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घबराए नहीं, जिले में बंद नहीं होगा कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
Updated Sun, 01 Apr 2018 10:49 PM IST
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चंपावत। राज्य के शहरी क्षेत्रों के 39 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के बंद होने की खबर से यहां रविवार को बैचेनी थी। मगर घबराइये नहीं, चंपावत जिले का एक भी पीएचसी बंद नहीं होगा। यहां के पीएचसी इस दायरे में नहीं आते हैं और सोमवार से ये केंद्र बाकायदा मरीजों का पूर्व की तरह इलाज करेंगे।
चंपावत जिले के 23 अस्पतालों में पीएचसी की तादात महज दो (पाटी और बाराकोट) है। पाटी के पीएचसी को एक पखवाड़े पूर्व केंद्र की कायाकल्प योजना के तहत जिले का सर्वश्रेष्ठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का पुरस्कार मिला था। ये दोनों अस्पताल 35 हजार से अधिक की आबादी को स्वास्थ्य सेवा मुहैय्या कराते हैं। इसके अलावा ये दोनों पीएचसी ग्रामीण क्षेत्रों में है। इनका ज्यादातर वित्त पोषण राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। एनएचएम द्वारा मामूली धन ही मिलता है। इन दो पीएचसी के अलावा तीन एपीएचसी हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा का कहना है कि एनएचएम का बजट नहीं मिलने से जिले के पीएचसी में कोई असर नहीं पड़ेगा। ये पूर्व की तरह काम करते रहेंगे।
कोट
अभी इस संबंध में कोई पत्र नहीं मिला है, मगर चंपावत जिला इस दायरे में नहीं आता है। यहां के दोनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 40 हजार से अधिक आबादी में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवा में इन केंद्रों की अच्छी खासी भूमिका है।
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डॉ. रश्मि पंत नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चंपावत।
चंपावत जिले के 23 अस्पतालों में पीएचसी की तादात महज दो (पाटी और बाराकोट) है। पाटी के पीएचसी को एक पखवाड़े पूर्व केंद्र की कायाकल्प योजना के तहत जिले का सर्वश्रेष्ठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का पुरस्कार मिला था। ये दोनों अस्पताल 35 हजार से अधिक की आबादी को स्वास्थ्य सेवा मुहैय्या कराते हैं। इसके अलावा ये दोनों पीएचसी ग्रामीण क्षेत्रों में है। इनका ज्यादातर वित्त पोषण राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। एनएचएम द्वारा मामूली धन ही मिलता है। इन दो पीएचसी के अलावा तीन एपीएचसी हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा का कहना है कि एनएचएम का बजट नहीं मिलने से जिले के पीएचसी में कोई असर नहीं पड़ेगा। ये पूर्व की तरह काम करते रहेंगे।
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अभी इस संबंध में कोई पत्र नहीं मिला है, मगर चंपावत जिला इस दायरे में नहीं आता है। यहां के दोनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 40 हजार से अधिक आबादी में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवा में इन केंद्रों की अच्छी खासी भूमिका है।
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डॉ. रश्मि पंत नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चंपावत।