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पंचेश्वर बांध परियोजना से 31 हजार परिवार प्रभावित होंगे
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Thu, 20 Jul 2017 10:40 PM IST
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पंचेश्वर बांध निर्माण के बाद डूब क्षेत्र में आएगी लाखों करोंड़ों रुपये की संपत्तियां।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में पांच नदियों काली, सरयू, रामगंगा, धौली और गोरी नदी के संगम पंचेश्वर में एशिया की सबसे बड़ी बांध परियोजना के निर्माण की कवायद तेज हो गई है। कार्यदायी संस्था वाप्कोस की ओर से मुख्य बांध और अतिरिक्त बांध निर्माण के लिए टनल बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। करीब 9389.48 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित बहुउद्देशीय पंचेश्वर बांध परियोजना के मूर्त रूप में आने पर भारत के तीन जिलों के 31 हजार से अधिक परिवार प्रभावित होंगे।
वाप्कोस कंपनी के प्रभारी सहायक अभियंता राहुल गौतम के अनुसार प्रस्तावित बांध निर्माण के डूब क्षेत्र में भारत का करीब 76 वर्ग किलोमीटर का भूभाग प्रभावित होगा। भले ही बांध निर्माण की डीपीआर तैयार करने वाली वाप्कोस कंपनी की ओर से विस्थापन और पुनर्वास को लेकर अनुमानित बजट का आगणन प्रस्तुत कर दिया हो, लेकिन कंपनी की ओर से अभी तक बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश नहीं की जा सकी है। वाप्कोस कंपनी की ओर से तैयार की गई डीपीआर का सबसे अहम हिस्सा पंचेश्वर बांध में आने वाले डूब क्षेत्र तथा वहां होने वाले नुकसान, विस्थापन और पुनर्वास जैसे मसलों का है, जिसे राज्य सरकार ने सुलझाना है। दूसरी ओर डीएम डॉ.अहमद इकबाल का कहना है कि पंचेश्वर बांध के संबंध में जन सुनवाई को लेकर सरकार की ओर से मिले निर्देशों का पालन किया जा रहा है। डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों और गांवों आदि के सर्वे के लिए अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर दी गई है।
बाराकोट विकासखंड में जन सुनवाई नौ को होगी
चंपावत। पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर जिले के बाराकोट विकासखंड सभागार में नौ अगस्त को जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रशासनिक अधिकारियों, वाप्कोस के इंजीनियरों तथा डैम प्राधिकरण के अधिकारियों के अलावा ग्रामीणों की प्रतिभागिता रहेगी। जन सुनवाई में डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के ग्रामीणों की शिकायतों और शंकाओं का समाधान किया जाएगा।
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पंचेश्वर मंदिर से 250 मीटर ऊंचाई तक होगा डूब क्षेत्र
चंपावत। वाप्कोस कंपनी के अभियंताओं के अनुसार प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की ऊंचाई पंचेश्वर मंदिर से 250.5 मीटर तथा घाट के रामेश्वर मंदिर से 132 मीटर होगी। डीएम डॉ.अहमद इकबाल के अनुसार बांध के प्रभावित क्षेत्र के गांवों की समस्त औपचारिकताएं और कार्यों को पूर्ण करने के लिए 31 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक सप्ताह प्रगति की समीक्षा की जा रही है।
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वाप्कोस कंपनी के प्रभारी सहायक अभियंता राहुल गौतम के अनुसार प्रस्तावित बांध निर्माण के डूब क्षेत्र में भारत का करीब 76 वर्ग किलोमीटर का भूभाग प्रभावित होगा। भले ही बांध निर्माण की डीपीआर तैयार करने वाली वाप्कोस कंपनी की ओर से विस्थापन और पुनर्वास को लेकर अनुमानित बजट का आगणन प्रस्तुत कर दिया हो, लेकिन कंपनी की ओर से अभी तक बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश नहीं की जा सकी है। वाप्कोस कंपनी की ओर से तैयार की गई डीपीआर का सबसे अहम हिस्सा पंचेश्वर बांध में आने वाले डूब क्षेत्र तथा वहां होने वाले नुकसान, विस्थापन और पुनर्वास जैसे मसलों का है, जिसे राज्य सरकार ने सुलझाना है। दूसरी ओर डीएम डॉ.अहमद इकबाल का कहना है कि पंचेश्वर बांध के संबंध में जन सुनवाई को लेकर सरकार की ओर से मिले निर्देशों का पालन किया जा रहा है। डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों और गांवों आदि के सर्वे के लिए अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर दी गई है।
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बाराकोट विकासखंड में जन सुनवाई नौ को होगी
चंपावत। पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर जिले के बाराकोट विकासखंड सभागार में नौ अगस्त को जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रशासनिक अधिकारियों, वाप्कोस के इंजीनियरों तथा डैम प्राधिकरण के अधिकारियों के अलावा ग्रामीणों की प्रतिभागिता रहेगी। जन सुनवाई में डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के ग्रामीणों की शिकायतों और शंकाओं का समाधान किया जाएगा।
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पंचेश्वर मंदिर से 250 मीटर ऊंचाई तक होगा डूब क्षेत्र
चंपावत। वाप्कोस कंपनी के अभियंताओं के अनुसार प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की ऊंचाई पंचेश्वर मंदिर से 250.5 मीटर तथा घाट के रामेश्वर मंदिर से 132 मीटर होगी। डीएम डॉ.अहमद इकबाल के अनुसार बांध के प्रभावित क्षेत्र के गांवों की समस्त औपचारिकताएं और कार्यों को पूर्ण करने के लिए 31 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक सप्ताह प्रगति की समीक्षा की जा रही है।