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69 दिनों के कार्यकाल में प्रधान जी को कभी नहीं दिखे डॉक्टर साहब
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:12 PM IST
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चंपावत।
भिंगराड़ा के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की गैर हाजिरी मामले की जांच पूरी कर ली गई है। जांच अधिकारी पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा.आभाष सिंह ने जांच रिपोर्ट मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में ग्राम प्रधान धर्मानंद भट्ट की ओर से कहा गया कि अस्पताल के नजदीक रहने के बावजूद उन्होंने एक भी दिन डॉक्टर को नहीं देखा।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक डा.मसूद मोहम्मद ईसार हसनैन खान ने 1 मई से 8 जुलाई तक सेवा दी है। इस अवधि के कई कार्यदिवसों की उपस्थिति दर्ज है। उपस्थिति ओपीडी रजिस्टर को आधार बताते हुए कहा गया कि इस दौरान उन्होंने कुल 25 मरीजों का इलाज किया। भिंगराड़ा में रहते हुए डा.खान ने 7 जून से तीन दिन तक रीठा साहिब जोड़ मेले में ड्यूटी दी थी। जांच रिपोर्ट में भिंगराड़ा के ग्राम प्रधान के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने कभी भी भिंगराड़ा के डॉक्टर को भिंगराड़ा में नहीं देखा। बता दें कि भिंगराड़ा के ग्रामीणों ने अस्पताल से डॉक्टर के नदारद रहने की पिछले महीने शिकायत की थी। इसके खिलाफ मानवाधिकार आयोग जाने की भी धमकी दी थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने विभागीय जांच शुरू की।
ग्रामीणों का दावा है कि भिंगराड़ा अस्पताल इस साल एक भी दिन नहीं खुला। जो भी मरीज ओपीडी रजिस्टर में दर्ज हैं, वे फर्जी हैं। अस्पताल से 30 मीटर की दूरी पर रहने वाले ग्रामीणों ने दावा किया था कि उन्होंने कभी अस्पताल को खुला नहीं देखा। वहीं सीएमओ डा.एमएस बोहरा का कहना है कि जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
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रीठा साहिब और भिंगराड़ा में डॉक्टरों की तैनाती
रीठा साहिब/चंपावत। लधिया घाटी के सभी तीन अस्पताल अब तक डॉक्टरविहीन थे, लेकिन अब यहां के दो अस्पतालों में डॉक्टर भेज दिए गए हैं। पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा.आभाष सिंह ने बताया कि रीठा साहिब और भिंगराड़ा में डॉक्टरों की तैनाती की गई है। रीठा साहिब में डा.सोनू उपाध्याय और भिंगराड़ा में डा.यश ने शुक्रवार को चार्ज लिया। ये अस्पताल काफी वक्त से डॉक्टरविहीन थे। इस कारण लोगों को इलाज के लिए लोहाघाट या चंपावत की दौड़ लगानी पड़ रही थी।
भिंगराड़ा के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की गैर हाजिरी मामले की जांच पूरी कर ली गई है। जांच अधिकारी पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा.आभाष सिंह ने जांच रिपोर्ट मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में ग्राम प्रधान धर्मानंद भट्ट की ओर से कहा गया कि अस्पताल के नजदीक रहने के बावजूद उन्होंने एक भी दिन डॉक्टर को नहीं देखा।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक डा.मसूद मोहम्मद ईसार हसनैन खान ने 1 मई से 8 जुलाई तक सेवा दी है। इस अवधि के कई कार्यदिवसों की उपस्थिति दर्ज है। उपस्थिति ओपीडी रजिस्टर को आधार बताते हुए कहा गया कि इस दौरान उन्होंने कुल 25 मरीजों का इलाज किया। भिंगराड़ा में रहते हुए डा.खान ने 7 जून से तीन दिन तक रीठा साहिब जोड़ मेले में ड्यूटी दी थी। जांच रिपोर्ट में भिंगराड़ा के ग्राम प्रधान के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने कभी भी भिंगराड़ा के डॉक्टर को भिंगराड़ा में नहीं देखा। बता दें कि भिंगराड़ा के ग्रामीणों ने अस्पताल से डॉक्टर के नदारद रहने की पिछले महीने शिकायत की थी। इसके खिलाफ मानवाधिकार आयोग जाने की भी धमकी दी थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने विभागीय जांच शुरू की।
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ग्रामीणों का दावा है कि भिंगराड़ा अस्पताल इस साल एक भी दिन नहीं खुला। जो भी मरीज ओपीडी रजिस्टर में दर्ज हैं, वे फर्जी हैं। अस्पताल से 30 मीटर की दूरी पर रहने वाले ग्रामीणों ने दावा किया था कि उन्होंने कभी अस्पताल को खुला नहीं देखा। वहीं सीएमओ डा.एमएस बोहरा का कहना है कि जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
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रीठा साहिब और भिंगराड़ा में डॉक्टरों की तैनाती
रीठा साहिब/चंपावत। लधिया घाटी के सभी तीन अस्पताल अब तक डॉक्टरविहीन थे, लेकिन अब यहां के दो अस्पतालों में डॉक्टर भेज दिए गए हैं। पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा.आभाष सिंह ने बताया कि रीठा साहिब और भिंगराड़ा में डॉक्टरों की तैनाती की गई है। रीठा साहिब में डा.सोनू उपाध्याय और भिंगराड़ा में डा.यश ने शुक्रवार को चार्ज लिया। ये अस्पताल काफी वक्त से डॉक्टरविहीन थे। इस कारण लोगों को इलाज के लिए लोहाघाट या चंपावत की दौड़ लगानी पड़ रही थी।