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अपना मैदान तक नहीं, हो रहा खेल महाकुंभ
Updated Sat, 11 Nov 2017 10:58 PM IST
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चंपावत। नौ नवंबर से शुरू खेल महाकुंभ 30 नवंबर तक चलेंगे। फिलहाल शनिवार को न्याय पंचायत स्तरीय खेल महाकुंभ का तीसरा व आखिरी दिन है। इसके बाद 14 से 20 नवंबर तक ब्लाक स्तरीय और 24 से 30 नवंबर को खेल महाकुंभ के तीसरे चरण में जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी। लेकिन पहले स्तर की खेलकूद प्रतियोगिता में ही सरकारी अमले के हाथ पांव फूले हुए हैं। वजह खेलों के बुनियादी ढांचे का न होना है। न खेल मैदान हैं और न ही गांवों में खेलों को सिखाने वाले प्रशिक्षक।
नमूने के तौर पर जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों वाली खर्ककार्की न्याय पंचायत के पास ही खेल मैदान नहीं है। इसके चलते खर्ककार्की न्याय पंचायत की खेल गतिविधियां चंपावत के गोरलचौड़ मैदान में हो रही है। ऐसा ही हाल 11 किलोमीटर दूर सिमल्टा न्याय पंचायत का भी है। इस न्याय पंचायत के खेल भी चंपावत में हो रहे हैं। जिले की 24 न्याय पंचायतों में खेल महाकुंभ के तहत प्रतियोगिताएं हो रही हैं। लेकिन इन न्याय पंचायतों के 313 ग्राम पंचायतों में से एक में भी खेल की बारीकियों को सीखाने वाले प्रशिक्षक नहीं है।
करीब 45 प्रतिशत गांवों में मैदान भी नहीं हैं। ऐसे में अधिकांश ग्रामीण बच्चे बगैर अभ्यास के सीधे खेल प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। स्कूलों में भी खेल मैदान के हाल ठीक नहीं है। 90 प्रतिशत माध्यमिक स्कूलों में खेल शिक्षक (पीटीआई) नहीं है। खर्ककार्की व सिमल्टा न्याय पंचायत के स्कूलों में खेल सामग्री के नाम पर बस कैरम बोर्ड उपलब्ध है। मगर कैरम को खेल महाकुंभ में शामिल नहीं किया गया। महाकुंभ के तहत न्याय पंचायत स्तर पर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, चक्का, गोला क्षेपण, कबड्डी और खो-खो समेत तमाम खेल शामिल हैं।
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164 ग्राम पंचायतों में मामूली खेल मैदान भी नहीं
खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए जिले के ज्यादातर गांवों में खेल मैदान तक नहीं हैं। ऐसे में आगे चलकर पदक जीतना अक्सर सपना ही रहता है। चंपावत जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से 164 में मामूली खेल मैदान तक नहीं है। ज्यादातर जगहों में नौनिहाल गांवों में मैदान के बजाय खेतों में खेलने को मजबूर हैं। प्रांतीय युवा कल्याण विभाग 25 वर्ष तक के ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर खेलकूद गतिविधियों का आयोजन करता है। लेकिन गांवों में खेल मैदानों के हाल एकदम खस्ता हैं। जिला युवा कल्याण अधिकारी हरीश जोशी ने बताया कि चंपावत जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से 149 में पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेलकूद योजना के तहत खेल मैदान बनाए गए। इनमें भी बस वॉलीबाल व कबड्डी के अलावा दूसरा खेल मुमकिन नहीं है। वहीं राजीव गांधी खेल अभियान के तहत विकासखंड मुख्यालयों में प्रस्तावित खेल कांप्लैक्स भी जमीन नहीं मिलने से न हीं बन सके।
स्कूल में खेल सामग्री नहीं
दूरस्थ राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय रौकुंवर के छठीं कक्षा के छात्र मुकेश ने न्याय पंचायत स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में फर्राटा रेस में दूसरा स्थान हासिल किया। कहते हैं कि वे खेतों में कभी कभार दौड़ लगा लिया करते हैं। विद्यालय में खेल सामग्री भी नहीं है।
खेतों में दौड़ती हैं आरती
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय चौड़ा राजपुरा में सातवीं में पढने वाली आरती ने 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया। आरती का कहना है कि वो कभी कभार घर के खेतों में दौड़ने का अभ्यास कर लेती हैं। चंपावत में आकर मैदान में दौड़ने में उन्हें अच्छा लग रहा है। स्कूल में खेल सामग्री न होने से अन्य खेलों का पूर्वाभ्यास नहीं हो पाता है।
भारी पड़ा प्रशिक्षण का अभाव
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय रौकुंवर की सातवीं की छात्रा रीता ने न्याय पंचायत स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में लंबी कूद में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के अभाव से प्रतियोगिता में स्थान नहीं बना पाने वाली रीता कभी कभार स्कूल के छोटे से मैदान में ही अभ्यास करती हैं।
कोट
