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नरियालगांव पुश प्रजनन केंद्र:
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चंपावत के नरियालगांव में स्थित राजकीय पशु प्रजनन केंद्र।
- फोटो : CHAMPAWAT
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जिले के नरियालगांव स्थित राजकीय पशु प्रजनन केंद्र में डेढ़ सौ से अधिक बद्री (स्थानीय नस्ल) गायों पर अनुसंधान कार्य किया जा रहा है। अब यहां बद्री गायों से उत्पादित दूध को गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) की एक कंपनी क्रय करेगी। गाजियाबाद की हेता ऑर्गेनिक कंपनी और राजकीय पशु प्रजनन केंद्र के बीच इस संबंध में बीते जुलाई माह में अनुबंध भी हो गया है। अब पशु प्रजनन केंद्र के माध्यम से बद्री गायों के दूध के साथ ही गोमूत्र और गोबर की बिक्री भी की जा सकेगी।
नरियालगांव पशु प्रजनन केंद्र से उत्पादित बद्री गाय के दूध को अब तक दुग्ध संघ को बेचा जाता था। किसानों को एक लीटर दूध का मूल्य 25 से 27 रुपये ही मिल पाता था लेकिन अब कंपनी से अनुबंध के बाद बद्री गायों के दूध का दाम 41 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
पशु प्रजनन केंद्र के परियोजना निदेशक डॉ. एचसी जोशी के अनुसार बीती एक जुलाई को गाजियाबाद की हेता कंपनी और डॉक्टरों की टीम ने प्रजनन केंद्र का दौरा किया। टीम ने निरीक्षण के बाद प्रजनन केंद्र के साथ अनुबंध कर लिया है। उन्होंने बताया कि केंद्र की ओर से बद्री गायों के दूध के साथ ही गोमूत्र और गोबर की बिक्री भी शुरू कर दी गई है।
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कई खूबियों के कारण बद्री गाय बनी पशुपालकों की पसंद
चंपावत। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपागी के अनुसार गुणवत्तापूर्ण दूध और कम चारा खाने की खूबियों के कारण बद्री गाय पशुपालकों की पहली पसंद रही है। इस गाय में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अधिक रहती है और जंगल में कई प्रकार की जड़ी बूटियां चुगने के कारण इसका गोमूत्र भी काफी अधिक गुणकारी माना जाता है।
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नरियालगांव पशु प्रजनन केंद्र से उत्पादित बद्री गाय के दूध को अब तक दुग्ध संघ को बेचा जाता था। किसानों को एक लीटर दूध का मूल्य 25 से 27 रुपये ही मिल पाता था लेकिन अब कंपनी से अनुबंध के बाद बद्री गायों के दूध का दाम 41 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
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पशु प्रजनन केंद्र के परियोजना निदेशक डॉ. एचसी जोशी के अनुसार बीती एक जुलाई को गाजियाबाद की हेता कंपनी और डॉक्टरों की टीम ने प्रजनन केंद्र का दौरा किया। टीम ने निरीक्षण के बाद प्रजनन केंद्र के साथ अनुबंध कर लिया है। उन्होंने बताया कि केंद्र की ओर से बद्री गायों के दूध के साथ ही गोमूत्र और गोबर की बिक्री भी शुरू कर दी गई है।
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कई खूबियों के कारण बद्री गाय बनी पशुपालकों की पसंद
चंपावत। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपागी के अनुसार गुणवत्तापूर्ण दूध और कम चारा खाने की खूबियों के कारण बद्री गाय पशुपालकों की पहली पसंद रही है। इस गाय में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अधिक रहती है और जंगल में कई प्रकार की जड़ी बूटियां चुगने के कारण इसका गोमूत्र भी काफी अधिक गुणकारी माना जाता है।

नरियालगांव के पशु प्रजनन केंद्र में पाली जा रही बद्री गायें।- फोटो : CHAMPAWAT