फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   The four pyres were burnt together on the banks of the Pindar river.

पिंडर नदी किनारे एक साथ जलीं चारों चिताएं

Sun, 23 Oct 2022 10:06 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 23 Oct 2022 10:06 PM IST
विज्ञापन
The four pyres were burnt together on the banks of the Pindar river.
पैनगढ़ गांव में शनिवार तड़के पहाड़ी से हुए भूस्खलन से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से गांव में मातम छाया है। रविवार को जैसे ही परिजन गांव पहुंचे तो वे शवों को देखकर फूट-फूट कर रोने लगे। ग्रामीणों ने आंसू पोंछते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया। हादसे के बाद से पूरे गांव में मातम का माहौल है। रविवार को गमगीन माहौल में चारों शवों की पिंडर नदी के तट पर अंत्येष्टि कर दी गई।
विज्ञापन

पैनगढ़ गांव में हुए भूस्खलन में दबकर देवानंद (57), घनानंद (45) (दोनों भाई थे) पुत्र मालदत्त , बचुली देवी पत्नी मालदत्त और सुनीता देवी (37) पत्नी घनानंद की मौत हो गई थी। हादसे के बाद शनिवार देर रात मयंक (पुत्र घनानंद) गांव पहुंचा। हादसे में अपने माता-पिता दोनों को खोने वाले मयंक (घनानंद) ने जैसे ही शव से चादर हटाई तो वह फूट फूटकर रोने लगा। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह अपनी ताई के गोद में सर रखकर रोते-रोते बेहोश हो गया। देहरादून से घटना के पांच दिन पहले ही गांव आए मालदत्त के बड़े बेटे देवानंद की मौत पर पत्नी उमा देवी और बेटे पवन और विनय भी बिलख-बिलख कर रोते रहे।
विज्ञापन

इसके बाद मृतक देवानंद को उनके पुत्र पवन और विनय एवं घनानंद को उनके बड़े बेटे मयंक ने मुखाग्नि दी। वहीं अन्य दो लोगों की भी अंत्येष्टि की गई। विधायक भूपालराम टम्टा भी पैनगढ़ गांव पहुंचे और घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पैनगढ़ गांव में लगातार हो रहा भूस्खलन से गांव को खतरा पैदा हो गया है वे इस बारे में सरकार व डीएम से जल्द ही गांव के विस्थापन की बात करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

घायल योगेश की हालत में सुधार
भूस्खलन की चपेट में आकर घायल हुए योगेश की हालत में सुधार बताया जा रहा है। उसे पुलिस-प्रशासन ने शनिवार सुबह श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती कराया था। उसके पैर में फ्रैक्चर है और कुछ बाहरी चोटें भी लगीं हैं। वह भी डाक्टरों और मिलने पहुंचने वालों से अपने परिवार के बारे में पूछ रहा है।
जहां जलने थे दीये वहां छाया है अंधेरा
एक ओर जहां दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है वहीं पैनगढ़ गांव में अंधेरा छाया हुआ है। शनिवार रात को पूरे गांव में चूल्हे नहीं जले। सभी ग्रामीण शवों के साथ उनके मलबे से दबे घर के पास बैठे रहे। अभी भी मलबे से टूटे बर्तन, दबे कपड़े और बिखरा अनाज इस आपदा की कहानी कह रहा है। घर के चारों तरफ मलबा ही मलबा बिखरा है। जिन घरों में दीपावली में दीये जलने थे वे घर वीरान हो गए हैं। लोग भूस्खलन के दायरे में आये सभी घरों को छोड़कर या तो टेंटों में ठंड में रात बिता रहे हैं या स्कूलों के कमरों में रातभर जागकर दिन काट रहे हैं।

पहाड़ी से जारी है भूस्खलन
पैनगढ़ गांव में भूस्खलन की घटना के बाद से लगातार पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने का सिलसिला जारी है। लोग दिनभर पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों को देखकर भयभीत हैं। ग्राम प्रधान जानकी देवी, जगमोहन सिंह, दिनेशचंद्र, अशोक पुरोहित और राजेंद्रराम ने बताया कि अब यहां भूस्खलन तेजी से हो रहा है। पहाड़ी पर कई बोल्डर अटके हैं जो कभी भी गांव को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने प्रशासन और सरकार से उन्हें शीघ्र ही सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की। कहा कि दो साल बाद भी सरकार ने ग्रामीणों की आवाज नहीं सुनी। यदि समय पर ग्रामीणों के लिए कहीं सुरक्षित आशियाना बना दिया होता तो ये घटना नहीं होती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed