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चंपावत में सैलानियों को लुभाएगा साहसिक पर्यटन!
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पैराग्लाइडिंग के लिए मुफीद बाणासुर किले का क्षेत्र।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिले में पहले पैराग्लाइडिंग स्थल का चयन कर लिया गया है। बाणासुर किले के आसपास के क्षेत्र को चयनित कर प्रस्ताव पर्यटन निदेशालय भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद जिले में साहसिक पर्यटन बढ़ने के साथ ही सैलानियों की आमद भी बढ़ने की उम्मीद है।
साहसिक पर्यटन विभाग ने जिले में पैराग्लाइडिंग के लिए पांच स्थानों का सर्वे किया था। झूमाधुरी, दियूरी, चंडालकोट, चल्थी और बाणासुर किले के आसपास के क्षेत्र के परीक्षण में चार जगह पैराग्लाइडिंग के लिए अनुपयुक्त पाई गई थी। सिर्फ बाणासुर के किले के आसपास का क्षेत्र पैराग्लाइडिंग के मानकों पर खरा उतरा। जिला साहसिक पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि परीक्षण में उपयुक्त पाए जाने के बाद यह प्रस्ताव निदेशालय भेजा गया है। किले के आसपास बिजली के 18 खंभे हैं। इन खंभों को यहां से अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए ऊर्जा निगम से आग्रह किया गया है।
विभाग का कहना है कि इस साल मार्च तक बारहमासी मार्ग पूरा होने के बाद सिर्फ ढाई घंटे के सफर में टनकपुर से 95 किमी दूर बाणासुर किले के पास पहुंचा जा सकेेगा। इससे साहसिक पर्यटन के शौकीनों को नया विकल्प मिलेगा। पर्यटन विभाग का मानना है कि बुनियादी ढांचा बेहतर होने के अलावा मां पूर्णागिरि धाम, मां बाराही धाम देवीधुरा जैसे आध्यात्मिक पर्यटन के साथ साहसिक पर्यटन से सैलानियों की आमद में भी तेजी आएगी। (संवाद)
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साहसिक पर्यटन को मिलेगा विस्तार
चंपावत। पैराग्लाइडिंग के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद जिले में साहसिक पर्यटन को विस्तार मिलेगा। अभी यहां मुख्य रूप से राफ्टिंग ही साहसिक पर्यटन का साधन था। पंचेश्वर, घाट और शारदा नदी राफ्टिंग के लिए बेहद मुफीद है। हर साल दो हजार से अधिक लोग राफ्टिंग का लुत्फ उठाते हैं। (संवाद)
कोट...
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद चंपावत जिले में भी भीमताल की तर्ज पर पैराग्लाइडिंग की व्यापारिक गतिविधियां हो सकेंगी। ऑनलाइन बुकिंग से न केवल पैराग्लाइडिंग लोकप्रिय होगी, बल्कि होम स्टे योजना को भी पंख लगेंगे।
- लता बिष्ट, जिला साहसिक पर्यटन अधिकारी, चंपावत।
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साहसिक पर्यटन विभाग ने जिले में पैराग्लाइडिंग के लिए पांच स्थानों का सर्वे किया था। झूमाधुरी, दियूरी, चंडालकोट, चल्थी और बाणासुर किले के आसपास के क्षेत्र के परीक्षण में चार जगह पैराग्लाइडिंग के लिए अनुपयुक्त पाई गई थी। सिर्फ बाणासुर के किले के आसपास का क्षेत्र पैराग्लाइडिंग के मानकों पर खरा उतरा। जिला साहसिक पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि परीक्षण में उपयुक्त पाए जाने के बाद यह प्रस्ताव निदेशालय भेजा गया है। किले के आसपास बिजली के 18 खंभे हैं। इन खंभों को यहां से अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए ऊर्जा निगम से आग्रह किया गया है।
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विभाग का कहना है कि इस साल मार्च तक बारहमासी मार्ग पूरा होने के बाद सिर्फ ढाई घंटे के सफर में टनकपुर से 95 किमी दूर बाणासुर किले के पास पहुंचा जा सकेेगा। इससे साहसिक पर्यटन के शौकीनों को नया विकल्प मिलेगा। पर्यटन विभाग का मानना है कि बुनियादी ढांचा बेहतर होने के अलावा मां पूर्णागिरि धाम, मां बाराही धाम देवीधुरा जैसे आध्यात्मिक पर्यटन के साथ साहसिक पर्यटन से सैलानियों की आमद में भी तेजी आएगी। (संवाद)
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साहसिक पर्यटन को मिलेगा विस्तार
चंपावत। पैराग्लाइडिंग के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद जिले में साहसिक पर्यटन को विस्तार मिलेगा। अभी यहां मुख्य रूप से राफ्टिंग ही साहसिक पर्यटन का साधन था। पंचेश्वर, घाट और शारदा नदी राफ्टिंग के लिए बेहद मुफीद है। हर साल दो हजार से अधिक लोग राफ्टिंग का लुत्फ उठाते हैं। (संवाद)
कोट...
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद चंपावत जिले में भी भीमताल की तर्ज पर पैराग्लाइडिंग की व्यापारिक गतिविधियां हो सकेंगी। ऑनलाइन बुकिंग से न केवल पैराग्लाइडिंग लोकप्रिय होगी, बल्कि होम स्टे योजना को भी पंख लगेंगे।
- लता बिष्ट, जिला साहसिक पर्यटन अधिकारी, चंपावत।