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2 विकासखंड, 1 एक्सरे मशीन मगर उसका भी उपयोग नहीं
Updated Sun, 09 Dec 2018 09:35 PM IST
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चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। पाटी क्षेत्र की नीलावती इस माह के शुरू में पेड़ से गिरी। चोट लगने पर एक्सरे की नौबत आई, तो उसे आनन-फानन में हल्द्वानी दौड़ लगानी पड़ी। ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं की दुर्दशा का ये अकेला उदाहरण नहीं है, बल्कि ये एक बानगी भर है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को ग्रामीण स्तर पर बढ़ाने के दावों के बीच जिले के दो विकासखंड पाटी और बाराकोट एक्सरे जैसे मामूली सुविधा को तरस रहे हैं। ये हाल तब हैं, जब एक अस्पताल में एक्सरे मशीन है, लेकिन इस मशीन को संचालित करने के लिए तकनीशियन नहीं है। इसके चलते दोनों विकास खंडों के लोगों को 14 किलोमीटर से 63 किलोमीटर लोहाघाट या फिर हल्द्वानी तक का फासला तय करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
90 हजार से अधिक आबादी वाले दो विकास खंडों में छोटे-बड़े नौ सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन कहीं भी न एक्सरे की सुविधा है और नहीं खून की जांच की। पाटी अस्पताल में 2004 से एक्सरे मशीन है, लेकिन बीच में महज एक साल को छोड़ यहां कभी एक्सरे नहीं हो सके।
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राज्य सहकारिता परिषद के उप सभापति (दर्जा मंत्री) हयात सिंह माहरा के विकासखंड बाराकोट के हाल भी इससे जुदा नहीं है। इन दोनों जगहों में प्राइवेट अस्पताल भी नहीं है। एक्सरे जैसे मामूली परीक्षण के लिए भी लोगों को वक्त और पैसा दोनों खर्च करना पड़ता था। इधर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.आरपी खंडूरी का कहना है कि पाटी में एक्सरे की सुविधा मुहैय्या कराने के लिए वैकल्पिक उपाय पर विचार किया जाएगा।
पाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.आभाष सिंह का कहना है कि पाटी में एक्सरे मशीन को ऑपरेट करने के लिए तकनीशियन का पद लंबे समय से रिक्त है। तीन साल पूर्व चंपावत से एक डार्क रूम सहायक को यहां संबद्ध किया गया था। लेकिन 2016 में उन्हें बुला लिया गया। तबसे यहां एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं।
खून की जांच की भी सुविधा नहीं
चंपावत जिले के पाटी और बाराकोट विकासखंड के लोगों को खून की जांच की भी सुविधा नहीं है। दोनों क्षेत्रों के 9 अस्पतालों में कहीं भी पैथोलॉजी लैब नहीं है और नहीं लैब तकनीशियन। इस वजह से यहां के लोग रक्त परीक्षण को भी दूसरे अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं।
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चंपावत। पाटी क्षेत्र की नीलावती इस माह के शुरू में पेड़ से गिरी। चोट लगने पर एक्सरे की नौबत आई, तो उसे आनन-फानन में हल्द्वानी दौड़ लगानी पड़ी। ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं की दुर्दशा का ये अकेला उदाहरण नहीं है, बल्कि ये एक बानगी भर है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को ग्रामीण स्तर पर बढ़ाने के दावों के बीच जिले के दो विकासखंड पाटी और बाराकोट एक्सरे जैसे मामूली सुविधा को तरस रहे हैं। ये हाल तब हैं, जब एक अस्पताल में एक्सरे मशीन है, लेकिन इस मशीन को संचालित करने के लिए तकनीशियन नहीं है। इसके चलते दोनों विकास खंडों के लोगों को 14 किलोमीटर से 63 किलोमीटर लोहाघाट या फिर हल्द्वानी तक का फासला तय करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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90 हजार से अधिक आबादी वाले दो विकास खंडों में छोटे-बड़े नौ सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन कहीं भी न एक्सरे की सुविधा है और नहीं खून की जांच की। पाटी अस्पताल में 2004 से एक्सरे मशीन है, लेकिन बीच में महज एक साल को छोड़ यहां कभी एक्सरे नहीं हो सके।
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राज्य सहकारिता परिषद के उप सभापति (दर्जा मंत्री) हयात सिंह माहरा के विकासखंड बाराकोट के हाल भी इससे जुदा नहीं है। इन दोनों जगहों में प्राइवेट अस्पताल भी नहीं है। एक्सरे जैसे मामूली परीक्षण के लिए भी लोगों को वक्त और पैसा दोनों खर्च करना पड़ता था। इधर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.आरपी खंडूरी का कहना है कि पाटी में एक्सरे की सुविधा मुहैय्या कराने के लिए वैकल्पिक उपाय पर विचार किया जाएगा।
पाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.आभाष सिंह का कहना है कि पाटी में एक्सरे मशीन को ऑपरेट करने के लिए तकनीशियन का पद लंबे समय से रिक्त है। तीन साल पूर्व चंपावत से एक डार्क रूम सहायक को यहां संबद्ध किया गया था। लेकिन 2016 में उन्हें बुला लिया गया। तबसे यहां एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं।
खून की जांच की भी सुविधा नहीं
चंपावत जिले के पाटी और बाराकोट विकासखंड के लोगों को खून की जांच की भी सुविधा नहीं है। दोनों क्षेत्रों के 9 अस्पतालों में कहीं भी पैथोलॉजी लैब नहीं है और नहीं लैब तकनीशियन। इस वजह से यहां के लोग रक्त परीक्षण को भी दूसरे अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं।