{"_id":"59fb5c6e4f1c1bd1538ba88d","slug":"121509645422-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"7 दिनों में देनी थी जांच रिपोर्ट, पर 36 दिनों में जांच ही पूरी नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
7 दिनों में देनी थी जांच रिपोर्ट, पर 36 दिनों में जांच ही पूरी नहीं
Updated Thu, 02 Nov 2017 11:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चंपावत। टनकपुर संयुक्त अस्पताल में सात माह के शिशु की मौत के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच एक महीने से अधिक बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि इस जांच को 7 दिन में पूरा करने के आदेश दिए गए थे।
टनकपुर के लाल इमली पड़ाव निवासी इरशाद अहमद के 7 माह के बच्चे को सांस लेने में परेशानी होने पर 22 सितंबर को संयुक्त अस्पताल में भर्ती किया गया था। 24 सितंबर को बच्चे की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इरशाद ने आरोप लगाया कि बिजली गुल होने पर अस्पताल ने जनरेटर नहीं चलाया। जिस कारण बच्चे को ऑक्सीजन नहीं मिल सकी और उसकी मौत हो गई।
शिकायत के बाद जिला मजिस्ट्रेट डॉ.अहमद इकबाल ने 28 सितंबर को मजिस्ट्रेटी जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई। कमेटी में अपर जिलाधिकारी हेमंत कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा और एसीएमओ डा.रश्मि पंत शामिल थे। जांच टीम को दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच सात दिनों के भीतर पूरी कर जांच आख्या देने को आदेशित किया गया था। मगर सात दिन तो दूर 36 दिन बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
जांच कमेटी ने अक्तूबर में टनकपुर अस्पताल जाकर शिकायतकर्ता और डॉक्टर व स्टाफ नर्स के बयान दर्ज किए। सीएमओ का कहना है कि इस मामले में अभी मृतक की मां और कुछ अन्य परिजनों के बयान लिए जाने हैं। इन लोगों के शहर से बाहर होने से बयान नहीं हो पाए थे। जिसके चलते जांच पूरी होने में देरी हो रही है। जांच दल का कहना है कि जांच रिपोर्ट अगले सप्ताह जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।
टनकपुर के लाल इमली पड़ाव निवासी इरशाद अहमद के 7 माह के बच्चे को सांस लेने में परेशानी होने पर 22 सितंबर को संयुक्त अस्पताल में भर्ती किया गया था। 24 सितंबर को बच्चे की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इरशाद ने आरोप लगाया कि बिजली गुल होने पर अस्पताल ने जनरेटर नहीं चलाया। जिस कारण बच्चे को ऑक्सीजन नहीं मिल सकी और उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
शिकायत के बाद जिला मजिस्ट्रेट डॉ.अहमद इकबाल ने 28 सितंबर को मजिस्ट्रेटी जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई। कमेटी में अपर जिलाधिकारी हेमंत कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा और एसीएमओ डा.रश्मि पंत शामिल थे। जांच टीम को दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच सात दिनों के भीतर पूरी कर जांच आख्या देने को आदेशित किया गया था। मगर सात दिन तो दूर 36 दिन बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
जांच कमेटी ने अक्तूबर में टनकपुर अस्पताल जाकर शिकायतकर्ता और डॉक्टर व स्टाफ नर्स के बयान दर्ज किए। सीएमओ का कहना है कि इस मामले में अभी मृतक की मां और कुछ अन्य परिजनों के बयान लिए जाने हैं। इन लोगों के शहर से बाहर होने से बयान नहीं हो पाए थे। जिसके चलते जांच पूरी होने में देरी हो रही है। जांच दल का कहना है कि जांच रिपोर्ट अगले सप्ताह जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।