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कांस्य पदक विजेता ईश्वरी का घर पहुंचने पर सम्मान
Updated Sat, 15 Dec 2018 10:55 PM IST
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बनबसा (चंपावत)। कामनवेल्थ गेम की कराटे प्रतियोगिता में कांस्य पदक लाने वाली ईश्वरी जोशी शुक्रवार रात अपने घर पचपकरिया पहुंचीं। बनबसा पहुंचने पर क्षेत्रवासियों ने उसका जोरदार स्वागत किया। बनबसा की लाडली ने 29 नवंबर से 2 दिसंबर तक साउथ अफ्रीका में हुए 9वीं कामनवेल्थ गेम में देश का प्रतिनिधित्व किया था।
शुक्रवार रात ईश्वरी की प्रतीक्षा में परिजन और लोग एनएचएआई किनारे खड़े थे। पुत्री के बनबसा पहुंचने पर माता-पिता ने उसे गले लगा लिया। मां की खुशी में आंखें भर आई। इस दौरान ईश्वरी का पचपकरिया पहुंचकर विधायक कैलाश गहतोड़ी, विधायक प्रतिनिधि महेश मुरारी, हरीश हैसियत, हेमा जोशी, दीपक चंद रजवार, सुनीता मुरारी, मनोज मित्तल, मोनू ठाकुर आदि के अलावा ग्रामीणों और पड़ोसियों ने जोरदार स्वागत किया। विधायक ने उसे हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
बता दें कि साउथ अफ्रीका के डरबन में 2 दिसंबर को ईश्वरी ने कामनवेल्थ गेम की कराटे प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक जीता। ईश्वरी कामनवेल्थ गेम में पदक प्राप्त करने वाली चंपावत जिले की पहली खिलाड़ी बनी हैं। उन्होंने इससे पहले आस्ट्रिया और दुबई में आयोजित विश्व कराटे प्रतियोगिता में भी देश का प्रतिनिधित्व किया था। उनके पिता मोहन चंद्र जोशी सेना से अवकाश प्राप्त हैं, वह एनएसजी में ब्लैक कमांडो भी रह चुके हैं, जबकि मां कमलेश जोशी उर्फ उर्मिला गृहणी हैं।
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कराटे में ही कुछ करने की इच्छा है : ईश्वरी
बनबसा (चंपावत)। कॉमनवेल्थ गेम की कराटे प्रतियोगिता में कांस्य पदक प्राप्त करने वाली ईश्वरी जोशी कराटे को ही अपना कॅरियर बनाना चाहती हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि फिलहाल वह रजौरी (दिल्ली) स्थित मानसरोवर में अपना जिम चलाती हैं।
कराटे में ही देश के लिए कुछ अच्छा करना चाहती हैं। उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया है, वह एमकॉम की पढ़ाई कर रही हैं। उसे सरकारी नौकरी की तलाश है। पूछने पर उसने बताया कि उसके मन में उत्तराखंड के लिए भी कुछ करने की इच्छा है। समय-समय पर वह नई पीढ़ी के युवकों और युवतियों को कराटे में प्रशिक्षित करना चाहती है। ईश्वरी का मानना है कि कराटे जैसी विधा युवतियों के लिए आत्मरक्षा का उन्नत साधन बन सकती है।
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शुक्रवार रात ईश्वरी की प्रतीक्षा में परिजन और लोग एनएचएआई किनारे खड़े थे। पुत्री के बनबसा पहुंचने पर माता-पिता ने उसे गले लगा लिया। मां की खुशी में आंखें भर आई। इस दौरान ईश्वरी का पचपकरिया पहुंचकर विधायक कैलाश गहतोड़ी, विधायक प्रतिनिधि महेश मुरारी, हरीश हैसियत, हेमा जोशी, दीपक चंद रजवार, सुनीता मुरारी, मनोज मित्तल, मोनू ठाकुर आदि के अलावा ग्रामीणों और पड़ोसियों ने जोरदार स्वागत किया। विधायक ने उसे हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
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बता दें कि साउथ अफ्रीका के डरबन में 2 दिसंबर को ईश्वरी ने कामनवेल्थ गेम की कराटे प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक जीता। ईश्वरी कामनवेल्थ गेम में पदक प्राप्त करने वाली चंपावत जिले की पहली खिलाड़ी बनी हैं। उन्होंने इससे पहले आस्ट्रिया और दुबई में आयोजित विश्व कराटे प्रतियोगिता में भी देश का प्रतिनिधित्व किया था। उनके पिता मोहन चंद्र जोशी सेना से अवकाश प्राप्त हैं, वह एनएसजी में ब्लैक कमांडो भी रह चुके हैं, जबकि मां कमलेश जोशी उर्फ उर्मिला गृहणी हैं।
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कराटे में ही कुछ करने की इच्छा है : ईश्वरी
बनबसा (चंपावत)। कॉमनवेल्थ गेम की कराटे प्रतियोगिता में कांस्य पदक प्राप्त करने वाली ईश्वरी जोशी कराटे को ही अपना कॅरियर बनाना चाहती हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि फिलहाल वह रजौरी (दिल्ली) स्थित मानसरोवर में अपना जिम चलाती हैं।
कराटे में ही देश के लिए कुछ अच्छा करना चाहती हैं। उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया है, वह एमकॉम की पढ़ाई कर रही हैं। उसे सरकारी नौकरी की तलाश है। पूछने पर उसने बताया कि उसके मन में उत्तराखंड के लिए भी कुछ करने की इच्छा है। समय-समय पर वह नई पीढ़ी के युवकों और युवतियों को कराटे में प्रशिक्षित करना चाहती है। ईश्वरी का मानना है कि कराटे जैसी विधा युवतियों के लिए आत्मरक्षा का उन्नत साधन बन सकती है।