{"_id":"5b6887204f1c1b66428b6486","slug":"141533576992-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर उठ रहे सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर उठ रहे सवाल
Updated Mon, 06 Aug 2018 11:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर इस बार दो जुलाई से शुरू शिक्षा सत्र में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अब तक पांच दिन की छुट्टी हो चुकी है। इन पांच बार के मुकाबले केवल एक बार ही अनुमान सही साबित हुए। हाल यह है कि एक भी तहसील में बारिश मापी संत्र काम नहीं कर रहा है।
सोमवार को भी विभाग का पूर्वानुमान सही साबित नहीं हुआ। सुबह 6 बजे से शाम चार बजे तक एक बूंद पानी नहीं बरसा। भारी बारिश के पूर्वानुमान के आधार पर सुरक्षा कारणों से जिला प्रशासन ने इंटर तक के 797 कॉलेज और 681 आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी गई थी। मौसम विभाग ने 4, 10, 13 और 26 जुलाई को मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी थी मगर जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में 24 घंटों में 27 एमएम से अधिक बारिश नहीं हुई। दो पूर्वानुमान को गलत साबित करते हुए तो पाटी में एक भी बूंद पानी नहीं बरसा। चारों पूर्वानुमान पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश होने से पढ़ाई प्रभावित रही। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने स्वीकार किया कि पूर्वानुमान अधिकतर सटीक साबित नहीं हुए हैं।
कहां कितनी बारिश (मिली मीटर में)
तिथि चंपावत लोहाघाट पाटी बनबसा
4 जुलाई 6 1 1 19
10 जुलाई 7 1 0 30
13 जुलाई 3 0.50 0 65
26 जुलाई 26 19 12 49
6 अगस्त 2 12 16 28
मौसम विज्ञानियों की माने तो पूर्वानुमान के सटीक न होने का एक कारण यह भी है कि प्रदेश में आंकड़ों को जुटाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। दो डॉप्लर रडार अभी लगने हैं और पर्याप्त संख्या में वेदर स्टेशन नहीं है। ऐसे में मौसम विभाग को एक व्यापक क्षेत्र के लिए औसत आधार पर पूर्वानुमान जारी करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
यह अब स्वीकार किया जा रहा है कि प्रदेश में मानसून में भी माइक्रो क्लाइमेट जोन सक्रिय होते हैं। मौसम बदलाव का फर्क भी अब महसूस किया जा रहा है। इस समय पांच तहसीलों में से किसी भी तहसील में बारिश मापी यंत्र काम नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन
सोमवार को भी विभाग का पूर्वानुमान सही साबित नहीं हुआ। सुबह 6 बजे से शाम चार बजे तक एक बूंद पानी नहीं बरसा। भारी बारिश के पूर्वानुमान के आधार पर सुरक्षा कारणों से जिला प्रशासन ने इंटर तक के 797 कॉलेज और 681 आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी गई थी। मौसम विभाग ने 4, 10, 13 और 26 जुलाई को मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी थी मगर जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में 24 घंटों में 27 एमएम से अधिक बारिश नहीं हुई। दो पूर्वानुमान को गलत साबित करते हुए तो पाटी में एक भी बूंद पानी नहीं बरसा। चारों पूर्वानुमान पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश होने से पढ़ाई प्रभावित रही। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने स्वीकार किया कि पूर्वानुमान अधिकतर सटीक साबित नहीं हुए हैं।
विज्ञापन
कहां कितनी बारिश (मिली मीटर में)
तिथि चंपावत लोहाघाट पाटी बनबसा
4 जुलाई 6 1 1 19
10 जुलाई 7 1 0 30
13 जुलाई 3 0.50 0 65
26 जुलाई 26 19 12 49
6 अगस्त 2 12 16 28
मौसम विज्ञानियों की माने तो पूर्वानुमान के सटीक न होने का एक कारण यह भी है कि प्रदेश में आंकड़ों को जुटाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। दो डॉप्लर रडार अभी लगने हैं और पर्याप्त संख्या में वेदर स्टेशन नहीं है। ऐसे में मौसम विभाग को एक व्यापक क्षेत्र के लिए औसत आधार पर पूर्वानुमान जारी करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
यह अब स्वीकार किया जा रहा है कि प्रदेश में मानसून में भी माइक्रो क्लाइमेट जोन सक्रिय होते हैं। मौसम बदलाव का फर्क भी अब महसूस किया जा रहा है। इस समय पांच तहसीलों में से किसी भी तहसील में बारिश मापी यंत्र काम नहीं कर पा रहे हैं।