{"_id":"59b574c74f1c1bf07f8b5bf6","slug":"21505064135-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंपावत में हृदय रोग की दस्तक बढ़ी, उपचार की कोई व्यवस्था नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंपावत में हृदय रोग की दस्तक बढ़ी, उपचार की कोई व्यवस्था नहीं
Updated Sun, 10 Sep 2017 10:56 PM IST
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चंपावत। सेहतमंद आबोहवा वाले पहाड़ के लिए ये बड़े खतरे की आहट है। चंपावत में हृदय रोग की दस्तक तेजी से बढ़ रही है। 28 अगस्त से 8 सितंबर तक के सिर्फ 12 दिनों में ही 50 वर्ष से कम उम्र के 5 लोगों की हृदय गति रुकने से मौत हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक जिले के पहाड़ी क्षेत्र में करीब 33 लोगों की मौत इस वजह से हो चुकी है। लेकिन हृदय रोग का जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं है। जिले में कॉर्डियोलॉजिस्ट तो छोड़िए, एक भी फिजीशियन नहीं है।
जिला अस्पताल सहित चंपावत जिले में 22 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कहीं भी हृदय रोग के इलाज की व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में गैर संक्रामक रोग निवारण और नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीडीसीपी) शुरू होने के बावजूद स्टाफ की कमी से हालात में खास सुधार नहीं हो पाया है। इस कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष से अधिक लोगों के हाइपरटेंशन, डायबिटीज, कैंसर, हृदय रोग की संभावना का पता लगा परामर्श देना है।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी का कहना है कि जिला अस्पताल में ईसीजी मशीन व इको कॉर्डियोग्राफी मशीन तो है, लेकिन इनके संचालन के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। न कॉर्डियोलॉजिस्ट हैं और नहीं फिजीशियन। सीएमएस का कहना है कि इमरजेंसी में किसी वरिष्ठ डॉक्टर द्वारा ईसीजी कराया जाता है। ऐसे ही हाल लोहाघाट, टनकपुर सहित जिले के अन्य अस्पतालों के भी हैं। हृदय रोग के उपचार के लिए लोग अमूमन हल्द्वानी, बरेली दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे हैं। कई बार देरी मौत की वजह बन रही है।
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संतुलित जीवन शैली से करें बचाव: डॉ.जोशी
सीएमएस डॉ.आरके जोशी का कहना है कि संतुलित जीवन शैली, सेहतमंद खानपान के साथ ही हर तीन महीने में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने से हृदय रोग के लक्षणों का शुरुआती पता लगाया जा सकता है। मानसिक तनाव से रक्त में खराब किस्म की वसा बढ़ती है। जिससे रक्त की नलियों में संकुचन पैदा होता है। बैठे रहने के काम से शरीर में चर्बी व रक्तचाप बढ़ता है। इससे हृदय रोग के खतरे बढ़ जाते हैं। मधुमेह व उच्च रक्तचाप पीड़ित लोगों को उचित इलाज नहीं करने पर इसके खतरे अधिक होते हैं। कोलस्ट्रोल को नियंत्रित करें।
हृदय रोग के शुरुआती लक्षण......
छाती में बायीं और तेज दर्द व इस दर्द का बांह तक पहुंचना।
सांस लेने में तकलीफ, थोड़े से श्रम से सांस फूलना।
दिल की धड़कनों का तेज होना।
सिर में लगातार दर्द बना रहना।
अधिक पसीना आना।
बिना कारण थकान महसूस करना।
बचाव के लिए ये कदम उठाएं...........
सुबह की खुली हवा में नियमित रूप से कम से कम तीन किमी घूमें। योगासन व प्राणायाम करें।
चिंता, क्रोध, मानसिक तनाव व डर को दूर करने का प्रयास करें।
नकारात्मक भावनाओं को सकारात्मक विचारों में बदलें।
धूम्रपान से परहेज करें, आलस छोड़े।
मोटापा और वजन को बढ़ने से रोके।
जिला अस्पताल सहित चंपावत जिले में 22 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कहीं भी हृदय रोग के इलाज की व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में गैर संक्रामक रोग निवारण और नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीडीसीपी) शुरू होने के बावजूद स्टाफ की कमी से हालात में खास सुधार नहीं हो पाया है। इस कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष से अधिक लोगों के हाइपरटेंशन, डायबिटीज, कैंसर, हृदय रोग की संभावना का पता लगा परामर्श देना है।
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जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी का कहना है कि जिला अस्पताल में ईसीजी मशीन व इको कॉर्डियोग्राफी मशीन तो है, लेकिन इनके संचालन के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। न कॉर्डियोलॉजिस्ट हैं और नहीं फिजीशियन। सीएमएस का कहना है कि इमरजेंसी में किसी वरिष्ठ डॉक्टर द्वारा ईसीजी कराया जाता है। ऐसे ही हाल लोहाघाट, टनकपुर सहित जिले के अन्य अस्पतालों के भी हैं। हृदय रोग के उपचार के लिए लोग अमूमन हल्द्वानी, बरेली दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे हैं। कई बार देरी मौत की वजह बन रही है।
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संतुलित जीवन शैली से करें बचाव: डॉ.जोशी
सीएमएस डॉ.आरके जोशी का कहना है कि संतुलित जीवन शैली, सेहतमंद खानपान के साथ ही हर तीन महीने में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने से हृदय रोग के लक्षणों का शुरुआती पता लगाया जा सकता है। मानसिक तनाव से रक्त में खराब किस्म की वसा बढ़ती है। जिससे रक्त की नलियों में संकुचन पैदा होता है। बैठे रहने के काम से शरीर में चर्बी व रक्तचाप बढ़ता है। इससे हृदय रोग के खतरे बढ़ जाते हैं। मधुमेह व उच्च रक्तचाप पीड़ित लोगों को उचित इलाज नहीं करने पर इसके खतरे अधिक होते हैं। कोलस्ट्रोल को नियंत्रित करें।
हृदय रोग के शुरुआती लक्षण......
छाती में बायीं और तेज दर्द व इस दर्द का बांह तक पहुंचना।
सांस लेने में तकलीफ, थोड़े से श्रम से सांस फूलना।
दिल की धड़कनों का तेज होना।
सिर में लगातार दर्द बना रहना।
अधिक पसीना आना।
बिना कारण थकान महसूस करना।
बचाव के लिए ये कदम उठाएं...........
सुबह की खुली हवा में नियमित रूप से कम से कम तीन किमी घूमें। योगासन व प्राणायाम करें।
चिंता, क्रोध, मानसिक तनाव व डर को दूर करने का प्रयास करें।
नकारात्मक भावनाओं को सकारात्मक विचारों में बदलें।
धूम्रपान से परहेज करें, आलस छोड़े।
मोटापा और वजन को बढ़ने से रोके।