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Chamoli News: परिवार नियोजन का बोझ भी आधी आबादी के कंधों पर
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Iचमोली में पिछले तीन साल में 50 पुरुष तो 300 महिलाओं ने कराई नसबंदीI
Iभ्रांति के चलते पुरुष नहीं आते आगे, महिलाएं ही निभा रहीं जिम्मेदारीI
Iभले ही समाज में महिलाओं को आधी आबादी का दर्जा दिया गया है, लेकिन परिवार नियोजन की बात आए तो पुरुषों के बजाय महिलाओं को इसके लिए आगे कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के जन जागरुकता अभियान के बावजूद स्थिति यह है कि परिवार नियोजन के लिए पुरुषों को लगाए जा रहे कैंपों में भी महिलाओं को आगे कर दिया जाता है।I
Iचमोली जनपद में पिछले तीन साल में 50 पुरुष तो 300 महिलाओं की नसबंदी हुई। दो दिन पूर्व जिला अस्पताल गोपेश्वर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नंदानगर में पुरुषों के लिए आयोजित परिवार नियोजन के कैंपों में भी महिलाओं की नसबंदी कराई गई। राज्य आंदोलनकारी चंद्रकला बिष्ट का कहना है कि महिलाओं को पुरुषों की बराबरी का सिर्फ दिखावा किया जाता है। परिवार नियोजन के लिए भी महिलाओं पर दबाव बनाया जाता है।I
Iसामाजिक सरोकारों से जुड़ी नंदा देवी महिला लोक विकास संस्था की अध्यक्ष डॉ. किरन पुराेहित का कहना है कि पहाड़ में महिलाएं आर्थिकी की रीढ़ हैं। उनके कंधों पर ही परिवार नियोजन की जिम्मेदारी भी थोप दी जाती है। सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति सबसे अधिक होती है। यदि महिलाएं अपने कदम पीछे करें, तो ये कार्यक्रम धराशायी हो जाएंगे।I
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Iजिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराग धनिक का कहना है कि भ्रांति के चलते पुरुष नसबंदी कराने आगे नहीं आते हैं। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। पुरुष नसबंदी से कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। यह यौन जीवन को बेहतर बनाता है।I
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Iभ्रांति के चलते पुरुष नहीं आते आगे, महिलाएं ही निभा रहीं जिम्मेदारीI
Iभले ही समाज में महिलाओं को आधी आबादी का दर्जा दिया गया है, लेकिन परिवार नियोजन की बात आए तो पुरुषों के बजाय महिलाओं को इसके लिए आगे कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के जन जागरुकता अभियान के बावजूद स्थिति यह है कि परिवार नियोजन के लिए पुरुषों को लगाए जा रहे कैंपों में भी महिलाओं को आगे कर दिया जाता है।I
Iचमोली जनपद में पिछले तीन साल में 50 पुरुष तो 300 महिलाओं की नसबंदी हुई। दो दिन पूर्व जिला अस्पताल गोपेश्वर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नंदानगर में पुरुषों के लिए आयोजित परिवार नियोजन के कैंपों में भी महिलाओं की नसबंदी कराई गई। राज्य आंदोलनकारी चंद्रकला बिष्ट का कहना है कि महिलाओं को पुरुषों की बराबरी का सिर्फ दिखावा किया जाता है। परिवार नियोजन के लिए भी महिलाओं पर दबाव बनाया जाता है।I
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Iसामाजिक सरोकारों से जुड़ी नंदा देवी महिला लोक विकास संस्था की अध्यक्ष डॉ. किरन पुराेहित का कहना है कि पहाड़ में महिलाएं आर्थिकी की रीढ़ हैं। उनके कंधों पर ही परिवार नियोजन की जिम्मेदारी भी थोप दी जाती है। सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति सबसे अधिक होती है। यदि महिलाएं अपने कदम पीछे करें, तो ये कार्यक्रम धराशायी हो जाएंगे।I
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Iजिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराग धनिक का कहना है कि भ्रांति के चलते पुरुष नसबंदी कराने आगे नहीं आते हैं। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। पुरुष नसबंदी से कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। यह यौन जीवन को बेहतर बनाता है।I