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आयो नवल वसंत, सखि ऋतुराज कहावे...
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लोहाघाट (चंपावत)। माघ पूर्णिमा से खेतीखान में बैठकी होली धूम मची है। विभिन्न रागों में बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर होल्यारों ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
संगीत प्रेमी नवीन खर्कवाल के आवास में हुई बैठकी होली में होल्यारों ने गणवेश वंदना गणपति को भज ली जै रसिक वो तो आदि कहावे गीत से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सतीश कर्नाटक ने राग काफी में आयो नवल वसंत, सखि ऋतुराज कहावे गीत प्रस्तुत किया। चंद्र सिंह बिष्ट ने राग काफी में आज चलो ब्रज की ओर सांवरिया, मनोज खर्कवाल ने राग धमार में या रसिया से मैं हारी, गोपाल मनराल ने फागुन के दिन चार अपनों बलम मोहे मांगे हूं दे दीजे गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया। होल्यार किशोर जुकरिया, भुवन भट्ट, सतीश जोशी, नरेश ओली, बीसी गहतोड़ी, सौरभ खर्कवाल आदि ने राग धमार, काफी, सहाना में बेहतरीन गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। तबले में संगत मनोज व पंकज कलखुड़िया ने दी।
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संगीत प्रेमी नवीन खर्कवाल के आवास में हुई बैठकी होली में होल्यारों ने गणवेश वंदना गणपति को भज ली जै रसिक वो तो आदि कहावे गीत से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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सतीश कर्नाटक ने राग काफी में आयो नवल वसंत, सखि ऋतुराज कहावे गीत प्रस्तुत किया। चंद्र सिंह बिष्ट ने राग काफी में आज चलो ब्रज की ओर सांवरिया, मनोज खर्कवाल ने राग धमार में या रसिया से मैं हारी, गोपाल मनराल ने फागुन के दिन चार अपनों बलम मोहे मांगे हूं दे दीजे गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया। होल्यार किशोर जुकरिया, भुवन भट्ट, सतीश जोशी, नरेश ओली, बीसी गहतोड़ी, सौरभ खर्कवाल आदि ने राग धमार, काफी, सहाना में बेहतरीन गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। तबले में संगत मनोज व पंकज कलखुड़िया ने दी।
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