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Champawat News: इंटर की पढ़ाई के लिए आठ किमी की दौड़
Wed, 20 Mar 2024 10:12 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 20 Mar 2024 10:12 PM IST
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चंपावत। जिला मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर स्थित ग्राम पंचायत भंडार बोरा रौकुंवर गांव सड़क सुविधा से वंचित है। लोग आज भी करीब छह किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचते हैं। सड़क नहीं होने से गांव के बच्चों की पढ़ाई भी आसान नहीं है।
सड़क विहीन गांव के बच्चों को इंटर की पढ़ाई के लिए आठ किमी दूर दिगालीचौड़ राजकीय इंटर कॉलेज जाना पड़ता है। जंगल के बीच होते हुए बदहाल रास्ते से होते हुए बच्चे हर रोज 16 किमी दूर घंटों की थकान भरी यात्रा के बाद घर पहुंचते हैं। स्कूल से आने तक परिवार के लोगों को बच्चों की चिंता रहती है। यह बच्चे आने-जाने में ही इतना थक जाते हैं कि घर आकर पढ़ाई करना भी इनके लिए आसान नहीं होता है। वहीं किसी के बीमार होने पर उसे अस्पताल ले जाने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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सड़क नहीं होने से काफी मुश्किल होती है। जब यातायात की व्यवस्था ही नहीं होगी तो अन्य मूलभूत सुविधाओं के बारे में सोचना भी एक सपने जैसा ही है। - चंचल, स्थानीय, भंडारबोरा।
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गांव तक सड़क होती तो बच्चों को आठ किमी पैदल नहीं चलना पड़जा। खतरों के बीच उन्हें जंगल होते हुए समूहों में जाना पड़ता है। कॉलेज की पढ़ाई तो दूर की बात है। - मनोज सिंह, स्थानीय।
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सड़क विहीन गांव के बच्चों को इंटर की पढ़ाई के लिए आठ किमी दूर दिगालीचौड़ राजकीय इंटर कॉलेज जाना पड़ता है। जंगल के बीच होते हुए बदहाल रास्ते से होते हुए बच्चे हर रोज 16 किमी दूर घंटों की थकान भरी यात्रा के बाद घर पहुंचते हैं। स्कूल से आने तक परिवार के लोगों को बच्चों की चिंता रहती है। यह बच्चे आने-जाने में ही इतना थक जाते हैं कि घर आकर पढ़ाई करना भी इनके लिए आसान नहीं होता है। वहीं किसी के बीमार होने पर उसे अस्पताल ले जाने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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सड़क नहीं होने से काफी मुश्किल होती है। जब यातायात की व्यवस्था ही नहीं होगी तो अन्य मूलभूत सुविधाओं के बारे में सोचना भी एक सपने जैसा ही है। - चंचल, स्थानीय, भंडारबोरा।
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गांव तक सड़क होती तो बच्चों को आठ किमी पैदल नहीं चलना पड़जा। खतरों के बीच उन्हें जंगल होते हुए समूहों में जाना पड़ता है। कॉलेज की पढ़ाई तो दूर की बात है। - मनोज सिंह, स्थानीय।