9वीं से इंटर तक के छात्र-छात्राओं से क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है। जिससे इन विद्यालयों में खेल सामग्री की खरीद की जाती है। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं को खेलों का प्रशिक्षण देने को व्यायाम शिक्षकों की तैनाती की गई है। कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों में खेलकूद सामग्री की उपलब्धता नहीं है।
आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षा अधिकारी, चंपावत।
नमूने के तौर पर जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों वाली खर्ककार्की न्याय पंचायत के पास ही खेल मैदान नहीं है। इसके चलते खर्ककार्की न्याय पंचायत की खेल गतिविधियां चंपावत के गोरलचौड़ मैदान में हो रही है। ऐसा ही हाल 11 किलोमीटर दूर सिमल्टा न्याय पंचायत का भी है। इस न्याय पंचायत के खेल भी चंपावत में हो रहे हैं। जिले की 24 न्याय पंचायतों में खेल महाकुंभ के तहत प्रतियोगिताएं हो रही हैं। लेकिन इन न्याय पंचायतों के 313 ग्राम पंचायतों में से एक में भी खेल की बारीकियों को सीखाने वाले प्रशिक्षक नहीं है।
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करीब 45 प्रतिशत गांवों में मैदान भी नहीं हैं। ऐसे में अधिकांश ग्रामीण बच्चे बगैर अभ्यास के सीधे खेल प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। स्कूलों में भी खेल मैदान के हाल ठीक नहीं है। 90 प्रतिशत माध्यमिक स्कूलों में खेल शिक्षक (पीटीआई) नहीं है। खर्ककार्की व सिमल्टा न्याय पंचायत के स्कूलों में खेल सामग्री के नाम पर बस कैरम बोर्ड उपलब्ध है। मगर कैरम को खेल महाकुंभ में शामिल नहीं किया गया। महाकुंभ के तहत न्याय पंचायत स्तर पर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, चक्का, गोला क्षेपण, कबड्डी और खो-खो समेत तमाम खेल शामिल हैं।
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164 ग्राम पंचायतों में मामूली खेल मैदान भी नहीं
खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए जिले के ज्यादातर गांवों में खेल मैदान तक नहीं हैं। ऐसे में आगे चलकर पदक जीतना अक्सर सपना ही रहता है। चंपावत जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से 164 में मामूली खेल मैदान तक नहीं है। ज्यादातर जगहों में नौनिहाल गांवों में मैदान के बजाय खेतों में खेलने को मजबूर हैं। प्रांतीय युवा कल्याण विभाग 25 वर्ष तक के ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर खेलकूद गतिविधियों का आयोजन करता है। लेकिन गांवों में खेल मैदानों के हाल एकदम खस्ता हैं। जिला युवा कल्याण अधिकारी हरीश जोशी ने बताया कि चंपावत जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से 149 में पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेलकूद योजना के तहत खेल मैदान बनाए गए। इनमें भी बस वॉलीबाल व कबड्डी के अलावा दूसरा खेल मुमकिन नहीं है। वहीं राजीव गांधी खेल अभियान के तहत विकासखंड मुख्यालयों में प्रस्तावित खेल कांप्लैक्स भी जमीन नहीं मिलने से न हीं बन सके।
स्कूल में खेल सामग्री नहीं
दूरस्थ राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय रौकुंवर के छठीं कक्षा के छात्र मुकेश ने न्याय पंचायत स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में फर्राटा रेस में दूसरा स्थान हासिल किया। कहते हैं कि वे खेतों में कभी कभार दौड़ लगा लिया करते हैं। विद्यालय में खेल सामग्री भी नहीं है।
खेतों में दौड़ती हैं आरती
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय चौड़ा राजपुरा में सातवीं में पढने वाली आरती ने 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया। आरती का कहना है कि वो कभी कभार घर के खेतों में दौड़ने का अभ्यास कर लेती हैं। चंपावत में आकर मैदान में दौड़ने में उन्हें अच्छा लग रहा है। स्कूल में खेल सामग्री न होने से अन्य खेलों का पूर्वाभ्यास नहीं हो पाता है।
भारी पड़ा प्रशिक्षण का अभाव
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय रौकुंवर की सातवीं की छात्रा रीता ने न्याय पंचायत स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में लंबी कूद में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के अभाव से प्रतियोगिता में स्थान नहीं बना पाने वाली रीता कभी कभार स्कूल के छोटे से मैदान में ही अभ्यास करती हैं।
कोट
9वीं से इंटर तक के छात्र-छात्राओं से क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है। जिससे इन विद्यालयों में खेल सामग्री की खरीद की जाती है। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं को खेलों का प्रशिक्षण देने को व्यायाम शिक्षकों की तैनाती की गई है। कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों में खेलकूद सामग्री की उपलब्धता नहीं है।
आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षा अधिकारी, चंपावत।