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वनस्पति में छिपा है निरोग रहने का रहस्य : प्रो. दुबे
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राजकीय महाविद्यालय नागनाथ पोखरी में वनस्पति विज्ञान की ओर से आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार में वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने औषधीय वनस्पति और आयुर्वेद पर विचार रखे। मुख्य वक्ता बीएचयू के प्रो. एनके दुबे ने कहा कि देश में पाई जाने वाली वनस्पति में हमारे निरोग रहने का रहस्य छिपा है। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति पूरी तरह से वैज्ञानिक थी।
महाविद्यालय में ‘मेडिसनल प्लांट्स एंड कम्यूनिटी हेल्थ’ विषय पर वेबिनार आयोजित किया। प्रो. दुबे ने कहा कि हिमालय दुर्लभ जड़ी बूटियों का आवास है। विशिष्ट अतिथि डीडीयू गोरखपुर विवि के प्रो. वीएन पांडेय ने कहा कि उत्तराखंड की राई में पाया जाने वाला ब्रेसिसिन और टमाटर में पाया जाने वाला लाईकोपिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट कैंसर से बचा सकते हैं। कार्यक्रम में सीएसआईआर-एनबीआर लखनऊ के पूर्व वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डा. ताहिर हुसैन, चाय अनुसंधान संस्थान नागरकाटा पश्चिम बंगाल के डा. एके पांडेय, बीएचयू के डा. प्रशांत सिंह और डा. अभिषेक द्विवेदी भी जुड़े थे। वेबिनार में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एस के शर्मा, वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अभय श्रीवास्तव सहित विभिन्न जगह से करीब 300 विशेषज्ञ और शोधार्थी जुड़े थे।
औषधीय पौधे बन सकते हैं रोजगार के अवसर
विशेष वक्ता सीएसआईआर-एनबीआर लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. शरद श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड-19 के चलते जो लोग गांव आए हैं उनके लिए औषधीय पौधे अच्छे अवसर बन सकते हैं। वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीवा नायका ने लाइकेन के बारे में बताया। कहा कि उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में इसका उपयोग औषधि, मसालों और रंजक (डाई) के रूप में होता है। लाइकेन शोध के लिए नया आयाम प्रदान करता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. प्रियंका अग्निहोत्री ने भी अपनी बात रखी।
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महाविद्यालय में ‘मेडिसनल प्लांट्स एंड कम्यूनिटी हेल्थ’ विषय पर वेबिनार आयोजित किया। प्रो. दुबे ने कहा कि हिमालय दुर्लभ जड़ी बूटियों का आवास है। विशिष्ट अतिथि डीडीयू गोरखपुर विवि के प्रो. वीएन पांडेय ने कहा कि उत्तराखंड की राई में पाया जाने वाला ब्रेसिसिन और टमाटर में पाया जाने वाला लाईकोपिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट कैंसर से बचा सकते हैं। कार्यक्रम में सीएसआईआर-एनबीआर लखनऊ के पूर्व वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डा. ताहिर हुसैन, चाय अनुसंधान संस्थान नागरकाटा पश्चिम बंगाल के डा. एके पांडेय, बीएचयू के डा. प्रशांत सिंह और डा. अभिषेक द्विवेदी भी जुड़े थे। वेबिनार में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एस के शर्मा, वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अभय श्रीवास्तव सहित विभिन्न जगह से करीब 300 विशेषज्ञ और शोधार्थी जुड़े थे।
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औषधीय पौधे बन सकते हैं रोजगार के अवसर
विशेष वक्ता सीएसआईआर-एनबीआर लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. शरद श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड-19 के चलते जो लोग गांव आए हैं उनके लिए औषधीय पौधे अच्छे अवसर बन सकते हैं। वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीवा नायका ने लाइकेन के बारे में बताया। कहा कि उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में इसका उपयोग औषधि, मसालों और रंजक (डाई) के रूप में होता है। लाइकेन शोध के लिए नया आयाम प्रदान करता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. प्रियंका अग्निहोत्री ने भी अपनी बात रखी।
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