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स्वांला हादसे के मृतकों का पीपलपानी हुआ
Updated Sun, 18 Feb 2018 11:08 PM IST
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लोहाघाट (चंपावत)। स्वांला हादसे में मारे गए दस लोगों का रविवार को बगोटी और बिंडातिवारी के लोगों ने पीपलपानी किया। हादसे के बाद से मृतकों के परिजन सदमे में हैं।
हादसे में मृत बगोटी गांव के युवक गौरव पांडेय की मां ईश्वरी देवी और बूढ़ी दादी बेनी देवी अब भी सदमे में है। हादसे में मृत गौरव परिवार का अकेला कमाऊ व्यक्ति था। अब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। विवाहिता बेटी गायत्री एवं राज जोशी मां और दादी को ढांढस बंधा रहे हैं।
इधर किशोर पांडेय की हादसे में मौत होने के पांच दिन बाद पत्नी कमला पांडेय को होश आया। कमला का कहना है कि उनके पति उन्हें कार में बैठाकर पिथौरागढ़ मिलने की बात कह गए थे। वहीं तीन साल की बेटी सुहानी कह रही है कि पापा ड्यूटी गए हैं, जल्दी आ जाएंगे। जवान बेटे की मौत के बाद बूढ़े पिता जगदीश चंद्र पांडेय और माता लक्ष्मी देवी बच्चों को सांत्वना दे रही हैं।
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इसी हादसे के शिकार बिंडातिवारी की गंगा देवी और उनके पौत्र पीयूष के परिजन के जख्म अब भी नहीं भर सके हैं। गंगा देवी की पेंशन घर की गुजर-बसर का बड़ा सहारा था। अब परिवार के सामने भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो गई है। गंगा देवी का पुत्र राकेश दिल्ली में किराए पर रहकर नौकरी करता है।
डा.सतीश चंद्र पांडेय का कहना है कि परिवारों के कमाऊ व्यक्तियों की मौत होने से अब आगे रोजी-रोटी का संकट भी पैदा हो गया है। ग्रामीण हरीश चंद्र पांडेय, पूर्णानंद, जयदत्त, दीनानाथ, चरण दत्त, यशोधर पांडेय, प्रवीण पांडेय, जगदीश चंद्र, सुभाष राम, रूप राम, इंदिरा पांडेय, दिवान सिंह आदि ने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने के साथ सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
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हादसे में मृत बगोटी गांव के युवक गौरव पांडेय की मां ईश्वरी देवी और बूढ़ी दादी बेनी देवी अब भी सदमे में है। हादसे में मृत गौरव परिवार का अकेला कमाऊ व्यक्ति था। अब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। विवाहिता बेटी गायत्री एवं राज जोशी मां और दादी को ढांढस बंधा रहे हैं।
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इधर किशोर पांडेय की हादसे में मौत होने के पांच दिन बाद पत्नी कमला पांडेय को होश आया। कमला का कहना है कि उनके पति उन्हें कार में बैठाकर पिथौरागढ़ मिलने की बात कह गए थे। वहीं तीन साल की बेटी सुहानी कह रही है कि पापा ड्यूटी गए हैं, जल्दी आ जाएंगे। जवान बेटे की मौत के बाद बूढ़े पिता जगदीश चंद्र पांडेय और माता लक्ष्मी देवी बच्चों को सांत्वना दे रही हैं।
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इसी हादसे के शिकार बिंडातिवारी की गंगा देवी और उनके पौत्र पीयूष के परिजन के जख्म अब भी नहीं भर सके हैं। गंगा देवी की पेंशन घर की गुजर-बसर का बड़ा सहारा था। अब परिवार के सामने भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो गई है। गंगा देवी का पुत्र राकेश दिल्ली में किराए पर रहकर नौकरी करता है।
डा.सतीश चंद्र पांडेय का कहना है कि परिवारों के कमाऊ व्यक्तियों की मौत होने से अब आगे रोजी-रोटी का संकट भी पैदा हो गया है। ग्रामीण हरीश चंद्र पांडेय, पूर्णानंद, जयदत्त, दीनानाथ, चरण दत्त, यशोधर पांडेय, प्रवीण पांडेय, जगदीश चंद्र, सुभाष राम, रूप राम, इंदिरा पांडेय, दिवान सिंह आदि ने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने के साथ सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।