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वन भूमि में फेंका जा रहा पालीथीन कूड़ा
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:55 AM IST
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बनबसा (चंपावत)।
वन भूमि पर किसी भी प्रकार का कूड़ा जमा करना वन अधिनियमों के विरुद्ध है, लेकिन बनबसा नगर का पॉलिथीन मिश्रित कूड़ा यूपी के अधिकार वाली आरक्षित वन भूमि पर फेंका जा रहा है। इससे वातावरण दूषित हो रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान की अनदेखी के साथ ही बनबसा में नियमों की भी अवहेलना की जा रही है। नगर पंचायत कर्मी नियमों को ताख पर रखकर नगर क्षेत्र का पॉलिथीन मिश्रित कूड़ा आरक्षित वन क्षेत्र में फेंक रहे हैं। इससे वन संपदा और वन्य जीवों को नुकसान पहुंचना तय है। वन क्षेत्र में एकत्र कूड़े के ढेर में बंदर भी खाने की सामग्री तलाशते रहते हैं। यह आरक्षित वन क्षेत्र बनबसा से नेपाल जाने वाले मार्ग के दक्षिणी छोर पर दो सौ मीटर की दूरी पर स्थित है। बावजूद इसके इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया है। नगर पंचायत के गठन को ढाई वर्ष का समय हो चुका है, लेकिन अब तक नगर में कूड़ाघर का निर्माण नहीं किया जा सका। एसडीएम एके चन्याल ने बताया कि जल्द ही भूमि का चयन कर नगर पंचायत का कूड़ाघर बनाया जाएगा। वन दरोगा कमालुद्दीन खान ने वन भूमि पर कूड़ा जमा किए जाने को वन अधिनियम के विरुद्ध बताया। कहा कि इस संबंध में नगर पंचायत और वन विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
वन भूमि पर किसी भी प्रकार का कूड़ा जमा करना वन अधिनियमों के विरुद्ध है, लेकिन बनबसा नगर का पॉलिथीन मिश्रित कूड़ा यूपी के अधिकार वाली आरक्षित वन भूमि पर फेंका जा रहा है। इससे वातावरण दूषित हो रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान की अनदेखी के साथ ही बनबसा में नियमों की भी अवहेलना की जा रही है। नगर पंचायत कर्मी नियमों को ताख पर रखकर नगर क्षेत्र का पॉलिथीन मिश्रित कूड़ा आरक्षित वन क्षेत्र में फेंक रहे हैं। इससे वन संपदा और वन्य जीवों को नुकसान पहुंचना तय है। वन क्षेत्र में एकत्र कूड़े के ढेर में बंदर भी खाने की सामग्री तलाशते रहते हैं। यह आरक्षित वन क्षेत्र बनबसा से नेपाल जाने वाले मार्ग के दक्षिणी छोर पर दो सौ मीटर की दूरी पर स्थित है। बावजूद इसके इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया है। नगर पंचायत के गठन को ढाई वर्ष का समय हो चुका है, लेकिन अब तक नगर में कूड़ाघर का निर्माण नहीं किया जा सका। एसडीएम एके चन्याल ने बताया कि जल्द ही भूमि का चयन कर नगर पंचायत का कूड़ाघर बनाया जाएगा। वन दरोगा कमालुद्दीन खान ने वन भूमि पर कूड़ा जमा किए जाने को वन अधिनियम के विरुद्ध बताया। कहा कि इस संबंध में नगर पंचायत और वन विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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