून 2015 में पृथक उप तहसील की राजाज्ञा जारी हुई थी। किमतोली के राजस्व गांव गुरेली (खालगढ़) को इस उप तहसील के मुख्यालय के रूप में मंजूरी मिली। गुमदेश विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष माधो सिंह अधिकारी का कहना है कि उप तहसील का संचालन न होने से नेपाल के सीमावर्ती लोगों को खतौनी की नकल, आधार कार्ड, स्थायी निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र के साथ जरूरी दस्तावेज बनाने के 39 किमी दूर लोहाघाट जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

कोट
जिन तहसीलों में तहसीलदार का पद खाली है, वहां नायब तहसीलदारों को तहसीलदार के रूप में काम करने के लिए शासन के स्तर से अधिकृत किया गया है। अलबत्ता तहसील के रिक्त तहसीलदारों के पदों पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
टीएस मर्तोलिया, एडीएम, चंपावत।
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