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रैघाड़ी गांव में नौ परिवारों को शौचालय का इंतजार
Updated Fri, 14 Dec 2018 11:38 PM IST
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चंपावत। जिले के बाराकोट विकासखंड का रैघाड़ी गांव खुले में शौच (ओडीएफ) से मुक्ति पाने को छटपटा रहा है। यहां के नौ परिवार तमाम दावों के बावजूद शौचालय से वंचित हैं। ये परिवार दूरदराज खुले में शौच को जाने को मजबूर हैं। कई बार मांग करने के बावजूद शाशन द्वारा उन्हें शौचालय की सुविधा नहीं मिल पाई है।
चंपावत जिले को दो साल पूर्व ही कागजों में खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है मगर धरातल पर हालात ऐसे नहीं है। 2011 के सर्वे के हिसाब से सभी 49209 शौचालयविहीन परिवारों के लिए शौचालय बनाए जा चुके हैं, फिर भी कई हिस्सों में लोगों के पास शौचालय नहीं है। इन लोगों का कहना है कि अधिकतर लोगों के गरीब होने से वे बगैर मदद के शौचालय बनाने की हालत में नहीं है। रैघाड़ी ग्राम पंचायत के 300 परिवारों में से नौ के पास शौचालय नहीं हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह अधिकारी इस मसले को लेकर आवाज भी उठाते रहे हैं। अब उन्होंने फिर से डीएम को पत्र भेजा है।
शौचालय बनाए मगर नहीं मिली प्रोत्साहन राशि
रैघाड़ी गांव के सात लोगों ने कई साल पूर्व शौचालय बनाया, लेकिन उनका भुगतान आज तक नहीं हो सका है। रमेश सिंह, जीत सिंह, पार्वती, कैलाश, केशवी देवी, रमेश और मदन सिंह ने काफी समय पूर्व शौचालय बनाए लेकिन उन्हें अब तक प्रोत्साहन राशि के रूप में मिलने वाले 12000 रुपये नहीं मिले हैं। इन ग्रामीणों का कहना है कि भुगतान के लिए वे लगातार गुहार लगाते हैं मगर उन्हें टाला जा रहा है। भागीरथी देवी, चंद्र सिंह, देवीदत्त आदि का कहना है कि शौचालय नहीं होने से उन्हें घर से दूर जंगलों में खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
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इन नौ परिवारों के पास नहीं है शौचालय:
देवीदत्त, चंद्र सिंह, भागीरथी, देव सिंह, हयात सिंह, शंकर दत्त, घनश्याम, गिरधर और राजेंद्र प्रसाद।
रैघाड़ी गांव के सात लोगों को शौचालय बनाने के बाद भुगतान क्यों नहीं हुआ है, इसका पता लगा जल्द भुगतान कराया जाएगा। वहीं शौचालय विहीन परिवारों के लिए शौचालय निर्माण की जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
- हरगोविंद भट्ट, परियोजना निदेशक, डीआरडीए।
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चंपावत जिले को दो साल पूर्व ही कागजों में खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है मगर धरातल पर हालात ऐसे नहीं है। 2011 के सर्वे के हिसाब से सभी 49209 शौचालयविहीन परिवारों के लिए शौचालय बनाए जा चुके हैं, फिर भी कई हिस्सों में लोगों के पास शौचालय नहीं है। इन लोगों का कहना है कि अधिकतर लोगों के गरीब होने से वे बगैर मदद के शौचालय बनाने की हालत में नहीं है। रैघाड़ी ग्राम पंचायत के 300 परिवारों में से नौ के पास शौचालय नहीं हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह अधिकारी इस मसले को लेकर आवाज भी उठाते रहे हैं। अब उन्होंने फिर से डीएम को पत्र भेजा है।
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शौचालय बनाए मगर नहीं मिली प्रोत्साहन राशि
रैघाड़ी गांव के सात लोगों ने कई साल पूर्व शौचालय बनाया, लेकिन उनका भुगतान आज तक नहीं हो सका है। रमेश सिंह, जीत सिंह, पार्वती, कैलाश, केशवी देवी, रमेश और मदन सिंह ने काफी समय पूर्व शौचालय बनाए लेकिन उन्हें अब तक प्रोत्साहन राशि के रूप में मिलने वाले 12000 रुपये नहीं मिले हैं। इन ग्रामीणों का कहना है कि भुगतान के लिए वे लगातार गुहार लगाते हैं मगर उन्हें टाला जा रहा है। भागीरथी देवी, चंद्र सिंह, देवीदत्त आदि का कहना है कि शौचालय नहीं होने से उन्हें घर से दूर जंगलों में खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
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इन नौ परिवारों के पास नहीं है शौचालय:
देवीदत्त, चंद्र सिंह, भागीरथी, देव सिंह, हयात सिंह, शंकर दत्त, घनश्याम, गिरधर और राजेंद्र प्रसाद।
रैघाड़ी गांव के सात लोगों को शौचालय बनाने के बाद भुगतान क्यों नहीं हुआ है, इसका पता लगा जल्द भुगतान कराया जाएगा। वहीं शौचालय विहीन परिवारों के लिए शौचालय निर्माण की जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
- हरगोविंद भट्ट, परियोजना निदेशक, डीआरडीए।