बदरीनाथ। संतानदायिनी माता अनसूया ने सोमवार को अलकनंदा में स्नान करने के बाद भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए। करीब एक घंटे तक माता अनसूया भगवान बदरीनाथ के सानिध्य में रही। इस दौरान मां अनसूया ने माणा गांव में घंटाकर्ण मंदिर के दर्शन भी किए। साथ ही माणा गांव में अपनी ध्याणियों से भी भेंट की। ध्याणियों ने मांगल गीत गाकर अपनी आराध्य देवी की पूजा-अर्चना की। तो वहीं मां अनसूया की डोली ने भी ढोल दमाऊं की थाप पर अद्भुत नृत्य किया और भक्तों को आशीर्वाद दिया। रात्रि प्रवास के लिए माता की उत्सव डोली बदरीनाथ के समीप ही बामणी गांव पहुंची।
सोमवार को बदरीनाथ धाम में मां अनसूया का तीर्थयात्रियों, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारियों, वेदपाठियों और हक-हकूकधारियों ने फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। मां अनसूया की डोली रविवार को देर शाम बदरीनाथ धाम पहुंची। यहां बीकेटीसी के अधिकारियों ने माता की डोली का जोरदार स्वागत किया। सोमवार को तड़के ही मां अनसूया की डोली ने तप्तकुंड और गांधी घाट पर अलकनंदा में पवित्र स्नान किया। तीर्थ पुरोहित बलराम तिवारी और मां अनसूया के पुजारी विनोद सेमवाल ने माता की शक्ति पूजा और अन्य पूजाएं संपन्न की। सुबह छह बजे माता की डोली ने बदरीनाथ सभा मंडप में प्रवेश किया। यहां मौजूद आचार्य ब्राह्मणों, बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने माता का स्वागत कर आरती की। इस दौरान वेद मंत्रों से बदरीनाथ धाम गुंजायमान हो उठा। करीब एक घंटे तक बदरीनाथ धाम में विशेष पूजाएं आयोजित हुई। पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद मां अनसूया ने मंदिर परिसर में मौजूद तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को दर्शन दिए। भक्तों ने माता को चुनरी, साड़ी और श्रृंगार सामग्री भेंट की। दोपहर बाद माता की डोली रात्रि प्रवास के लिए बामणी गांव पहुंची। दिवारा यात्रा समिति के संरक्षक भगत सिंह बिष्ट ने बताया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद भी दिवारा यात्रा में देवी भक्तों का हुजूम उमड़ रहा है। माता अनसूया ने बदरीनाथ भगवान के दर्शन करने के पश्चात ढोल दमाऊं की थाप पर अद्भुत नृत्य किया और भक्तों को आशीर्वाद दिया।