{"_id":"115-44719","slug":"Champawat-44719-115","type":"story","status":"publish","title_hn":"कम बारिश के कारण गहराएगा पेयजल संकट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कम बारिश के कारण गहराएगा पेयजल संकट
Champawat
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
चंपावत। मानसून में चंपावत जिले में इस बार औसत से करीब 27 प्रतिशत कम बारिश का असर मार्च के बाद पेयजल स्रोतों पर दिखने लगेगा। कम बारिश के कारण प्राकृतिक स्रोत सही तरीके से रिचार्ज नहीं हो पाए हैं। ऐसे में जल संस्थान को अभी से यह चिंता सताने लगी है कि मार्च के बाद पेयजल का संकट गहरा सकता है। मौसम विभाग भी मानता है कि इस बार राज्य के कुछ हिस्सों विशेषकर कुमाऊं मंडल के पर्वतीय इलाकों में कम बारिश हुई। इससे जमीन में पर्याप्त नमी नहीं हो पाई और पानी के स्रोतों पर असर पड़ा है।
चंपावत नगर के लिए नौ प्राकृतिक स्रोतों का पानी एकत्र किया जाता है। इन स्रोतों की स्थिति बारिश पर निर्भर करती है। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार स्रोतों के रिचार्ज का स्तर इस बार कम रहा है। उनमें पानी की स्पीड अभी से घटने लगी है। यदि शीतकाल में अच्छी बारिश नहीं होती तो आने वाले महीनों में संकट गहरा सकता है। वैसे चंपावत में गर्मी के सीजन में मई और जून में अक्सर पेयजल का संकट गहरा जाता है। इस साल भी यह नौबत आई थी। जल संस्थान को व्यवस्था बनाने के लिए टैंकरों और वाहनों से पानी बांटना पड़ा था।
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती का कहना है कि इस बार प्राकृतिक स्रोत वास्तविक फ्लो में नहीं आ पाए हैं। अक्तूबर से बारिश पूरी तरह बंद है। चंपावत में मानसून में औसतन 1100 मिलीमीटर वर्षा होती है लेकिन इस बार यह मात्रा 800 मिलीमीटर के आसपास रही। वैसे मौसम विज्ञानी यह उम्मीद जताते हैं कि जाड़ों में कभी कभार अच्छी बारिश भी हो जाती है। यदि ऐसा नहीं होता तो फिर मार्च के बाद से ही नगर की सात हजार की आबादी को पानी का संकट झेलना पड़ सकता है। अधिशासी अभियंता का कहना है कि मौसम के प्रतिकूल रुख को देखते हुए वह अभी से कार्ययोजना बनाने में लग गए हैं।
विज्ञापन
चंपावत नगर के लिए नौ प्राकृतिक स्रोतों का पानी एकत्र किया जाता है। इन स्रोतों की स्थिति बारिश पर निर्भर करती है। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार स्रोतों के रिचार्ज का स्तर इस बार कम रहा है। उनमें पानी की स्पीड अभी से घटने लगी है। यदि शीतकाल में अच्छी बारिश नहीं होती तो आने वाले महीनों में संकट गहरा सकता है। वैसे चंपावत में गर्मी के सीजन में मई और जून में अक्सर पेयजल का संकट गहरा जाता है। इस साल भी यह नौबत आई थी। जल संस्थान को व्यवस्था बनाने के लिए टैंकरों और वाहनों से पानी बांटना पड़ा था।
विज्ञापन
जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती का कहना है कि इस बार प्राकृतिक स्रोत वास्तविक फ्लो में नहीं आ पाए हैं। अक्तूबर से बारिश पूरी तरह बंद है। चंपावत में मानसून में औसतन 1100 मिलीमीटर वर्षा होती है लेकिन इस बार यह मात्रा 800 मिलीमीटर के आसपास रही। वैसे मौसम विज्ञानी यह उम्मीद जताते हैं कि जाड़ों में कभी कभार अच्छी बारिश भी हो जाती है। यदि ऐसा नहीं होता तो फिर मार्च के बाद से ही नगर की सात हजार की आबादी को पानी का संकट झेलना पड़ सकता है। अधिशासी अभियंता का कहना है कि मौसम के प्रतिकूल रुख को देखते हुए वह अभी से कार्ययोजना बनाने में लग गए हैं।
विज्ञापन