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साक्षर भारत कार्यक्रम का पहला चरण हुआ बंद
Updated Fri, 13 Oct 2017 11:07 PM IST
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चंपावत। उत्तराखंड राज्य में चंपावत सहित छह अन्य जिलों में चलाए जा रहे साक्षर भारत कार्यक्रम का पहला चरण बंद हो गया है। राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण की ओर से छह जिलों बागेश्वर, चंपावत, हरिद्वार, टिहरी, ऊधमसिंह नगर एवं उत्तरकाशी में जुलाई 2010 से संचालित किए जा रहे साक्षर भारत कार्यक्रम का संचालन पहली अक्तूबर से बंद कर दिया गया है।
इस दौरान चंपावत जिले में कुल 289 लोक शिक्षा केंद्रों में निर्धारित 38617 महिला पुरुषों को साक्षर बनाने के लक्ष्य से अधिक 42519 महिला पुरुषों को पूर्ण साक्षर किया जा चुका है। वहीं साक्षर भारत कार्यक्रम का पहला चरण तो बंद हो गया है, लेकिन साक्षरता प्रेरकों को 16 माह के मानदेय का अब तक भुगतान नहीं हो सका है। इसके साथ ही मानदेय का इंतजार कर रहे 289 लोक शिक्षा केंद्रों में तैनात प्रेरकों का भविष्य अधर में लटक गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक और जिला लोक शिक्षा समिति के सचिव डीएस राजपूत ने बताया कि वर्ष 2010 में भारत सरकार ने साक्षर भारत कार्यक्रम की शुरूआत की थी। जिसके तहत जिले के प्रत्येक विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में लोक शिक्षा केंद्र खोल कर प्रेरकों को नियुक्त किया गया था। ग्राम पंचायतों में दस लाभार्थियों के मानक पर एक प्रेरक और दस से अधिक लाभार्थी होने पर दो प्रेरक नियुक्त किए गए थे।
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कार्यक्रम में उन महिला पुरुषों को सर्वे के आधार पर पंजीकृत किया गया था, जिन्होंने कभी कोई शिक्षा प्राप्त नहीं की थी और जिन्हें पढ़ने, लिखने अथवा अंकों के ज्ञान की कोई जानकारी नहीं थी। जिला समन्वयक महेश चंद्र जोशी ने बताया कि भारत सरकार की ओर से दिए गए लक्ष्य 38617 के विपरीत 15 बार आयोजित की गई बुनियादी साक्षरता परीक्षा में 42519 लाभार्थियों को साक्षर बनाया गया है। उनका कहना है कि लक्ष्य के सापेक्ष 3902 ज्यादा नव साक्षर वह हैं जो मेहनत मजदूरी करने के लिए बाहरी क्षेत्रों से आए थे।
कार्यक्रम के विस्तारीकरण को लेकर उहापोह की स्थिति
चंपावत। साक्षर भारत कार्यक्रम के विस्तारीकरण को लेकर उहापोह की स्थिति जारी है। जिला समन्वयक महेश चंद्र जोशी के अनुसार अभी साक्षर भारत कार्यक्रम के विस्तारीकरण को लेकर किसी प्रकार के दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जिले के सभी लोक शिक्षा केंद्रों में तैनात वरिष्ठ प्रेरकों से कार्यक्रम के तहत उपलब्ध कराई गई सामग्री का भौतिक सत्यापन कर सभी अभिलेखों को संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सौंप दिया गया है।
अन्य राज्यों में कार्यक्रम को मिला 31 दिसंबर तक विस्तार
चंपावत। उत्तराखंड को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों में साक्षर भारत कार्यक्रम का विस्तार 31 दिसंबर 2017 तक के लिए कर दिया गया है। इस संबंध में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की विशेष सचिव रीना राय की ओर से दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। साक्षरता मिशन के राज्य परियोजना प्रबंधक पदमेंद्र सकलानी के अनुसार राज्य में साक्षरता प्रेरकों को 16 माह के मानदेय का भुगतान अटकने के कारण परियोजना को दिसंबर तक का विस्तार नहीं मिल पाया है।
इस दौरान चंपावत जिले में कुल 289 लोक शिक्षा केंद्रों में निर्धारित 38617 महिला पुरुषों को साक्षर बनाने के लक्ष्य से अधिक 42519 महिला पुरुषों को पूर्ण साक्षर किया जा चुका है। वहीं साक्षर भारत कार्यक्रम का पहला चरण तो बंद हो गया है, लेकिन साक्षरता प्रेरकों को 16 माह के मानदेय का अब तक भुगतान नहीं हो सका है। इसके साथ ही मानदेय का इंतजार कर रहे 289 लोक शिक्षा केंद्रों में तैनात प्रेरकों का भविष्य अधर में लटक गया है।
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जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक और जिला लोक शिक्षा समिति के सचिव डीएस राजपूत ने बताया कि वर्ष 2010 में भारत सरकार ने साक्षर भारत कार्यक्रम की शुरूआत की थी। जिसके तहत जिले के प्रत्येक विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में लोक शिक्षा केंद्र खोल कर प्रेरकों को नियुक्त किया गया था। ग्राम पंचायतों में दस लाभार्थियों के मानक पर एक प्रेरक और दस से अधिक लाभार्थी होने पर दो प्रेरक नियुक्त किए गए थे।
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कार्यक्रम में उन महिला पुरुषों को सर्वे के आधार पर पंजीकृत किया गया था, जिन्होंने कभी कोई शिक्षा प्राप्त नहीं की थी और जिन्हें पढ़ने, लिखने अथवा अंकों के ज्ञान की कोई जानकारी नहीं थी। जिला समन्वयक महेश चंद्र जोशी ने बताया कि भारत सरकार की ओर से दिए गए लक्ष्य 38617 के विपरीत 15 बार आयोजित की गई बुनियादी साक्षरता परीक्षा में 42519 लाभार्थियों को साक्षर बनाया गया है। उनका कहना है कि लक्ष्य के सापेक्ष 3902 ज्यादा नव साक्षर वह हैं जो मेहनत मजदूरी करने के लिए बाहरी क्षेत्रों से आए थे।
कार्यक्रम के विस्तारीकरण को लेकर उहापोह की स्थिति
चंपावत। साक्षर भारत कार्यक्रम के विस्तारीकरण को लेकर उहापोह की स्थिति जारी है। जिला समन्वयक महेश चंद्र जोशी के अनुसार अभी साक्षर भारत कार्यक्रम के विस्तारीकरण को लेकर किसी प्रकार के दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जिले के सभी लोक शिक्षा केंद्रों में तैनात वरिष्ठ प्रेरकों से कार्यक्रम के तहत उपलब्ध कराई गई सामग्री का भौतिक सत्यापन कर सभी अभिलेखों को संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सौंप दिया गया है।
अन्य राज्यों में कार्यक्रम को मिला 31 दिसंबर तक विस्तार
चंपावत। उत्तराखंड को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों में साक्षर भारत कार्यक्रम का विस्तार 31 दिसंबर 2017 तक के लिए कर दिया गया है। इस संबंध में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की विशेष सचिव रीना राय की ओर से दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। साक्षरता मिशन के राज्य परियोजना प्रबंधक पदमेंद्र सकलानी के अनुसार राज्य में साक्षरता प्रेरकों को 16 माह के मानदेय का भुगतान अटकने के कारण परियोजना को दिसंबर तक का विस्तार नहीं मिल पाया है।