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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष:
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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष:
जापानी तकनीक से एक साल में ही विकसित होने लगा वन
आश्चर्यजनक गति से बढ़ रहे हैं गोल्फ कोर्स की भूमि पर लगाए गए पौधे
आलाप संस्था ने एक एकड़ भूमि में लगाए गए थे सात हजार पेड़
सतीश जोशी ‘सत्तू’
चंपावत। जिला मुख्यालय के पूल्ड आवास से लगे गोल्फ कोर्स की बंजर भूमि पर जापान की तकनीक से एक साल में ही मिश्रित वन विकसित होने लगा है। एक साल पूर्व विश्व पर्यावरण दिवस पर गोल्फ कोर्स की भूमि पर जापानी तकनीक अकीरा मिया बाकी के तहत जिला प्रशासन और आलाप संस्था की ओर से एक एकड़ भूमि पर विभिन्न प्रजाति के सात हजार पौधे रोपे गए थे जो सामान्य पौधों की तुलना में बेहद आश्चर्यजनक गति से बढ़ रहे हैं। कुछ ही वर्षों में इस स्थान पर पर्यटकों के मनोरंजन के लिए विशालकाय जंगल तैयार हो जाएगा।
गौरतलब है कि चंपावत जिला प्रशासन ने आलाप संस्था के साथ एक साल पूर्व गोल्फ कोर्स की बंजर भूमि में अकीरा मिया बाकी तकनीक से वनीकरण को लेकर अनुबंध किया था। इसके बाद आलाप संस्था के वैज्ञानिकों की टीम ने क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर भूमि को पौधरोपण के लिए उपयुक्त पाया था और जिसके तत्काल बाद ही संस्था की ओर से बंजर भूमि पर पौधारोपण किया गया था। एक साल के भीतर ही इस स्थान पर मिश्रित वन विकसित होने लगा है। आलाप संस्था की संस्थापक शिबा सेन के मुताबिक पांच साल बाद इन पौधों को अलग-अलग हिस्सों में बांट कर इन्हें स्मृतिवन, तपोवन और महावन का नाम दिया जाएगा।
फोटो 04 सीपीटी 01 पी, 02 पी।
बाक्स
आलाप संस्था करेगी डेढ़ लाख पौधों का रोपण
चंपावत। आलाप संस्था की संस्थापक शिवा सेन के अनुसार संस्था की ओर से विभिन्न स्थानों पर जापानी तकनीक से पांच साल में डेढ़ लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके लिए नर्सरियां तैयार की जा रही हैं। जापनी तकनीक के तहत हिमालयी मौसम के अनुरूप बांज, पदम, बुरांश, काफल, रियांस, उतीस आदि के 141016 पौधे यहां रोपे जाएंगे। पौधों की देखभाल भी जापानी विधि से ही की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि तीन साल के भीतर इन पौधों की लंबाई तीन से पांच फुट तक पहुंच जाएगी।
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बाक्स
कैसे काम करती है अकीरा मिया बाकी तकनीक
चंपावत। जापानी अकीरा मिया बाकी तकनीक के तहत विभिन्न प्रजाति के पौधों को लगाने के लिए जैविक खाद, भूसा, गोमूत्र आदि का मिश्रण तैयार किया जाता है। पौधों को बेहद नजदीक-नजदीक लगाने के साथ ही तैयार मिश्रण से सिंचाई की जाती है और जिन जगहों पर पौधे लगाए जाते हैं उन्हें सूखी घास से पूरी तरह ढक दिया जाता है जिससे पौधों की जड़ों में हर समय नमी बरकरार रहती है।
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जापानी तकनीक से एक साल में ही विकसित होने लगा वन
आश्चर्यजनक गति से बढ़ रहे हैं गोल्फ कोर्स की भूमि पर लगाए गए पौधे
आलाप संस्था ने एक एकड़ भूमि में लगाए गए थे सात हजार पेड़
सतीश जोशी ‘सत्तू’
चंपावत। जिला मुख्यालय के पूल्ड आवास से लगे गोल्फ कोर्स की बंजर भूमि पर जापान की तकनीक से एक साल में ही मिश्रित वन विकसित होने लगा है। एक साल पूर्व विश्व पर्यावरण दिवस पर गोल्फ कोर्स की भूमि पर जापानी तकनीक अकीरा मिया बाकी के तहत जिला प्रशासन और आलाप संस्था की ओर से एक एकड़ भूमि पर विभिन्न प्रजाति के सात हजार पौधे रोपे गए थे जो सामान्य पौधों की तुलना में बेहद आश्चर्यजनक गति से बढ़ रहे हैं। कुछ ही वर्षों में इस स्थान पर पर्यटकों के मनोरंजन के लिए विशालकाय जंगल तैयार हो जाएगा।
गौरतलब है कि चंपावत जिला प्रशासन ने आलाप संस्था के साथ एक साल पूर्व गोल्फ कोर्स की बंजर भूमि में अकीरा मिया बाकी तकनीक से वनीकरण को लेकर अनुबंध किया था। इसके बाद आलाप संस्था के वैज्ञानिकों की टीम ने क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर भूमि को पौधरोपण के लिए उपयुक्त पाया था और जिसके तत्काल बाद ही संस्था की ओर से बंजर भूमि पर पौधारोपण किया गया था। एक साल के भीतर ही इस स्थान पर मिश्रित वन विकसित होने लगा है। आलाप संस्था की संस्थापक शिबा सेन के मुताबिक पांच साल बाद इन पौधों को अलग-अलग हिस्सों में बांट कर इन्हें स्मृतिवन, तपोवन और महावन का नाम दिया जाएगा।
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फोटो 04 सीपीटी 01 पी, 02 पी।
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आलाप संस्था करेगी डेढ़ लाख पौधों का रोपण
चंपावत। आलाप संस्था की संस्थापक शिवा सेन के अनुसार संस्था की ओर से विभिन्न स्थानों पर जापानी तकनीक से पांच साल में डेढ़ लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके लिए नर्सरियां तैयार की जा रही हैं। जापनी तकनीक के तहत हिमालयी मौसम के अनुरूप बांज, पदम, बुरांश, काफल, रियांस, उतीस आदि के 141016 पौधे यहां रोपे जाएंगे। पौधों की देखभाल भी जापानी विधि से ही की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि तीन साल के भीतर इन पौधों की लंबाई तीन से पांच फुट तक पहुंच जाएगी।
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कैसे काम करती है अकीरा मिया बाकी तकनीक
चंपावत। जापानी अकीरा मिया बाकी तकनीक के तहत विभिन्न प्रजाति के पौधों को लगाने के लिए जैविक खाद, भूसा, गोमूत्र आदि का मिश्रण तैयार किया जाता है। पौधों को बेहद नजदीक-नजदीक लगाने के साथ ही तैयार मिश्रण से सिंचाई की जाती है और जिन जगहों पर पौधे लगाए जाते हैं उन्हें सूखी घास से पूरी तरह ढक दिया जाता है जिससे पौधों की जड़ों में हर समय नमी बरकरार रहती है।