बदरीनाथ। संतानदायिनी मां अनसूया ने मंगलवार को भगवान बदरीनाथ से विदा ली। बदरीनाथ में श्रद्धालुओं ने मां अनसूया को ब्रह्मकमल भेंट किए। देश के अंतिम गांव माणा में भोटिया जनजाति की महिलाओं ने राजी, खुशी राखी, जो जस देई हे अनसूया मां जैसे मांगल गीत गाकर अपनी आराध्य देवी की स्तुति दी। मंगलवार को मां अनसूया की दिवारा यात्रा रात्रि प्रवास के लिए विनायकचट्टी में ध्याणी (विवाहित बेटी) अंजनी देवी के घर पहुंची। मां अनसूया की दिवारा यात्रा को लेकर जोशीमठ क्षेत्र के लोगों में उत्साह का माहौल है। 16 अक्तूबर को माता की दिवारा यात्रा रात्रि प्रवास के लिए पांडुकेश्वर पहुंचेगी।
सोमवार को बदरीनाथ क्षेत्र का भ्रमण करने के पश्चात मां अनसूया की डोली रात्रि प्रवास के लिए खाकचौक के महंत बालकदास के निवास पर पहुंची। बदरीनाथ में मां अनसूया ने सरस्वती नदी में पवित्र स्नान कर माता मूर्ति के साथ ही वसुधारा, व्यास गुफा, गणेश गुफा, पित्रधारा और माणा घंड्याल के दर्शन किए। यहां भक्तों ने अपनी आराध्य देवी का ब्रह्मकमल से भव्य स्वागत किया। मंगलवार को खाकचौक में तड़के से ही मां अनसूया की पूजाएं शुरू हुईं। तीर्थ पुरोहित बलराम तिवारी और पंडित विनोद सेमवाल ने माता की शृंगार और अन्य नित्य पूजाएं संपन्न की। सुबह नौ बजे माता की डोली ने बदरीनाथ परिक्षेत्र में भ्रमण कर अपने भक्तों को दर्शन दिए। देश-विदेश के तीर्थयात्रियों ने भी माता अनसूया से मनौतियां मांगी। अपराह्न एक बजे मां अनसूया ने भगवान बदरीनाथ से विदा लेकर हनुमान चट्टी के लिए प्रस्थान किया। हनुमान चट्टी में मां अनसूया का राजभोग लगाया गया। इस मौके पर प्रबंधक हरेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी, महाप्रबंधक भगत सिंह बिष्ट, ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद राणा, धीरेंद्र सिंह राणा, देवेंद्र सिंह बर्त्वाल, रविंद्र सिंह नेगी, प्रदीप सिंह बिष्ट, सुरेंद्र बिष्ट, नवीन रावत, आकाश नेगी, वृजमोहन रावत, जातवर बिष्ट, महावीर राणा, विजय सिंह आदि मौजूद थे।

बदरीनाथ धाम परिसर में भक्तों को दर्शन देती संतानदायिनी मां अनसूया की उत्सव डोली।- फोटो : GOPESHWAR