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आयोडीन अल्पता जनित रोग जांच की सुविधा को तरस रहा पहाड़
Updated Sat, 21 Oct 2017 10:03 PM IST
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चंपावत। नमक खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता बल्कि सेहत के लिए भी जरूरी है। यही नमक आयोडीनरहित होने पर नुकसान भी पहुंचाता है। जिले में आयोडीन को लेकर गांवों में अब भी सजगता की कमी है। आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों से बचने के लिए बेसिक जांच की सुविधा भी नहीं है। कितने लोग इससे प्रभावित है, इसकी सही जानकारी नहीं है। अलबत्ता विभाग का कहना है कि जिले में कहीं से भी किसी घेंघा पीड़ित के होने की सूचना नहीं है।
आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों की जांच की यहां कोई सुविधा नहीं है। जांच की सुविधा चंपावत ही नहीं, प्रदेश के किसी भी जिले में नहीं है। सिर्फ मेडिकल कालेजों में ही यह सुविधा है। विभाग के पास आयोडीन से होने वाले रोगों के आंकड़े तो उपलब्ध नहीं है। लेकिन सर्वे के मुताबिक चंपावत जिला आयोडीन न्यूनता से ग्रस्त है। इसी कारण घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम को यहां संचालित किया गया है। वैसे एक व्यक्ति को रोजाना 3 पीपीएम (पाटर्स पर मिलियन) आयोडीन की जरूरत होती है। पर अब भी गांवों में बहुतायत में लोग आयोडीन रहित नमक का सेवन करते हैं।
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जागरूकता पर जोर दे रहा है विभाग : सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डा.एमएस बोहरा का कहना है कि आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों से बचाव के लिए विभाग इससे होने वाले रोगों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहा है। सभी एएनएमों को आयोडीन टेस्टिंग किट दिए गए हैं। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी इससे होने वाले खतरों के प्रति लोगों को सजग कर रही हैं।
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रोगों की जड़ है आयोडीन की न्यूनता
भोजन में आयोडीन की कमी से थॉयराइड ग्रंथि बढ़ने के अलावा मानसिक विकार, बौनापन, मूक, बहरापन आदि का खतरा भी बढ़ता है। इस रोग से गर्भावस्था के दौरान गर्भपात और नवजात शिशु की मौत का अंदेशा भी बना रहता है। आयोडीनयुक्त नमक के अलावा लहसुन, पत्ता गोभी आदि से भी आयोडीन मिलता है।