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पहाड़ी काटते वक्त पहाड दरकता तो हो सकता था बड़ा हादसा
Updated Wed, 03 Jan 2018 11:13 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)।
टनकपुर-जौलजीबी मार्ग पर पहाड़ी दरकने से सुपरवाइजर एवं श्रमिक की मौत की घटना ने कार्यदायी ठेकेदार कंपनी और विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। गनीमत रही कि हादसा पहाड़ काटते वक्त नहीं हुआ, वर्ना इससे भी बड़ा हादसा हो सकता था। पहाड़ काटकर सड़क निर्माण के जोखिम भरे कार्य में श्रमिकों की सुरक्षा को भी सवाल उठ रहे हैं। बहरहाल पुलिस ने निर्माण में सुरक्षा इंतजाम समेत हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। कोतवाल ने बताया कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद से श्रमिकों में दहशत बनी है।
बताया जाता है कि बुधवार को टनकपुर-जौलजीबी मार्ग निर्माण कार्य के तहत मां पूर्णागिरि धाम के चरण मंदिर के पास अंग्रेज नामक पहाड़ी को काटने में सुबह से ही काफी संख्या में श्रमिक लगे थे। दोपहर होते-होते भोजन अवकाश के लिए काम बंद कर श्रमिकों को जाना शुरू हुआ। ज्यादातर श्रमिक भोजन के लिए जा चुके थे। करीब आधा दर्जन श्रमिक ही घटना स्थल मौजूद थे। माना जा रहा है कि दरकी पहाड़ी पहले से ही धंस रही थी और नीचे काम कर रहे श्रमिकों को इसका आभास तक नहीं हुआ। अचानक गिरे मलबे से श्रमिक अपना बचाव भी नहीं कर पाए। हादसे में सुपरवाइजर भवानी दत्त भट्ट और श्रमिक राजेश मलबे के नीचे दब गए। प्रत्यक्षदर्शी श्रमिकों के मुताबिक हादसा होते ही घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। श्रमिकों को बचाने तक का मौका नहीं मिला। जैसे-तैसे घायलों को सुरक्षित निकाल कर अस्पताल भिजवाया गया।
कोतवाल अरुण कुमार वर्मा का कहना है कि श्रमिक पहाड़ी काटने को ड्रिल मशीन से छेद कर रहे थे। संभवत: ड्रिल मशीन के कंपन से ही पहाड़ी दरकी है। अगर यह हादसा काम करते वक्त होता तो इससे भी बड़ा हादसा होता। उन्होंने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। बहरहाल सड़क कटिंग के दौरान सुरक्षा के बेहतर इंतजाम न किए गए तो ऐसे हादसे और होने की आशंका बनी हुई है।
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अंग्रेज पहाड़ी को काटना बना हुआ है चुनौती
निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी मार्ग पर अंग्रेज पहाड़ी को काटना सबसे बड़ी चुनौती है। इस पहाड़ी के आर-पार तो पहाड़ों को काटकर चूका तक 18 किमी सड़क का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन अंग्रेज पहाड़ी अवरोध बनी हुई है। बताया जाता है कि अंग्रेज पहाड़ी की चट्टान इतनी सख्त है कि ठेकेदार कंपनी को उसे काटने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। कटिंग के दौरान कंपनी से पहाड़ी दरक रही है। पीआईयू के जेई विजेंद्र सिंह पोखरिया ने बताया कि चुनौती बनी अंग्रेज पहाड़ी की कटिंग के बाद टनकपुर से चूका तक 30 किमी सड़क वाहनों के लिए खुल जाएगी।
टनकपुर-जौलजीबी मार्ग पर पहाड़ी दरकने से सुपरवाइजर एवं श्रमिक की मौत की घटना ने कार्यदायी ठेकेदार कंपनी और विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। गनीमत रही कि हादसा पहाड़ काटते वक्त नहीं हुआ, वर्ना इससे भी बड़ा हादसा हो सकता था। पहाड़ काटकर सड़क निर्माण के जोखिम भरे कार्य में श्रमिकों की सुरक्षा को भी सवाल उठ रहे हैं। बहरहाल पुलिस ने निर्माण में सुरक्षा इंतजाम समेत हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। कोतवाल ने बताया कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद से श्रमिकों में दहशत बनी है।
बताया जाता है कि बुधवार को टनकपुर-जौलजीबी मार्ग निर्माण कार्य के तहत मां पूर्णागिरि धाम के चरण मंदिर के पास अंग्रेज नामक पहाड़ी को काटने में सुबह से ही काफी संख्या में श्रमिक लगे थे। दोपहर होते-होते भोजन अवकाश के लिए काम बंद कर श्रमिकों को जाना शुरू हुआ। ज्यादातर श्रमिक भोजन के लिए जा चुके थे। करीब आधा दर्जन श्रमिक ही घटना स्थल मौजूद थे। माना जा रहा है कि दरकी पहाड़ी पहले से ही धंस रही थी और नीचे काम कर रहे श्रमिकों को इसका आभास तक नहीं हुआ। अचानक गिरे मलबे से श्रमिक अपना बचाव भी नहीं कर पाए। हादसे में सुपरवाइजर भवानी दत्त भट्ट और श्रमिक राजेश मलबे के नीचे दब गए। प्रत्यक्षदर्शी श्रमिकों के मुताबिक हादसा होते ही घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। श्रमिकों को बचाने तक का मौका नहीं मिला। जैसे-तैसे घायलों को सुरक्षित निकाल कर अस्पताल भिजवाया गया।
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कोतवाल अरुण कुमार वर्मा का कहना है कि श्रमिक पहाड़ी काटने को ड्रिल मशीन से छेद कर रहे थे। संभवत: ड्रिल मशीन के कंपन से ही पहाड़ी दरकी है। अगर यह हादसा काम करते वक्त होता तो इससे भी बड़ा हादसा होता। उन्होंने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। बहरहाल सड़क कटिंग के दौरान सुरक्षा के बेहतर इंतजाम न किए गए तो ऐसे हादसे और होने की आशंका बनी हुई है।
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अंग्रेज पहाड़ी को काटना बना हुआ है चुनौती
निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी मार्ग पर अंग्रेज पहाड़ी को काटना सबसे बड़ी चुनौती है। इस पहाड़ी के आर-पार तो पहाड़ों को काटकर चूका तक 18 किमी सड़क का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन अंग्रेज पहाड़ी अवरोध बनी हुई है। बताया जाता है कि अंग्रेज पहाड़ी की चट्टान इतनी सख्त है कि ठेकेदार कंपनी को उसे काटने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। कटिंग के दौरान कंपनी से पहाड़ी दरक रही है। पीआईयू के जेई विजेंद्र सिंह पोखरिया ने बताया कि चुनौती बनी अंग्रेज पहाड़ी की कटिंग के बाद टनकपुर से चूका तक 30 किमी सड़क वाहनों के लिए खुल जाएगी।