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तो पहाड़ में दस्तक देगी गियर वाली साइकिल!
Updated Tue, 19 Dec 2017 10:13 PM IST
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चंपावत। जिले के पहाड़ी हिस्से में नए साल से गियर वाली साइकिल दस्तक दे सकती है। अगर जिला प्रशासन की प्रेरणा रंग लाई तो ऐसा मुमकिन है। डीएम डॉ. अहमद इकबाल ने अधिकारियों को साइकिल से कार्यालय आने के लिए एडवायजरी जारी की है। इसके लिए संबंधित विभागों को विभागीय बजट से साइकिल खरीदनी होगी।
जिले के पहाड़ी हिस्से में आमतौर पर पैडल वाली साइकिल चलाना संभव नहीं है। अपवाद स्वरूप स्थिति को छोड़ लोग चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट में साइकिल का उपयोग लोग नहीं करते हैं। पर, अब गियर वाली साइकिल पहाड़ में चढ़ सकती है।
डीएम डॉ. इकबाल का कहना है कि साइकिल के उपयोग से यातायात व्यवस्था पर कम दबाव के साथ खर्च में कमी आएगी। साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा। डीएम का कहना है कि साइकिल के उपयोग के लिए किसी पर दबाव नहीं होगा, बल्कि अधिकारियों से लेकर आम नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा।
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पैडल वाली साइकिल की अपेक्षा गियर वाली साइकिल करीब दोगुनी कीमत की है। बनबसा गोयल साइकिल स्टोर के रोहित गोयल का कहना है कि गियर वाली साइकिल सात हजार रुपये से दो लाख रुपये तक की है।
पेट्रोल की खपत में कमी के साथ ही साइकिल इको फ्रेंडली सवारी भी है। अगर यह प्रयोग सफल हुआ तो आबादी वाले क्षेत्रों में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा में कमी आने के साथ पर्यावरण प्रदूषण के स्तर में कमी लाने में भी यह मददगार हो सकती है।
छात्राओं साइकिल के बजाय होती है एफडी
छात्राओं को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए साइकिल योजना संचालित है। नवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिल दी जाती है, लेकिन चंपावत जिले में साइकिल का लाभ सिर्फ मैदानी क्षेत्र बनबसा और टनकपुर की छात्राओं को ही मिलता है। जिले के शेष पहाड़ी क्षेत्रों की बालिकाओं को साइकिल के बजाय 2850 रुपये दिए जाते हैं।
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जिले के पहाड़ी हिस्से में आमतौर पर पैडल वाली साइकिल चलाना संभव नहीं है। अपवाद स्वरूप स्थिति को छोड़ लोग चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट में साइकिल का उपयोग लोग नहीं करते हैं। पर, अब गियर वाली साइकिल पहाड़ में चढ़ सकती है।
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डीएम डॉ. इकबाल का कहना है कि साइकिल के उपयोग से यातायात व्यवस्था पर कम दबाव के साथ खर्च में कमी आएगी। साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा। डीएम का कहना है कि साइकिल के उपयोग के लिए किसी पर दबाव नहीं होगा, बल्कि अधिकारियों से लेकर आम नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा।
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पैडल वाली साइकिल की अपेक्षा गियर वाली साइकिल करीब दोगुनी कीमत की है। बनबसा गोयल साइकिल स्टोर के रोहित गोयल का कहना है कि गियर वाली साइकिल सात हजार रुपये से दो लाख रुपये तक की है।
पेट्रोल की खपत में कमी के साथ ही साइकिल इको फ्रेंडली सवारी भी है। अगर यह प्रयोग सफल हुआ तो आबादी वाले क्षेत्रों में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा में कमी आने के साथ पर्यावरण प्रदूषण के स्तर में कमी लाने में भी यह मददगार हो सकती है।
छात्राओं साइकिल के बजाय होती है एफडी
छात्राओं को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए साइकिल योजना संचालित है। नवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिल दी जाती है, लेकिन चंपावत जिले में साइकिल का लाभ सिर्फ मैदानी क्षेत्र बनबसा और टनकपुर की छात्राओं को ही मिलता है। जिले के शेष पहाड़ी क्षेत्रों की बालिकाओं को साइकिल के बजाय 2850 रुपये दिए जाते हैं।