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मां होती है शिशु की प्रथम अध्यापिका
Updated Sun, 18 Jun 2017 11:23 PM IST
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मां होती है शिशु की प्रथम अध्यापिका
सरस्वती शिशु मंदिर मादली में आयोजित हुआ मातृ सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। सरस्वती शिशु मंदिर मादली में आयोजित मातृ सम्मेलन में मां को शिशु की पहली अध्यापिका और पाठशाला बताया गया। इस मौके के पर अभिभावकों से बच्चों को संस्कारवान बनाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
सम्मेलन का शुभारंभ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमा पांडेय ने किया। उन्होंने माताओं को शिशु की प्रथम अध्यापिका और पाठशाला बताते हुए माताओं के दिए संस्कारों से महान बनने वालों के कई उदाहरण पेश किए। अध्यक्षता कर रही भावना जोशी ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर संस्कारों की कार्यशाला है। विशिष्ट अतिथि प्रेम सिंह चौहान ने कहा कि शिशु के विकास में मां की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि अच्छे संस्कारों पर मां को अवश्य ध्यान देना चाहिए।
विद्यालय के व्यवस्थापक बची सिंह पुजारी ने कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कारों के माध्यम से समाज और राष्ट्र को अच्छा बनाया जा सकता है। प्रधानाचार्य हीराबल्लभ उप्रेती ने कहा कि अभिभावकों को लगातार अपने बच्चों के शैक्षिक स्तर की पड़ताल करनी चाहिए। इस मौके पर उमेश चंद्र पांडेय, मीना तड़ागी, दीपा, मंजू जोशी, सुषमा शर्मा, पार्वती देवी, शांति देवी, रेखा बोहरा, हीरा देवी, हेमा देवी, कमला देवी, मधु देवी, मंजू बोहरा, कलावती आदि ने भी विचार रखे। संचालन खीमा बोहरा ने किया।
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सरस्वती शिशु मंदिर मादली में आयोजित हुआ मातृ सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। सरस्वती शिशु मंदिर मादली में आयोजित मातृ सम्मेलन में मां को शिशु की पहली अध्यापिका और पाठशाला बताया गया। इस मौके के पर अभिभावकों से बच्चों को संस्कारवान बनाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
सम्मेलन का शुभारंभ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमा पांडेय ने किया। उन्होंने माताओं को शिशु की प्रथम अध्यापिका और पाठशाला बताते हुए माताओं के दिए संस्कारों से महान बनने वालों के कई उदाहरण पेश किए। अध्यक्षता कर रही भावना जोशी ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर संस्कारों की कार्यशाला है। विशिष्ट अतिथि प्रेम सिंह चौहान ने कहा कि शिशु के विकास में मां की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि अच्छे संस्कारों पर मां को अवश्य ध्यान देना चाहिए।
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विद्यालय के व्यवस्थापक बची सिंह पुजारी ने कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कारों के माध्यम से समाज और राष्ट्र को अच्छा बनाया जा सकता है। प्रधानाचार्य हीराबल्लभ उप्रेती ने कहा कि अभिभावकों को लगातार अपने बच्चों के शैक्षिक स्तर की पड़ताल करनी चाहिए। इस मौके पर उमेश चंद्र पांडेय, मीना तड़ागी, दीपा, मंजू जोशी, सुषमा शर्मा, पार्वती देवी, शांति देवी, रेखा बोहरा, हीरा देवी, हेमा देवी, कमला देवी, मधु देवी, मंजू बोहरा, कलावती आदि ने भी विचार रखे। संचालन खीमा बोहरा ने किया।
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