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तेजपात का तेल निकाले जाने की कवायद को झटका
Updated Sun, 07 Oct 2018 09:53 PM IST
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चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। जिले में तेजपात के तेल निकाले जाने की पहल को तगड़ा झटका लगा है। इससे संबंधित लगने वाली मशीन खटाई में पड़ गई है। पिछले वित्त वर्ष में स्वीकृत इस मशीन के बजाय अब तेजपात ग्राइंडर (पीसने वाली) मशीन लगाई जाएगी। विभाग प्रस्ताव में बदलाव के लिए जिले के प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय का अनुमोदन लेगा।
जिले में तेजपात की भरपूर खेती होती है। पिछले ही वर्ष हुई जड़ीबूटियों की कुल 2664 क्विंटल की निकासी में से 1354 क्विंटल निकासी अकेले तेजपात की थी। तेजपात के मूल्य संवर्द्धन के लिए पिछले साल तेजपात के तेल को निकालने के लिए मशीन लगाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए जिला योजना से 6.50 लाख रुपये मंजूर भी हुआ था। मगर तेजपात की बिक्री की अपेक्षा तेल से कम दाम मिलने के चलते अब इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया। विभाग ने अब इसके बजाय तेजपात को पीसने वाली मशीन लगाने का निर्णय लिया गया है।
काश्तकारों के हितों के मद्देनजर तेजपात के तेल निकालने वाली मशीन के बजाय ग्राइंडर मशीन का प्रस्ताव किया गया। प्रस्ताव में संशोधन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के बाद ग्राइंडर मशीन लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस मशीन में तेजपात के अलावा अन्य संगंधीय पादपों को भी पीसा जा सकेगा।
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राकेश वर्मा, जिला समन्वयक, जड़ीबूटी भेषज संघ।
दमा रोग के लिए फायदेमंद है तेजपात
तेजपात का सबसे अधिक उपयोग मशालों में होता है, लेकिन इसके ढेरों औषधीय गुण भी हैं। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ.मोहम्मद शाहिद का कहना है कि तेजपात के चूर्ण की चाय बहती नाक के साथ ही सर्दी-जुकाम का कारगर उपाय है। इसे पीसकर आंख में लगाने से धुंधलेपन से निजात मिलती है। तेजपात के पत्तों के पाउडर के उपयोग से दांतों में चमक आती है। दमा और सांस रोग में भी तेजपात कारगर औषधि है।
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चंपावत। जिले में तेजपात के तेल निकाले जाने की पहल को तगड़ा झटका लगा है। इससे संबंधित लगने वाली मशीन खटाई में पड़ गई है। पिछले वित्त वर्ष में स्वीकृत इस मशीन के बजाय अब तेजपात ग्राइंडर (पीसने वाली) मशीन लगाई जाएगी। विभाग प्रस्ताव में बदलाव के लिए जिले के प्रभारी मंत्री अरविंद पांडेय का अनुमोदन लेगा।
जिले में तेजपात की भरपूर खेती होती है। पिछले ही वर्ष हुई जड़ीबूटियों की कुल 2664 क्विंटल की निकासी में से 1354 क्विंटल निकासी अकेले तेजपात की थी। तेजपात के मूल्य संवर्द्धन के लिए पिछले साल तेजपात के तेल को निकालने के लिए मशीन लगाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए जिला योजना से 6.50 लाख रुपये मंजूर भी हुआ था। मगर तेजपात की बिक्री की अपेक्षा तेल से कम दाम मिलने के चलते अब इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया। विभाग ने अब इसके बजाय तेजपात को पीसने वाली मशीन लगाने का निर्णय लिया गया है।
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काश्तकारों के हितों के मद्देनजर तेजपात के तेल निकालने वाली मशीन के बजाय ग्राइंडर मशीन का प्रस्ताव किया गया। प्रस्ताव में संशोधन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के बाद ग्राइंडर मशीन लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस मशीन में तेजपात के अलावा अन्य संगंधीय पादपों को भी पीसा जा सकेगा।
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राकेश वर्मा, जिला समन्वयक, जड़ीबूटी भेषज संघ।
दमा रोग के लिए फायदेमंद है तेजपात
तेजपात का सबसे अधिक उपयोग मशालों में होता है, लेकिन इसके ढेरों औषधीय गुण भी हैं। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ.मोहम्मद शाहिद का कहना है कि तेजपात के चूर्ण की चाय बहती नाक के साथ ही सर्दी-जुकाम का कारगर उपाय है। इसे पीसकर आंख में लगाने से धुंधलेपन से निजात मिलती है। तेजपात के पत्तों के पाउडर के उपयोग से दांतों में चमक आती है। दमा और सांस रोग में भी तेजपात कारगर औषधि है।