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मनरेगा घोटाला:एसआईटी ने कार्यो की जांच को मांगे तकनीकी अधिकारी
Updated Sun, 28 Oct 2018 10:21 PM IST
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चंपावत। मनरेगा योजना के तहत भिंगराड़ा में सात साल पूर्व 1.17 करोड़ रुपये के कार्यों में अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी ने निर्माण कार्यों के तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए तकनीकी अधिकारियों की मांग की है। इस संबंध में एसपी धीरेंद्र सिंह गुंज्याल ने जिलाधिकारी को पत्र भेज एसआईटी को अभियंता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। यह तकनीकी टीम स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित कार्यों की गुणवत्ता को जांचेगी।
अधिवक्ता संजय भट्ट की जनहित याचिका पर इस साल 14 अगस्त को उच्च न्यायालय ने एफआईआर करने के आदेश दिए थे। पाटी के थानाध्यक्ष दिवान सिंह ने बताया कि खंड विकास अधिकारी की तहरीर पर 15 सितंबर को अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था। सीओ के नेतृत्व में गठित एसआईटी में पाटी के थानेदार के अलावा लोहाघाट के एसओ और चंपावत के दरोगा जसवीर सिंह शामिल किए गए हैं।
भिंगराड़ा क्षेत्र में 2011-12 में मनरेगा के तहत 36 वन पंचायतों में 1.17 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए मृदा और जल संरक्षण के कामों में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे। सात गैर पंजीकृत कंपनियों से निर्माण सामग्री खरीदने के अलावा कई अपात्र लोगों को मनरेगा मजदूरी के भुगतान सहित कई आरोप लगे हैं।
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अधिवक्ता संजय भट्ट की जनहित याचिका पर इस साल 14 अगस्त को उच्च न्यायालय ने एफआईआर करने के आदेश दिए थे। पाटी के थानाध्यक्ष दिवान सिंह ने बताया कि खंड विकास अधिकारी की तहरीर पर 15 सितंबर को अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था। सीओ के नेतृत्व में गठित एसआईटी में पाटी के थानेदार के अलावा लोहाघाट के एसओ और चंपावत के दरोगा जसवीर सिंह शामिल किए गए हैं।
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भिंगराड़ा क्षेत्र में 2011-12 में मनरेगा के तहत 36 वन पंचायतों में 1.17 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए मृदा और जल संरक्षण के कामों में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे थे। सात गैर पंजीकृत कंपनियों से निर्माण सामग्री खरीदने के अलावा कई अपात्र लोगों को मनरेगा मजदूरी के भुगतान सहित कई आरोप लगे हैं।
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