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वन कर्मी को वेतन देने में बिकेंगे विभागीय वाहन!
Updated Thu, 07 Jun 2018 11:28 PM IST
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चंपावत। वन विभाग के एक कर्मी की 12 वर्ष के वेतन की रकम देने के लिए वन विभाग के वाहनों की नीलामी होगी। श्रमायुक्त के आदेश और राजस्व विभाग की 6.91 लाख रुपये की वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) के बावजूद वन विभाग ने अब तक कर्मी को भुगतान नहीं किया। बृहस्पतिवार को राजस्व विभाग की टीम ने प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) कार्यालय पहुंच अचल संपत्ति का ब्योरा तलब किया। अगर भुगतान न हुआ, तो वन विभागों के इन वाहनों की नीलामी कर भुगतान दिया जाएगा। इस कार्यवाही से वन महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
पिथौरागढ़ जिले के बजेठी निवासी शेखर तिवारी का कहना है कि 2001 से 2013 की अवधि का विभाग ने वेतन नहीं दिया, जबकि श्रमायुक्त की अदालत ने इस अवधि के वेतन की रकम के भुगतान के 2013 में आदेश दिए थे, मगर विभाग ने इसे नहीं माना। इस धनराशि को अदा नहीं करने पर चंपावत तहसील कार्यालय ने 2013 में प्रभागीय वनाधिकारी की आरसी काटी, लेकिन वन अधिकारियों की दलील को मानते हुए राजस्व विभाग ने आरसी का क्रियान्वयन नहीं किया। इस बीच एक सप्ताह पूर्व मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वसूली की समीक्षा के दौरान इस लटके प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तत्काल वसूली करने के जिलाधिकारी को निर्देश दिए। इस आदेश के बाद प्रशासन ने एकाएक तेजी दिखाते हुए वसूली की कार्यवाही शुरू कर दी।
उप जिलाधिकारी सीमा विश्वकर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार को राजस्व निरीक्षक हरीश जोशी और उप निरीक्षक सुंदर सिंह नेगी को डीएफओ कार्यालय भेज चल संपत्ति का ब्योरा लिया गया। विभाग के पास उपलब्ध छह वाहनों के मूल्यांकन के लिए रोडवेज के फोरमैन को लिखा जा रहा है। इस अवधि में वन कर्मी को भुगतान नहीं होने पर वाहन को जब्त कर नीलाम कराया जाएगा। नीलामी की रकम से कर्मचारी को वेतन देने के अलावा वसूली में लगे राजस्व विभाग के खर्च को भी वसूला जाएगा।
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वन कर्मी शेखर तिवारी 2001 से करीब 12 वर्षों तक बगैर सूचना के गायब रहे। श्रमायुक्त ने कर्मी को भुगतान करने का आदेश जरूर दिया, मगर वन विभाग इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में वाद दायर कर रखा है। मामला अदालत में होने के चलते भुगतान नहीं किया गया है। बृहस्पतिवार को राजस्व विभाग द्वारा की गई कार्यवाही के बाद जिलाधिकारी को पत्र भेज इस मामले में विभाग पक्ष रखेगा। साथ ही इस मामले में विभागीय उच्चाधिकारियों से निर्देश भी मांगे जा रहे हैं।
- कुबेर सिंह बिष्ट, प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।
वे 2001 से 12 साल तक स्वास्थ्य गत कारणों से अवकाश पर रहे थे। इसके बाकायदा चिकित्सा प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज दिए गए। विभाग ने मेरे पक्ष को सही तरीके से नहीं सुना। लगातार आग्रह करने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर मजबूरन श्रमायुक्त की अदालत गया। लेकिन फिर भी भुगतान के लिए इंकार किया जाता रहा।
-शेखर तिवारी, प्रभावित वन कर्मी।
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पिथौरागढ़ जिले के बजेठी निवासी शेखर तिवारी का कहना है कि 2001 से 2013 की अवधि का विभाग ने वेतन नहीं दिया, जबकि श्रमायुक्त की अदालत ने इस अवधि के वेतन की रकम के भुगतान के 2013 में आदेश दिए थे, मगर विभाग ने इसे नहीं माना। इस धनराशि को अदा नहीं करने पर चंपावत तहसील कार्यालय ने 2013 में प्रभागीय वनाधिकारी की आरसी काटी, लेकिन वन अधिकारियों की दलील को मानते हुए राजस्व विभाग ने आरसी का क्रियान्वयन नहीं किया। इस बीच एक सप्ताह पूर्व मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वसूली की समीक्षा के दौरान इस लटके प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तत्काल वसूली करने के जिलाधिकारी को निर्देश दिए। इस आदेश के बाद प्रशासन ने एकाएक तेजी दिखाते हुए वसूली की कार्यवाही शुरू कर दी।
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उप जिलाधिकारी सीमा विश्वकर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार को राजस्व निरीक्षक हरीश जोशी और उप निरीक्षक सुंदर सिंह नेगी को डीएफओ कार्यालय भेज चल संपत्ति का ब्योरा लिया गया। विभाग के पास उपलब्ध छह वाहनों के मूल्यांकन के लिए रोडवेज के फोरमैन को लिखा जा रहा है। इस अवधि में वन कर्मी को भुगतान नहीं होने पर वाहन को जब्त कर नीलाम कराया जाएगा। नीलामी की रकम से कर्मचारी को वेतन देने के अलावा वसूली में लगे राजस्व विभाग के खर्च को भी वसूला जाएगा।
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वन कर्मी शेखर तिवारी 2001 से करीब 12 वर्षों तक बगैर सूचना के गायब रहे। श्रमायुक्त ने कर्मी को भुगतान करने का आदेश जरूर दिया, मगर वन विभाग इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में वाद दायर कर रखा है। मामला अदालत में होने के चलते भुगतान नहीं किया गया है। बृहस्पतिवार को राजस्व विभाग द्वारा की गई कार्यवाही के बाद जिलाधिकारी को पत्र भेज इस मामले में विभाग पक्ष रखेगा। साथ ही इस मामले में विभागीय उच्चाधिकारियों से निर्देश भी मांगे जा रहे हैं।
- कुबेर सिंह बिष्ट, प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।
वे 2001 से 12 साल तक स्वास्थ्य गत कारणों से अवकाश पर रहे थे। इसके बाकायदा चिकित्सा प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज दिए गए। विभाग ने मेरे पक्ष को सही तरीके से नहीं सुना। लगातार आग्रह करने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर मजबूरन श्रमायुक्त की अदालत गया। लेकिन फिर भी भुगतान के लिए इंकार किया जाता रहा।
-शेखर तिवारी, प्रभावित वन कर्मी।